13 अक्टूबर 2026
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केरल BJP ने कांग्रेस पर पिनाराई विजयन को ED जांच से बचाने का आरोप लगाया

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केरल BJP ने कांग्रेस पर पिनाराई विजयन को ED जांच से बचाने का आरोप लगाया

सारांश

केरल BJP अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर का आरोप है कि कांग्रेस ने पूर्व CM पिनाराई विजयन को ED की हवाला जांच से बचाने के लिए हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद FIR में चार दिन की देरी की — और FIR दर्ज होने के महज आधे घंटे में विजयन कोर्ट पहुँच गए।

मुख्य बातें

केरल BJP अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने 13 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस पर पूर्व CM पिनाराई विजयन को ED जांच से बचाने का आरोप लगाया।
केरल हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद राज्य सरकार ने चार दिन बाद FIR दर्ज की।
FIR दर्ज होने के आधे घंटे के भीतर विजयन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
SIT के गठन के बाद 17 दिन बीतने पर भी जांच की प्रगति पर कोई स्पष्टता नहीं; कानूनी समय-सीमा 14 दिन की बताई गई।
चंद्रशेखर ने कांग्रेस और IUML पर यह आशंका जताई कि जांच कांग्रेस कैबिनेट सदस्यों तक भी पहुँच सकती है।

केरल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा शुरू की गई कथित हवाला लेनदेन जांच से बचाने के लिए जानबूझकर कानूनी कार्रवाई में देरी कर रही है। चंद्रशेखर के अनुसार, इस रवैये से कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (CPI-M) के बीच राजनीतिक मिलीभगत के संकेत मिलते हैं।

एफआईआर में देरी और कोर्ट के आदेश का मामला

केरल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को विजयन के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद, राज्य सरकार ने कोर्ट का आदेश मिलने के चार दिन बाद एफआईआर दर्ज की। भाजपा नेता चंद्रशेखर ने सवाल उठाया कि यह देरी क्यों की गई और क्या इसका उद्देश्य विजयन को उच्च न्यायालय में अपील दायर करने का अवसर देना था।

उन्होंने यह भी बताया कि एफआईआर दर्ज होने के मात्र आधे घंटे के भीतर विजयन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी — जो उनके अनुसार, पूर्व-नियोजित कानूनी रणनीति की ओर इशारा करती है।

एसआईटी की जांच पर सवाल

चंद्रशेखर ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की कार्यप्रणाली पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'एसआईटी के गठन के बाद से 17 दिन बीत चुके थे, लेकिन टीम द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में कोई स्पष्टता नहीं थी।' उनके अनुसार, कानून के तहत शुरुआती जांच के लिए अधिकतम 14 दिन का समय निर्धारित है, और यह समय-सीमा पहले ही पार हो चुकी है।

गौरतलब है कि ED ने पिछले महीने केरल पुलिस प्रमुख को इस मामले में केस दर्ज करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद SIT का गठन किया गया।

कांग्रेस और IUML पर गंभीर आरोप

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) को यह आशंका है कि कथित हवाला लेनदेन की जांच कांग्रेस नेतृत्व वाली कैबिनेट के कुछ सदस्यों तक भी पहुँच सकती है। उन्होंने कहा कि इसी डर के चलते कांग्रेस कानूनी प्रक्रिया को धीमा करने की कोशिश कर रही है।

यह ऐसे समय में आया है जब जांच शुरू होने पर कांग्रेस ने स्वयं यह घोषणा की थी कि वह 'राजनीतिक बदले की भावना से काम नहीं करेगी और कानून का पालन करेगी।' चंद्रशेखर ने इस बयान की याद दिलाते हुए पार्टी के दोहरे मापदंड का आरोप लगाया।

राजनीतिक मिलीभगत का आरोप

चंद्रशेखर ने कहा कि कांग्रेस और CPI-M, केरल के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी सहयोगी बनते जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने कानूनी जवाबदेही के ऊपर अपने राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी है।

आलोचकों का कहना है कि यह मामला केरल की राजनीति में एक नए ध्रुवीकरण का संकेत है, जहाँ विपक्षी भाजपा सत्तारूढ़ कांग्रेस पर कथित भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगा रही है। आने वाले दिनों में हाई कोर्ट की सुनवाई और SIT की जांच की दिशा इस विवाद का रुख तय करेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में पिनाराई विजयन के खिलाफ ED मामला क्या है?
यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ कथित हवाला लेनदेन से जुड़ी जांच है, जिसे प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुरू किया। ED के निर्देश पर केरल पुलिस ने मामला दर्ज किया और SIT का गठन किया गया।
केरल हाई कोर्ट ने इस मामले में क्या आदेश दिया था?
केरल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को विजयन के खिलाफ लगाए आरोपों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। हालाँकि, BJP के आरोपों के अनुसार, राज्य सरकार ने उस आदेश के चार दिन बाद FIR दर्ज की।
BJP ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए हैं?
BJP अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस ने जानबूझकर FIR में देरी की, SIT जांच को धीमा रखा, और पिनाराई विजयन को हाई कोर्ट जाने का समय दिया। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस और CPI-M के बीच राजनीतिक मिलीभगत है।
SIT की जांच में क्या समस्या बताई जा रही है?
BJP का कहना है कि SIT के गठन के 17 दिन बाद भी जांच की प्रगति के बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। कानून के तहत शुरुआती जांच के लिए अधिकतम 14 दिन की समय-सीमा होती है, जो पहले ही पार हो चुकी है।
क्या कांग्रेस और IUML पर भी जांच का खतरा है?
BJP नेता चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और IUML को डर है कि कथित हवाला लेनदेन की जांच कांग्रेस नेतृत्व वाली कैबिनेट के कुछ सदस्यों तक भी पहुँच सकती है। यह आरोप अभी तक सत्यापित नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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