26 अक्टूबर 2026
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वीएचपी नेता विनोद बंसल का कांग्रेस पर हमला: जामिया-जेएनयू नारे 'बदनाम करने की साजिश'

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वीएचपी नेता विनोद बंसल का कांग्रेस पर हमला: जामिया-जेएनयू नारे 'बदनाम करने की साजिश'

सारांश

वीएचपी नेता विनोद बंसल ने कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे की टिप्पणियों को 'राजनीतिक शब्दावली का निम्नतम स्तर' बताया और जामिया-जेएनयू में लगे 'फ्री शरजील इमाम', 'फ्री कश्मीर' जैसे नारों को हिंदू समाज को बदनाम करने की साजिश करार दिया। विश्वविद्यालयों में कठोर कार्रवाई की माँग के साथ उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टिकरण का आरोप भी लगाया।

मुख्य बातें

वीएचपी नेता विनोद बंसल ने 25 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणियों को 'राजनीतिक शब्दावली का निम्नतम स्तर' बताया।
जामिया मिलिया इस्लामिया और जेएनयू में लगे 'फ्री शरजील इमाम', 'फ्री उमर खालिद', 'फ्री कश्मीर' नारों को बंसल ने बदनाम करने की साजिश करार दिया।
बंसल ने कांग्रेस पर दलित अत्याचार के मामलों में चुप्पी साधने का आरोप लगाया, जब आरोपित 'इस्लामिक जिहादी तत्व' हों।
कांग्रेस सांसदों पर दीवार फाँदकर विवादास्पद नारे लगाने वालों के समर्थन में पहुँचने का आरोप लगाया।
बंसल ने विश्वविद्यालय प्रशासन, छात्र संगठनों और सरकार से ऐसी गतिविधियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की माँग की।

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नेता विनोद बंसल ने 25 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जामिया मिलिया इस्लामिया और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में लगे विवादित नारे हिंदू समाज को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हालिया टिप्पणियों को 'राजनीतिक शब्दावली का निम्नतम स्तर' करार दिया और विश्वविद्यालयों में ऐसी गतिविधियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की माँग की।

खड़गे पर निशाना

बंसल ने खड़गे पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा, 'मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे नेता आयु के जिस पड़ाव पर हैं, अब उन्हें राम का नाम लेना चाहिए लेकिन वे राम से द्वेष करते हैं और झूठ के सरगना बनने का प्रयास करते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि 'कम से कम राहुल गांधी के झूठे बयानों और झूठे प्रपंच के चंगुल में तो आप मत फंसिए।'

बंसल के अनुसार कभी प्रधानमंत्री की माँ पर, कभी उनके पिता पर, कभी देश की धर्म-संस्कृति पर प्रहार करना 'कांग्रेस की प्रवृत्ति बन गई है।' उन्होंने संस्कृत की उक्ति 'विनाश काले विपरीत बुद्धि' का हवाला देते हुए कहा कि जनता ऐसी भाषा को सुनती और समझती है, और समय आने पर उसका जवाब भी देती है।

जामिया-जेएनयू विवाद पर वीएचपी का रुख

जामिया और जेएनयू में लगे 'फ्री शरजील इमाम', 'फ्री उमर खालिद' और 'फ्री कश्मीर' जैसे नारों का उल्लेख करते हुए बंसल ने कहा कि ये नारे एक विशेष मानसिकता को दर्शाते हैं। उनके अनुसार, 'जामिया में जिहादी, कम्युनिस्ट और कांग्रेसी गठजोड़ किस प्रकार काम कर रहा था, यह किसी से छिपा नहीं।'

बंसल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद पुलिस से बचते हुए दीवार फाँदकर ऐसे लोगों के समर्थन में पहुँचे और बाद में अनभिज्ञता जताई। उन्होंने इसे 'कांग्रेस की दूषित मानसिकता' का प्रमाण बताया।

दलित समुदाय और तुष्टिकरण का आरोप

वीएचपी नेता ने कहा कि कांग्रेस दलितों का मसीहा बनने का दिखावा करती है, लेकिन जब दलित समुदाय पर अत्याचार होते हैं और आरोपित 'इस्लामिक जिहादी तत्व' होते हैं, तब कांग्रेस का कोई भी नेता आवाज़ नहीं उठाता। बंसल के अनुसार ऐसे अनेक मामले उनकी जानकारी में हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि संघ परिवार ने हिंदू समाज में छुआछूत के समूल नाश का संकल्प लिया हुआ है।

विश्वविद्यालयों में कार्रवाई की माँग

बंसल ने कहा कि जेएनयू में हाल के वर्षों में कुछ सकारात्मक बदलाव दिखे हैं, इसीलिए 'ऐसे तत्व' वहाँ फिर सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने विद्यार्थी परिषद और विश्वविद्यालय प्रशासन से एकजुट होकर खड़े होने का आह्वान करते हुए कहा कि 'जेल में बंद लोगों के महिमामंडन की प्रवृत्ति किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं।'

यह ऐसे समय में आया है जब विश्वविद्यालय परिसरों में राजनीतिक अभिव्यक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा की सीमाओं को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि जामिया और जेएनयू से जुड़े विवाद वर्षों से राजनीतिक ध्रुवीकरण के केंद्र बिंदु रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

'फ्री शरजील इमाम' जैसे नारों की वैधानिकता और उनकी राजनीतिक व्याख्या को लेकर न्यायालयों से लेकर संसद तक लंबी बहस चल रही है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन बयानों को केवल 'हमले' के रूप में प्रस्तुत करती है — लेकिन असली सवाल यह है कि विश्वविद्यालयों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच की रेखा कौन और किस आधार पर खींचता है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विनोद बंसल ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
वीएचपी नेता विनोद बंसल ने कांग्रेस पर हिंदू समाज के विरुद्ध दुष्प्रचार फैलाने और तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे की टिप्पणियों को 'राजनीतिक शब्दावली का निम्नतम स्तर' बताया और कहा कि दलित अत्याचार के मामलों में कांग्रेस तब चुप रहती है जब आरोपित उनके 'पसंदीदा वर्ग' से हों।
जामिया और जेएनयू में कौन-से विवादित नारे लगे?
बंसल के अनुसार जामिया मिलिया इस्लामिया और जेएनयू में 'फ्री शरजील इमाम', 'फ्री उमर खालिद' और 'फ्री कश्मीर' जैसे नारे लगाए गए। बंसल ने इन नारों को एक विशेष 'जिहादी, कम्युनिस्ट और कांग्रेसी गठजोड़' की मानसिकता का प्रतिबिंब बताया।
वीएचपी की विश्वविद्यालयों को लेकर क्या माँग है?
वीएचपी नेता बंसल ने माँग की है कि विद्यार्थियों का भविष्य बर्बाद करने वाली गतिविधियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाए। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन, विद्यार्थी परिषद और सरकार — तीनों से एकजुट होकर ऐसी प्रवृत्तियों को रोकने का आह्वान किया।
मल्लिकार्जुन खड़गे की किस टिप्पणी पर विवाद हुआ?
बंसल के बयान में खड़गे की उस टिप्पणी का संदर्भ है जिसे वीएचपी ने प्रधानमंत्री मोदी और उनके परिवार पर 'व्यक्तिगत प्रहार' के रूप में व्याख्यायित किया। बंसल ने कहा कि किसी वरिष्ठ नेता द्वारा ऐसी भाषा का प्रयोग दर्शाता है कि 'वह पार्टी वास्तव में गर्त की ओर जा रही है।'
क्या जेएनयू में स्थिति बदली है?
बंसल ने कहा कि जेएनयू में 'कुछ सकारात्मक बदलाव' दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इसीलिए 'ऐसे तत्व' वहाँ फिर से सक्रिय हो गए हैं। उनके अनुसार जेल में बंद लोगों के महिमामंडन की किसी भी प्रवृत्ति को विश्वविद्यालय परिसरों में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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