वीएचपी नेता विनोद बंसल का कांग्रेस पर हमला: जामिया-जेएनयू नारे 'बदनाम करने की साजिश'
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नेता विनोद बंसल ने 25 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जामिया मिलिया इस्लामिया और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में लगे विवादित नारे हिंदू समाज को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हालिया टिप्पणियों को 'राजनीतिक शब्दावली का निम्नतम स्तर' करार दिया और विश्वविद्यालयों में ऐसी गतिविधियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की माँग की।
खड़गे पर निशाना
बंसल ने खड़गे पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा, 'मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे नेता आयु के जिस पड़ाव पर हैं, अब उन्हें राम का नाम लेना चाहिए लेकिन वे राम से द्वेष करते हैं और झूठ के सरगना बनने का प्रयास करते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि 'कम से कम राहुल गांधी के झूठे बयानों और झूठे प्रपंच के चंगुल में तो आप मत फंसिए।'
बंसल के अनुसार कभी प्रधानमंत्री की माँ पर, कभी उनके पिता पर, कभी देश की धर्म-संस्कृति पर प्रहार करना 'कांग्रेस की प्रवृत्ति बन गई है।' उन्होंने संस्कृत की उक्ति 'विनाश काले विपरीत बुद्धि' का हवाला देते हुए कहा कि जनता ऐसी भाषा को सुनती और समझती है, और समय आने पर उसका जवाब भी देती है।
जामिया-जेएनयू विवाद पर वीएचपी का रुख
जामिया और जेएनयू में लगे 'फ्री शरजील इमाम', 'फ्री उमर खालिद' और 'फ्री कश्मीर' जैसे नारों का उल्लेख करते हुए बंसल ने कहा कि ये नारे एक विशेष मानसिकता को दर्शाते हैं। उनके अनुसार, 'जामिया में जिहादी, कम्युनिस्ट और कांग्रेसी गठजोड़ किस प्रकार काम कर रहा था, यह किसी से छिपा नहीं।'
बंसल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद पुलिस से बचते हुए दीवार फाँदकर ऐसे लोगों के समर्थन में पहुँचे और बाद में अनभिज्ञता जताई। उन्होंने इसे 'कांग्रेस की दूषित मानसिकता' का प्रमाण बताया।
दलित समुदाय और तुष्टिकरण का आरोप
वीएचपी नेता ने कहा कि कांग्रेस दलितों का मसीहा बनने का दिखावा करती है, लेकिन जब दलित समुदाय पर अत्याचार होते हैं और आरोपित 'इस्लामिक जिहादी तत्व' होते हैं, तब कांग्रेस का कोई भी नेता आवाज़ नहीं उठाता। बंसल के अनुसार ऐसे अनेक मामले उनकी जानकारी में हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि संघ परिवार ने हिंदू समाज में छुआछूत के समूल नाश का संकल्प लिया हुआ है।
विश्वविद्यालयों में कार्रवाई की माँग
बंसल ने कहा कि जेएनयू में हाल के वर्षों में कुछ सकारात्मक बदलाव दिखे हैं, इसीलिए 'ऐसे तत्व' वहाँ फिर सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने विद्यार्थी परिषद और विश्वविद्यालय प्रशासन से एकजुट होकर खड़े होने का आह्वान करते हुए कहा कि 'जेल में बंद लोगों के महिमामंडन की प्रवृत्ति किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं।'
यह ऐसे समय में आया है जब विश्वविद्यालय परिसरों में राजनीतिक अभिव्यक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा की सीमाओं को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि जामिया और जेएनयू से जुड़े विवाद वर्षों से राजनीतिक ध्रुवीकरण के केंद्र बिंदु रहे हैं।