प्रख्यात चित्रकार जोगेन चौधरी का निधन, पश्चिम बंगाल के CM सुवेंदु अधिकारी ने जताया शोक
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय आधुनिक कला के स्तंभ और प्रख्यात चित्रकार जोगेन चौधरी का 25 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। उनके जाने से देश की कलात्मक और सांस्कृतिक दुनिया में गहरा शोक छा गया है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी सहित कई著名 हस्तियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।
मुख्यमंत्री और नेताओं की श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी संवेदनाएँ साझा करते हुए लिखा, "मशहूर पेंटर और महान कलाकार जोगेन चौधरी के निधन से बहुत दुख हुआ। एक उस्ताद जिनके खास स्ट्रोक्स ने भारतीय मॉडर्न आर्ट को नई पहचान दी, जोगेन चौधरी हमारी सांस्कृतिक दुनिया के एक बड़े स्तंभ थे। उनके बहुत बड़े योगदान ने पश्चिम बंगाल को इंटरनेशनल लेवल पर पहचान दिलाई। उनके जाने से पश्चिम बंगाल की बौद्धिक और कलात्मक आत्मा में एक ऐसा खालीपन आ गया है जिसे भरा नहीं जा सकता।"
अधिकारी ने आगे कहा, "पश्चिम बंगाल सरकार और लोगों की ओर से, मैं अपना गहरा दुख जाहिर करता हूँ और उनके दुखी परिवार, दोस्तों, साथियों और दुनिया भर में उनके लाखों प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ जाहिर करता हूँ। ओम शांति।"
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद डेरेक ओब्रायन ने भी एक्स पर अपनी भावनाएँ साझा कीं। उन्होंने लिखा, "दुनिया ने अभी अभी अपने एक महान कलाकार को खो दिया है। जोगेन (दा) चौधरी, आप अच्छी यात्रा करें। यह मेरे लिए सौभाग्य की बात थी कि आप छह साल तक एआईटीसी के सांसद और दो दशकों तक कोलकाता में मेरे पड़ोसी रहे।"
जीवन परिचय और शुरुआती सफर
जोगेन चौधरी का जन्म 1939 में अविभाजित बंगाल के फरीदपुर में हुआ था। विभाजन की त्रासदी के बाद उनका परिवार कोलकाता आ गया था। उन्होंने 1955 से 1960 के बीच कोलकाता के सरकारी कला एवं शिल्प महाविद्यालय में औपचारिक कला शिक्षा प्राप्त की। यह ऐसे समय में आया है जब विभाजन की पीड़ा ने स्वयं उनकी कला को एक अनूठी आंतरिक बेचैनी और मानवीय संवेदना से भर दिया था।
वर्ष 1965 में चौधरी फ्रांसीसी सरकार की छात्रवृत्ति पर पेरिस गए, जहाँ उन्होंने अपनी वह विशिष्ट शैली विकसित की जो आगे चलकर उनकी पहचान बनी — अखंड, बहती हुई रेखाएँ और स्याही तथा पेस्टल रंगों का अद्वितीय संयोजन।
अंतरराष्ट्रीय पहचान और पुरस्कार
1986 में क्यूबा में आयोजित द्वितीय हवाना द्विवार्षिक प्रदर्शनी में उन्हें सम्मानित किया गया, जो उनके करियर की प्रमुख वैश्विक उपलब्धियों में से एक मानी जाती है। गौरतलब है कि यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान उस दौर में मिला जब भारतीय कलाकारों की वैश्विक मंचों पर उपस्थिति सीमित थी।
मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2001 में उन्हें प्रतिष्ठित कालिदास सम्मान से नवाज़ा — 'प्लास्टिक कला' के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट और विशिष्ट योगदान के लिए। यह सम्मान उनकी बहुआयामी कलात्मक दृष्टि और दीर्घकालीन साधना की स्वीकृति था।
भारतीय आधुनिक कला पर प्रभाव
जोगेन चौधरी की 'अखंड रेखाओं' की शैली और स्याही व पेस्टल का अनोखा प्रयोग उन्हें अपने समकालीनों से अलग करता था। उनकी कृतियों में मानवीय पीड़ा, बांग्ला जीवन और दार्शनिक जिज्ञासा का सम्मिश्रण था, जो दर्शकों को एक साथ असहज और मंत्रमुग्ध करता था।
वे अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) के सांसद भी रहे, जो इस बात का प्रमाण है कि उनकी सामाजिक चेतना कैनवास से बाहर भी जीवित थी। उनके निधन से भारतीय कला जगत एक ऐसे कलाकार को खो बैठा है जिसने आधुनिकता को जड़ों से काटे बिना अंतरराष्ट्रीय पहचान अर्जित की।
आगे की राह
चौधरी की विरासत को जीवित रखने के लिए उनके कला संग्रह और अभिलेखों के संरक्षण की माँग अब उठने की संभावना है। कोलकाता की सांस्कृतिक संस्थाएँ और राज्य सरकार उनके नाम पर किसी स्थायी स्मृति स्थल या पुरस्कार की स्थापना पर विचार कर सकती हैं।