केरल हाई कोर्ट का CMRL-Xalogic मामले में VACB को FIR का आदेश, BJP ने विजयन से माँगा इस्तीफा
सारांश
मुख्य बातें
केरल उच्च न्यायालय ने 9 अक्टूबर 2026 को CMRL-Xalogic वित्तीय लेन-देन मामले में विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया, जिससे तिरुवनंतपुरम में नया राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। अदालत ने इसके साथ ही केरल पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा गठित विशेष जाँच दल (SIT) को भी रद्द कर दिया। इस फैसले से पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, उनकी बेटी वीना, उनके पति और सीपीआईएम विधायक पी.ए. मोहम्मद रियास सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ जाँच का रास्ता साफ हो गया है।
मुख्य घटनाक्रम
अदालत के आदेश के तहत VACB की नई SIT को CMRL, Xalogic और उससे जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू करनी होगी। इससे पहले केरल पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक SIT बनाई थी, जिसे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को रद्द कर दिया। गौरतलब है कि इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी पहले कार्रवाई की माँग करते हुए राज्य सरकार को संदेश भेजा था।
यह ऐसे समय में आया है जब सोमवार से केरल विधानसभा का नौ दिवसीय सत्र शुरू होने वाला है, जो इस मामले को लेकर राजनीतिक संग्राम का प्रमुख मंच बन सकता है।
सरकार की प्रतिक्रिया
फैसला आने के तुरंत बाद राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने कहा कि सरकार अदालत के आदेश का विस्तार से अध्ययन करने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय करेगी। उन्होंने इस फैसले को सरकार के लिए झटका मानने से इनकार किया।
चेन्निथला ने कहा, 'हमने कानूनी राय लेने के बाद प्रारंभिक जाँच शुरू की थी। अब कोर्ट कुछ और कह रहा है — आदेश आने दीजिए और हम जरूरी कार्रवाई करेंगे।' उन्होंने स्पष्ट किया कि जब ED ने कार्रवाई की माँग की थी, तो उन्होंने उसे राज्य पुलिस प्रमुख के पास भेजा था, जिन्होंने कानूनी सलाह के आधार पर शुरुआती जाँच का फैसला लिया था।
सीपीआईएम का रुख
सीपीआईएम के वरिष्ठ नेता और विजयन के करीबी सहयोगी एम.वी. जयराजन ने अदालत की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'कोर्ट ने आदेश दिया है, लेकिन इसे जारी करने से पहले न तो विजयन और न ही किसी और की बात सुनी गई — इसलिए प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन का सवाल उठता है।'
जयराजन ने घोषणा की कि सीपीआईएम इस मामले में कानूनी और राजनीतिक, दोनों मोर्चों पर लड़ाई जारी रखेगी।
भाजपा की माँग
भाजपा के वरिष्ठ विधायक और पूर्व केंद्रीय मंत्री वी. मुरलीधरन ने सीपीआईएम की आपत्तियों को खारिज करते हुए पूछा कि यदि पार्टी को लगता था कि विजयन का पक्ष नहीं सुना गया, तो उन्होंने खुद को मामले में पक्षकार क्यों नहीं बनाया, जबकि ऐसा करना संभव था।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्य उपाध्यक्ष शोन जॉर्ज ने आरोप लगाया कि इस मामले में पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार और काले धन से जुड़े लेन-देन शामिल थे। जॉर्ज ने कहा कि एफआईआर के आदेश के बाद विजयन को विपक्ष के नेता के पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है और यदि उनमें थोड़ी भी नैतिक जिम्मेदारी का अहसास है, तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए।
आगे क्या होगा
सभी की निगाहें अब सोमवार से शुरू होने वाले केरल विधानसभा के नौ दिवसीय सत्र पर टिकी हैं। सत्ता पक्ष इस मुद्दे को विजयन और वामपंथ पर हमले के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकता है। VACB की नई SIT जब एफआईआर दर्ज करेगी, तो जाँच की दिशा और दायरा स्पष्ट होगा। आलोचकों का कहना है कि यह मामला केरल की राजनीति को आने वाले हफ्तों तक प्रभावित करता रहेगा।