26 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामला: पूर्व न्यायिक अधिकारी गिरिबाला सिंह ने उकसाने से इनकार, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जमानत पर फैसला सुरक्षित रखा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामला: पूर्व न्यायिक अधिकारी गिरिबाला सिंह ने उकसाने से इनकार, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जमानत पर फैसला सुरक्षित रखा

सारांश

शादी के पाँच महीने बाद जान गँवाने वाली ट्विशा शर्मा के मामले में पूर्व न्यायिक अधिकारी गिरिबाला सिंह ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप नकारे। बचाव पक्ष ने गर्भपात पर नाराज़गी को क्रूरता मानने से इनकार किया; जमानत पर फैसला सुरक्षित।

मुख्य बातें

पूर्व न्यायिक अधिकारी गिरिबाला सिंह ने 26 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में अपनी बहू ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप नकारे।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि गर्भपात को लेकर नाराज़गी 'आवेश में' थी और गिरिबाला सिंह बाद में माफी भी माँग चुकी थीं।
जस्टिस अजय कुमार निरंकारी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
अभियोजन पक्ष के वकील सिद्धार्थ अग्रवाल ने जाँच लंबित रहने का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया।
ट्विशा शर्मा शादी के पाँच महीने बाद 12 मई को भोपाल में अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं; कटारा हिल्स पुलिस स्टेशन में दहेज निषेध अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज है।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 26 अक्टूबर 2026 को पूर्व न्यायिक अधिकारी गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। गिरिबाला सिंह पर अपनी बहू ट्विशा शर्मा के साथ क्रूरता करने और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप हैं। भोपाल में सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह के वकील ने जस्टिस अजय कुमार निरंकारी के समक्ष सभी आरोपों को निराधार बताया।

बचाव पक्ष की दलीलें

गिरिबाला सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने तर्क दिया कि उनकी मुवक्किल ट्विशा शर्मा के गर्भपात के फैसले से नाराज़ अवश्य थीं, क्योंकि उनके बेटे समर्थ सिंह और वे स्वयं उस बच्चे को चाहती थीं। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नाराज़गी को उत्पीड़न या क्रूरता की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

वकील ने अदालत को बताया, 'सास इसलिए बहुत परेशान थीं, क्योंकि बहू उनकी बात नहीं सुन रही थी और उसने गर्भपात करवा लिया। सास की प्रतिक्रिया केवल गुस्से में थी और बाद में उन्होंने अपनी बातों के लिए माफी भी मांग ली थी।' बचाव पक्ष के अनुसार, गिरिबाला सिंह ने न तो शर्मा को गर्भपात के लिए मजबूर किया और न ही उनके साथ किसी प्रकार की क्रूरता की।

चैट साक्ष्य पर बचाव पक्ष का रुख

मामले में उन चैट संदेशों का हवाला दिया गया है, जिनमें गिरिबाला सिंह ने कथित तौर पर गर्भपात को लेकर ट्विशा शर्मा को 'कातिल' जैसे शब्दों से संबोधित किया था। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि ये शब्द आवेश की स्थिति में कहे गए थे और इनसे यह नहीं सिद्ध होता कि गिरिबाला सिंह ने शर्मा को आत्महत्या के लिए प्रेरित किया।

वकील ने यह भी कहा कि उक्त चैट साक्ष्य गिरिबाला सिंह की बजाय उनके बेटे समर्थ सिंह के आचरण की ओर अधिक संकेत करते हैं। इसके अतिरिक्त, बचाव पक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि शर्मा को ससुराल में कैद नहीं किया गया था; वे दिल्ली जाने की योजना बना रही थीं और वहाँ नौकरी के लिए आवेदन भी कर चुकी थीं।

अभियोजन पक्ष का विरोध

जमानत याचिका का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ अग्रवाल ने दलील दी कि जाँच अभी लंबित है और रिहाई की स्थिति में गिरिबाला सिंह गवाहों तथा साक्ष्यों को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने अदालत से जमानत याचिका अस्वीकार करने की माँग की।

मामले की पृष्ठभूमि

नोएडा की निवासी ट्विशा शर्मा की मुलाकात एक डेटिंग ऐप के ज़रिए भोपाल के वकील समर्थ सिंह से हुई थी, जो पूर्व न्यायिक अधिकारी गिरिबाला सिंह के बेटे हैं। विवाह के महज़ पाँच महीने बाद, 12 मई को शर्मा भोपाल स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई पाई गईं।

ट्विशा शर्मा के परिजनों ने पति और ससुराल पक्ष पर घरेलू हिंसा करने तथा दहेज की माँग को लेकर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। कटारा हिल्स पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता और दहेज निषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की पूर्व अध्यक्ष रह चुकीं गिरिबाला सिंह को शुरुआत में एक सत्र न्यायालय से अग्रिम जमानत मिल गई थी। बाद में राज्य सरकार और ट्विशा के परिवार ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी, जिस पर उच्च न्यायालय ने वह राहत रद्द कर दी थी। अब नई जमानत अर्जी पर न्यायालय का फैसला प्रतीक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन चैट साक्ष्य में 'कातिल' जैसे शब्दों का प्रयोग न्यायालय के लिए निर्णायक परीक्षण बिंदु होगा। यह देखना महत्त्वपूर्ण है कि जब आरोपी स्वयं न्याय व्यवस्था का हिस्सा रही हो, तो अदालतें साक्ष्य-प्रभाव के जोखिम को किस तरह तौलती हैं — यह फैसला भविष्य के ऐसे मामलों के लिए एक मिसाल बन सकता है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामला क्या है?
यह मामला नोएडा निवासी ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़ा है, जो शादी के पाँच महीने बाद 12 मई को भोपाल में अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई पाई गईं। उनके परिजनों ने पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह पर घरेलू हिंसा व दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
गिरिबाला सिंह पर क्या आरोप हैं?
पूर्व न्यायिक अधिकारी गिरिबाला सिंह पर भारतीय न्याय संहिता और दहेज निषेध अधिनियम के तहत क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप हैं। कटारा हिल्स पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में क्या हुआ?
26 अक्टूबर 2026 को जस्टिस अजय कुमार निरंकारी के समक्ष दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। बचाव पक्ष ने आरोपों को निराधार बताया जबकि अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य-प्रभाव का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया। अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
बचाव पक्ष ने चैट साक्ष्य पर क्या तर्क दिया?
बचाव पक्ष ने कहा कि जिन चैट में ट्विशा शर्मा को 'कातिल' कहा गया, वे शब्द आवेश में बोले गए थे और गिरिबाला सिंह बाद में माफी भी माँग चुकी थीं। वकील ने यह भी तर्क दिया कि ये चैट बेटे समर्थ सिंह के आचरण की ओर अधिक इशारा करती हैं।
गिरिबाला सिंह को पहले जमानत क्यों रद्द हुई थी?
सत्र न्यायालय ने शुरुआत में गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन राज्य सरकार और ट्विशा के परिजनों ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने वह राहत रद्द कर दी थी और अब नई जमानत याचिका पर फैसला प्रतीक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले