25 अक्टूबर 2026
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ओम बिरला ने रूसी स्टेट ड्यूमा अध्यक्ष वोलोदिन से की मुलाकात, 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम से पहले संसदीय सहयोग पर बनी सहमति

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ओम बिरला ने रूसी स्टेट ड्यूमा अध्यक्ष वोलोदिन से की मुलाकात, 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम से पहले संसदीय सहयोग पर बनी सहमति

सारांश

12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम से एक दिन पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और रूसी स्टेट ड्यूमा अध्यक्ष वोलोदिन की मुलाकात ने भारत-रूस संसदीय रिश्तों को नई गति देने का संकेत दिया — 80 साल के राजनयिक संबंधों की पृष्ठभूमि में, जब दोनों देश वैश्विक बहुध्रुवीय व्यवस्था में एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं।

मुख्य बातें

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 25 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में रूसी स्टेट ड्यूमा अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन से मुलाकात की।
दोनों नेताओं ने भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए रूस के समर्थन पर बिरला ने आभार जताया।
12वाँ ब्रिक्स संसदीय फोरम 26-27 अक्टूबर को संविधान सदन , नई दिल्ली में आयोजित होगा; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भाग लेंगे।
बिरला ने 'संसद भाषिणी' समेत तकनीक-आधारित संसदीय पहलों से वोलोदिन को अवगत कराया।
वोलोदिन ने बैठक से पूर्व राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 25 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में रूसी संघ की फेडरल असेंबली के स्टेट ड्यूमा अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन से सौहार्दपूर्ण मुलाकात की। यह बैठक 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम 2026 की पूर्व संध्या पर हुई, जो 26-27 अक्टूबर को संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में आयोजित होने वाला है। दोनों नेताओं ने भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक में क्या हुई चर्चा

दोनों पीठासीन अधिकारियों ने लोकसभा और स्टेट ड्यूमा के बीच निरंतर संस्थागत जुड़ाव, संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के नियमित आदान-प्रदान तथा युवा एवं महिला सांसदों के बीच आपसी संवाद को प्रोत्साहित करने पर विचार-विमर्श किया। भाजपा सांसद संबित पात्रा, विदेश मंत्रालय (MEA) में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।

बिरला ने एक्स पर लिखा, 'भारत और रूस के बीच दोस्ती, आपसी विश्वास और समझ के गहरे बंधन हमारी दीर्घकालिक साझेदारी का आधार हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि चूँकि दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों के 80 वर्ष पूरे कर रहे हैं, ऐसे में यह बैठक विशेष महत्व रखती है।

तकनीक और संसदीय पहलें

बिरला ने वोलोदिन को भारत की 'संसद भाषिणी' पहल के बारे में जानकारी दी, जो संसदीय कार्यवाही को अधिक सुलभ, समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करती है। उन्होंने विश्वास जताया कि मज़बूत संसदीय जुड़ाव दोनों देशों की साझेदारी को नई ऊर्जा देगा।

ब्रिक्स एवं वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण

दोनों नेताओं ने ब्रिक्स संसदों के बीच सहयोग मज़बूत करने, ठोस अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के ज़रिये आतंकवाद का मुकाबला करने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों को आगे बढ़ाने पर भी विचार साझा किए। बिरला ने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए रूस के निरंतर समर्थन के प्रति आभार व्यक्त किया।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-रूस संबंध वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों के बीच नई परिपक्वता की ओर बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करने वाले प्रमुख देशों में से एक रहा है।

12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम की तैयारी

वोलोदिन 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम में भाग लेने के लिए भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। 26-27 अक्टूबर को आयोजित इस फोरम में ब्रिक्स सदस्य और सहयोगी देशों के संसदीय नेता जन-केंद्रित विकास पर चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे और विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात करेंगे।

फोरम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, केंद्रीय मंत्री, राज्य विधानसभाओं के पीठासीन अधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। 25 अक्टूबर को प्रतिनिधिमंडलों के सचिवों की एक विशेष बैठक में फोरम के संयुक्त बयान को अंतिम रूप दिया गया। बैठक से पूर्व वोलोदिन ने राजघाट पहुँचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भारत ने 'रणनीतिक स्वायत्तता' की अपनी नीति से कोई समझौता नहीं किया। सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए रूसी समर्थन की पुनः पुष्टि यह भी बताती है कि यह रिश्ता प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि भारत के दीर्घकालिक रणनीतिक हितों से जुड़ा है।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओम बिरला और वोलोदिन की मुलाकात क्यों हुई?
यह मुलाकात 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम 2026 की पूर्व संध्या पर नई दिल्ली में हुई। दोनों नेताओं ने भारत-रूस संसदीय सहयोग बढ़ाने और विशेष रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने पर चर्चा की।
12वाँ ब्रिक्स संसदीय फोरम कब और कहाँ होगा?
12वाँ ब्रिक्स संसदीय फोरम 26 और 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में आयोजित किया जाएगा। इसकी मेज़बानी भारत की संसद कर रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसमें भाग लेंगे।
बैठक में भारत-रूस संबंधों के किन पहलुओं पर ज़ोर दिया गया?
दोनों नेताओं ने संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के नियमित आदान-प्रदान, युवा और महिला सांसदों के बीच संवाद, आतंकवाद का मुकाबला करने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधारों पर चर्चा की। बिरला ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए रूस के समर्थन पर आभार भी जताया।
'संसद भाषिणी' क्या है और इसका उल्लेख क्यों किया गया?
'संसद भाषिणी' भारत की एक तकनीक-आधारित पहल है जो संसदीय कार्यवाही को बहुभाषी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए उपयोग में लाई जाती है। बिरला ने इसे वोलोदिन के सामने भारत की संसदीय आधुनिकीकरण प्रक्रिया के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
वोलोदिन की भारत यात्रा का क्या महत्व है?
वोलोदिन की यह भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और रूस अपने राजनयिक संबंधों के 80 वर्ष पूरे कर रहे हैं। यात्रा से पहले उन्होंने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी, जो दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सम्मान को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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