26 अक्टूबर 2026
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जयशंकर ने नई दिल्ली में रूसी स्टेट ड्यूमा अध्यक्ष वोलोदिन से की मुलाकात, भारत-रूस संसदीय सहयोग पर चर्चा

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जयशंकर ने नई दिल्ली में रूसी स्टेट ड्यूमा अध्यक्ष वोलोदिन से की मुलाकात, भारत-रूस संसदीय सहयोग पर चर्चा

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने क्रमशः सोमवार और रविवार को रूसी स्टेट ड्यूमा अध्यक्ष वोलोदिन से मुलाकात की — यह 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की पृष्ठभूमि में भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को संसदीय स्तर पर और मजबूत करने का स्पष्ट संकेत है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में रूसी स्टेट ड्यूमा अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन से भेंट की।
बैठक में भारत-रूस विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक दिन पहले 25 अक्टूबर को वोलोदिन से मुलाकात कर संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान पर चर्चा की।
वोलोदिन नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में भाग लेने आए थे।
ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचा; सदस्य देश वैश्विक निर्यात का लगभग एक चौथाई ।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में रूस के स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन और उनके प्रतिनिधिमंडल से भेंट की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और सुदृढ़ करने के साथ-साथ संसदीय संबंधों को नई गहराई देने के अवसरों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

बैठक में क्या हुई चर्चा

जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'नई दिल्ली में रूस के स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन और उनके प्रतिनिधिमंडल से मिलकर खुशी हुई। हमने अपने द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ संसदीय संबंधों को और गहरा करने के अवसरों पर चर्चा की।' दोनों पक्षों ने भारत-रूस विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

लोकसभा अध्यक्ष की मुलाकात और संसदीय जुड़ाव

जयशंकर से एक दिन पूर्व, रविवार, 25 अक्टूबर को, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी वोलोदिन से भेंट की थी। उस बैठक में दोनों देशों की संसदों के बीच निरंतर संस्थागत जुड़ाव, संसदीय प्रतिनिधिमंडलों का नियमित आदान-प्रदान, और युवा तथा महिला सांसदों के बीच आपसी संवाद को प्रोत्साहित करने पर सहमति बनी।

12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में वोलोदिन का संबोधन

नई दिल्ली में 26 अक्टूबर को शुरू हुए 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के पूर्ण सत्र में अपने संबोधन में वोलोदिन ने कहा, 'हम अलग-अलग राजनीतिक प्रणालियों, आर्थिक मॉडलों और परंपराओं वाले देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन हम एक बहुध्रुवीय दुनिया बनाने के लिए एकजुट हैं। हम अलग-अलग दृष्टिकोणों और राष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करते हैं और प्रत्येक देश के विकास के अपने संप्रभु रास्ते को चुनने के अधिकार को मान्यता देते हैं।'

वोलोदिन ने इस बात पर भी जोर दिया कि अपने अस्तित्व के 20 वर्षों में ब्रिक्स उभरती बहुध्रुवीय दुनिया और एक न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था के मुख्य स्तंभों में से एक बन चुका है। यह आयोजन ऐसे समय हो रहा है जब भारत वैश्विक भू-राजनीतिक पुनर्संतुलन में एक केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।

ब्रिक्स की बढ़ती आर्थिक ताकत

स्टेट ड्यूमा अध्यक्ष के अनुसार, ब्रिक्स दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक केंद्रों में से एक बन चुका है, जो विश्व के अधिकांश देशों के हितों का प्रतिनिधित्व करता है। ब्रिक्स के भीतर आपसी व्यापार 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच चुका है और सदस्य देश वैश्विक निर्यात का लगभग एक चौथाई हिस्सा हैं। ब्रिक्स नेताओं ने जन-केंद्रित विकास सुनिश्चित करने और भविष्य की सरकारी संस्थाओं की स्थिरता बनाए रखने में संसदों की भूमिका पर भी विचार-विमर्श किया।

भारत-रूस संबंधों का व्यापक परिप्रेक्ष्य

गौरतलब है कि यह बैठक एक ऐसे संवेदनशील वैश्विक दौर में हुई है जब पश्चिमी देश रूस पर कड़े प्रतिबंध बनाए हुए हैं, जबकि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के तहत मॉस्को के साथ संबंधों को संतुलित रूप से आगे बढ़ाता रहा है। दोनों देशों के बीच यह संसदीय कूटनीति उस व्यापक रणनीतिक साझेदारी की एक कड़ी है जिसे दशकों से पोषित किया जाता रहा है। आने वाले समय में संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान में और तेजी आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित कूटनीतिक संदेश है: पश्चिमी दबाव के बावजूद भारत रूस के साथ अपने बहु-स्तरीय संबंधों को बरकरार रखेगा। गौरतलब है कि यह ब्रिक्स संसदीय मंच ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब पश्चिमी गठबंधन भारत पर रूस से दूरी बनाने का दबाव बना रहा है। भारत की 'स्वायत्त रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति यहाँ स्पष्ट रूप से दिखती है — संसदीय कूटनीति का इस्तेमाल उन रिश्तों को पोषित करने में किया जा रहा है जिन्हें कार्यकारी स्तर पर खुलकर उजागर करना कभी-कभी असहज हो सकता है। असली परीक्षा यह होगी कि यह संसदीय जुड़ाव व्यापार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में कितना ठोस रूप लेता है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर और वोलोदिन की मुलाकात किस संदर्भ में हुई?
यह मुलाकात 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान हुई। वोलोदिन भारत में दो दिवसीय मंच में भाग लेने आए थे और इसी दौरान विदेश मंत्री जयशंकर तथा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनकी अलग-अलग बैठकें आयोजित की गईं।
भारत-रूस संसदीय सहयोग में क्या नया तय हुआ?
दोनों पक्षों ने संसदीय प्रतिनिधिमंडलों का नियमित आदान-प्रदान, दोनों संसदों के बीच संस्थागत जुड़ाव, और युवा तथा महिला सांसदों के बीच संवाद बढ़ाने पर सहमति जताई। भारत-रूस विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई।
12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में वोलोदिन ने क्या कहा?
वोलोदिन ने कहा कि ब्रिक्स देश अलग-अलग राजनीतिक प्रणालियों के बावजूद एक बहुध्रुवीय दुनिया बनाने के लिए एकजुट हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 20 वर्षों में ब्रिक्स न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था का मुख्य स्तंभ बन चुका है और इसके भीतर आपसी व्यापार 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गया है।
ओम बिरला और वोलोदिन की मुलाकात में क्या हुआ?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 25 अक्टूबर को वोलोदिन से मुलाकात की और दोनों देशों की संसदों के बीच निरंतर संस्थागत जुड़ाव तथा प्रतिनिधिमंडलों के नियमित आदान-प्रदान पर चर्चा की। युवा और महिला सांसदों के बीच आपसी संवाद को प्रोत्साहित करने पर भी विचार हुआ।
भारत-रूस संबंधों की वर्तमान स्थिति क्या है?
भारत और रूस के बीच विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी है, जिसे दशकों से पोषित किया जाता रहा है। पश्चिमी देशों के रूस-विरोधी प्रतिबंधों के बावजूद भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के तहत मॉस्को के साथ कूटनीतिक, व्यापारिक और संसदीय संबंध बनाए रखता है।
राष्ट्र प्रेस
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