ट्विशा शर्मा दहेज हत्या केस: सीबीआई ने पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को भोपाल से किया गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 28 मई 2026 को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके से पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर लिया। गिरिबाला सिंह पर आरोप है कि उन्होंने अपनी बहू ट्विशा शर्मा को दहेज के लिए प्रताड़ित किया और कथित तौर पर उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर किया। यह गिरफ्तारी मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा गिरिबाला की अग्रिम जमानत रद्द किए जाने के ठीक एक दिन बाद हुई।
गिरफ्तारी का घटनाक्रम
सीबीआई की टीम भारी पुलिस बल के साथ गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे गिरिबाला सिंह के आवास पर पहुँची। स्थानीय पुलिस ने पूरे कटारा हिल्स इलाके में बैरिकेडिंग कर लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी। एजेंसी ने पाँच घंटे से अधिक पूछताछ के बाद उन्हें हिरासत में लिया। बाग सेवनिया थाना प्रभारी अमित सोनी ने बताया कि गिरिबाला सिंह को उसी दिन अदालत में पेश किया जाएगा और मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
मामले की पृष्ठभूमि
ट्विशा शर्मा की शादी 9 दिसंबर 2025 को गिरिबाला सिंह के बेटे समर्थ सिंह से हुई थी। शादी के महज पाँच महीने बाद, 12 मई 2026 को ट्विशा अपने ससुराल में मृत पाई गईं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह फांसी बताई गई। हालाँकि, उच्च न्यायालय ने यह भी दर्ज किया कि ट्विशा के शरीर पर छह से सात अतिरिक्त चोटों के निशान थे — जिनमें बाएं हाथ, उंगली और सिर पर चोटें शामिल थीं। बाद की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि ये चोटें शव को उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं लगी थीं।
उच्च न्यायालय का आदेश और जमानत रद्द
घटना के दो दिन बाद गिरिबाला सिंह ने भोपाल की सत्र अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 15 मई को उनकी उम्र और मृतका को पैसे ट्रांसफर किए जाने का हवाला देते हुए जमानत दे दी थी। लेकिन बुधवार को अवकाशकालीन न्यायाधीश जस्टिस देव नारायण मिश्रा ने 17 पन्नों के आदेश में यह जमानत रद्द कर दी। उच्च न्यायालय ने कहा कि निचली अदालत ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों और साक्ष्यों की समुचित जाँच नहीं की।
व्हाट्सऐप चैट और परिवार के आरोप
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि व्हाट्सऐप चैट और ट्विशा के परिवार के बयानों से यह साफ होता है कि आरोप केवल पति समर्थ सिंह तक सीमित नहीं हैं। कोर्ट ने कहा, 'व्हाट्सऐप चैट से भी यह नहीं कहा जा सकता कि आरोप सिर्फ समर्थ सिंह के खिलाफ हैं।' परिवार का आरोप है कि गिरिबाला सिंह और उनके बेटे ने मिलकर ट्विशा को प्रताड़ित किया और उन पर गर्भपात कराने का दबाव बनाया। उच्च न्यायालय ने भी माना कि ट्विशा द्वारा गर्भपात कराया जाना एक स्वीकृत तथ्य है।
कानूनी धाराएँ और साक्ष्य छेड़छाड़ की आशंका
उच्च न्यायालय ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 80(2), 85 और 3(5) के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत गंभीरता से जाँच की आवश्यकता बताई। ट्विशा के पिता के वकील ने अदालत में दलील दी कि गिरिबाला सिंह साइबर फॉरेंसिक और क्राइम सीन मैनेजमेंट में प्रशिक्षित रिटायर्ड न्यायिक अधिकारी रही हैं, और संभव है कि उन्होंने अपने अनुभव का उपयोग कर घटनास्थल के साक्ष्यों से छेड़छाड़ की हो। यह मामला अब सीबीआई की जाँच के अगले चरण में प्रवेश कर चुका है, और आने वाले दिनों में अदालत में पेशी के बाद रिमांड की प्रक्रिया निर्धारित होगी।