जोगेन चौधरी के निधन पर CM सुवेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी ने व्यक्त किया शोक
सारांश
मुख्य बातें
प्रख्यात चित्रकार और राज्यसभा के पूर्व सांसद जोगेन चौधरी का 26 अक्टूबर 2026 को कोलकाता के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। उनके निधन पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गहरा दुख व्यक्त किया।
स्वास्थ्य की अंतिम स्थिति
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, चौधरी पिछले 14 महीनों से रक्त कैंसर (ब्लड कैंसर) से पीड़ित थे और उनकी कीमोथेरेपी जारी थी। 16 अक्टूबर को षष्ठी के दिन उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। संक्रमण के कारण उनमें सेप्सिस के लक्षण भी उभरे, और शनिवार को हालत और गंभीर होने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि जोगेन चौधरी ने अपनी विशिष्ट चित्रकारी शैली से भारतीय आधुनिक कला को नई पहचान दी और पश्चिम बंगाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशेष स्थान दिलाया। उन्होंने कहा कि चौधरी सांस्कृतिक जगत के एक प्रमुख स्तंभ थे, जिनके जाने से राज्य की बौद्धिक और कलात्मक दुनिया में ऐसी रिक्तता पैदा हुई है जिसे भरना मुश्किल होगा। अधिकारी ने पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य की जनता की ओर से दिवंगत कलाकार के परिवार, मित्रों, सहयोगियों और दुनियाभर के प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
ममता बनर्जी का शोक संदेश
पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जोगेन चौधरी बंगाल और भारत का गौरव थे और दुनियाभर के कलाकारों के साथ-साथ उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी बड़ी प्रेरणा थे। बनर्जी ने स्मरण कराया कि चौधरी ने 2014 से 2020 तक तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद के रूप में नागरिक समाज का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने परिवार, मित्रों और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस निधन से कला और संस्कृति की दुनिया में अपूरणीय क्षति हुई है।
जोगेन चौधरी: एक परिचय
जोगेन चौधरी भारतीय आधुनिक कला के उन विरले कलाकारों में से थे जिन्होंने अपनी मौलिक रेखा-शैली और मानवीय आकृतियों के माध्यम से एक अलग पहचान बनाई। वर्ष 2012 में पश्चिम बंगाल सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित 'बंग विभूषण' सम्मान से नवाजा था। इसके अलावा उन्हें देश-विदेश में अनेक पुरस्कारों और सम्मानों से अलंकृत किया गया था। गौरतलब है कि वह उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल थे जिन्हें संसद की उच्च सभा में मनोनीत किया गया, जो उनकी कला और समाज में उनकी भूमिका की मान्यता थी।
कला जगत पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय समकालीन कला को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई पहचान मिल रही है। चौधरी की रचनाएँ देश के प्रमुख संग्रहालयों और निजी संग्रहों में मौजूद हैं। उनके शिष्य और कला समीक्षक इस क्षति को भारतीय आधुनिक कला के एक स्वर्णिम अध्याय के बंद होने के रूप में देख रहे हैं। भविष्य में उनकी रचनाओं और विरासत को संरक्षित करने की दिशा में संस्थागत प्रयासों की अपेक्षा की जा रही है।