क्या 'अपरूपा' और 'चॉपर' के अभिनेता जॉय बनर्जी का निधन हमें स्तब्ध कर गया?

सारांश
Key Takeaways
- जॉय बनर्जी का निधन बांग्ला सिनेमा के लिए एक बड़ा नुकसान है।
- उन्होंने कई प्रसिद्ध फिल्मों में काम किया।
- राजनीति में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।
- उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
- पामेला गोस्वामी ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया।
मुंबई, 25 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। बांग्ला सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता और पूर्व भाजपा नेता जॉय बनर्जी का निधन मनोरंजन और राजनीतिक जगत में शोक की लहर पैदा कर गया है। जॉय बनर्जी ने अपने अभिनय कौशल से दर्शकों का दिल जीता और बाद में राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई। उनके निधन पर बंगाल के कई प्रमुख व्यक्तियों ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। पश्चिम बंगाल भाजपा युवा मोर्चा की नेता पामेला गोस्वामी ने भी सोशल मीडिया पर दुख व्यक्त किया।
जॉय बनर्जी ने सोमवार सुबह 11:35 बजे कोलकाता के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनकी मृत्यु का कारण सांस लेने में कठिनाई और कई पुरानी बीमारियां थीं, जिनमें सबसे प्रमुख डायबिटीज थी, जिसने उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाला। कुछ दिनों पहले उनकी तबियत अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके निधन से परिवार, मित्र और प्रशंसक गहरे दुख में हैं।
बीजेपी नेता पामेला गोस्वामी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा, "जॉय बनर्जी ने बांग्ला सिनेमा और जनकल्याण के क्षेत्र में जो योगदान दिया है, वह हमेशा याद रखा जाएगा। भगवान उनकी आत्मा को शांति दें।"
जॉय बनर्जी ने बांग्ला फिल्मों में 'अपरूपा', 'चॉपर', 'नगमोटी', 'बिद्रोही' और 'हीरक ज्यांती' जैसी चर्चित फिल्मों में अभिनय किया। उनके शानदार अभिनय ने उन्हें बांग्ला सिनेमा में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। हालाँकि, उन्होंने एक समय के बाद राजनीति में कदम रखा और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़ गए। उन्होंने दो बार लोकसभा चुनाव लड़ा। 2014 में उन्होंने बीरभूम से चुनाव लड़ा, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। उस चुनाव में उनका मुकाबला टॉलीवुड अभिनेत्री और वर्तमान सांसद शताब्दी रॉय से था।
2019 में जॉय बनर्जी ने उलुबेरिया से चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार भी तृणमूल कांग्रेस की सांसद सजदा अहमद के खिलाफ उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद 2021 में उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया, उपेक्षा का आरोप लगाते हुए। राजनीति से दूरी बनाने के बावजूद, उन्होंने सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सक्रिय रहना जारी रखा।
जॉय बनर्जी का निधन उनके प्रशंसकों और समस्त बांग्ला समाज के लिए एक बड़ी क्षति है। उनके अभिनय और राजनीतिक जीवन की यादें लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी।