सीएमआरएल-एक्सालॉजिक विवाद: सीपीआई(एम) का कांग्रेस-भाजपा मिलीभगत का आरोप, भाजपा बोली — जांच विजयन को बचाने की कोशिश
सारांश
मुख्य बातें
केरल में सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले को लेकर राजनीतिक संघर्ष 22 सितंबर 2026 को एक नए और पेचीदे मोड़ पर पहुँच गया, जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) — दोनों विपक्षी दलों ने — कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) सरकार पर विपरीत दिशाओं से एक साथ हमला बोल दिया। इस असामान्य राजनीतिक स्थिति में एक पक्ष का आरोप है कि सरकार पूर्व मुख्यमंत्री को निशाना बना रही है, जबकि दूसरे का दावा है कि वही सरकार उन्हें बचाने में लगी है।
सीपीआई(एम) के आरोप: 'मोदी की बी टीम' बन गए सतीशन
सीपीआई(एम) के राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने मुख्यमंत्री वीडी सतीशन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'बी टीम' की तरह काम कर रहे हैं। गोविंदन के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को राजनीतिक रूप से कमज़ोर करने के लिए कांग्रेस और BJP ने परस्पर मिलीभगत की है।
उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पत्र के आधार पर UDF सरकार द्वारा क्राइम ब्रांच जांच का आदेश देने के निर्णय पर सवाल उठाया। गोविंदन का तर्क था कि यह कदम कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है।
भाजपा का पलटवार: जांच विजयन की 'ढाल' है
BJP विधायक वी. मुरलीधरन ने बिल्कुल विपरीत रुख अपनाते हुए आरोप लगाया कि क्राइम ब्रांच की यह जांच दरअसल UDF और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) के बीच एक अनकही सहमति का नतीजा है — जिसका उद्देश्य विजयन को अधिक प्रभावी एजेंसी जांच से बचाना है।
मुरलीधरन ने यह भी पूछा कि जब आयकर विभाग, गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) और ED पहले ही इस प्रकरण की जांच कर चुके हैं, तो एक और प्रारंभिक जांच बिठाने की क्या आवश्यकता है। उनके अनुसार, सतर्कता विभाग को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत यह मामला संभालना चाहिए था, और अंततः जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जानी चाहिए।
सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामला क्या है
सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामला सीएमआरएल और एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस के बीच कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़ा है। एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की बेटी वीना टी. से संबद्ध कंपनी बताई जाती है। ED ने इस मामले में और गहरी जांच की मांग की थी।
वीना के पति, सीपीआई(एम) विधायक और पूर्व राज्य मंत्री पीए मोहम्मद रियास भी इस जांच के दायरे में बताए जाते हैं। यह मामला केरल की राजनीति में उस समय से सक्रिय है जब से विभिन्न केंद्रीय एजेंसियाँ इसकी पड़ताल कर रही हैं।
सरकार की स्थिति
UDF सरकार का कहना है कि क्राइम ब्रांच जांच का आदेश ED के पत्र के आधार पर दिया गया है और आगे की कार्रवाई कानून के दायरे में होगी। सरकार ने न तो सीपीआई(एम) के मिलीभगत के आरोप को स्वीकार किया है और न ही BJP की CBI जांच की मांग पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है।
आगे की राजनीतिक तस्वीर
यह ऐसे समय में आया है जब केरल की राजनीति में LDF और UDF के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला पहले से चल रहा है। गौरतलब है कि दो प्रमुख विपक्षी दलों द्वारा एक ही सरकार पर परस्पर विरोधी आरोप लगाना केरल की राजनीतिक संस्कृति में असामान्य नहीं है, लेकिन इस बार दोनों का केंद्रबिंदु एक ही व्यक्ति — पिनाराई विजयन — हैं। जांच का दायरा और उसकी दिशा आने वाले हफ्तों में केरल की राजनीतिक गर्मी को और बढ़ा सकती है।