विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल का कांग्रेस पर हमला: 'उमर खालिद को राष्ट्रवादी बताना देश-विरोधी मानसिकता'
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के प्रवक्ता विनोद बंसल ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कांग्रेस पर कड़ा प्रहार किया — यह प्रतिक्रिया कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद के उस बयान के बाद आई जिसमें उन्होंने जेल में बंद जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को राष्ट्रवादी बताया था। बंसल ने कहा कि 'आतंकियों को जी और देशभक्तों को छी' कहना कांग्रेस की स्थायी मानसिकता बन चुकी है।
विनोद बंसल के मुख्य आरोप
बंसल ने कहा कि कांग्रेस नेताओं के बयान बार-बार सनातन-विरोधी, भारत-विरोधी और तुष्टीकरण की राजनीति से प्रेरित नज़र आते हैं। उनके अनुसार, इन बयानों से 'आतंकी और पाकिस्तान-प्रेमी मानसिकता' उजागर होती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस नेताओं के बयान अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में भारत के विरुद्ध और पाकिस्तान के पक्ष में उद्धृत किए जाते हैं — हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
बंसल ने स्पष्ट किया कि हरिप्रसाद का यह बयान कोई अकेली घटना नहीं है। उन्होंने सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी आतंकी की मृत्यु पर उन्हें रात भर नींद नहीं आती थी — यह एक तीखा, असंसदीय आरोप है जिसे बंसल ने अपनी ओर से लगाया और जिसकी कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
यूसीसी और ओवैसी पर विहिप का रुख
विहिप प्रवक्ता ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के समान नागरिक संहिता (UCC) संबंधी बयान पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। बंसल ने कहा कि संविधान की किताब लेकर 'संविधान-संविधान' चिल्लाने वाले नेता वास्तव में लोगों को भड़काने का काम करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यूसीसी अब तक पाँच राज्यों में पारित हो चुका है और दो राज्यों में लागू है। उत्तराखंड में इसे लागू हुए एक वर्ष पूरा हो चुका है और वहाँ किसी मुस्लिम नागरिक का अधिकार नहीं छीना गया — यह तर्क देते हुए बंसल ने UCC-विरोधी बयानबाज़ी को भ्रामक बताया।
सीएए और दिल्ली हिंसा का संदर्भ
बंसल ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) विवाद का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि CAA में किसी भी मुस्लिम नागरिक की नागरिकता छीनने का कोई प्रावधान नहीं था, फिर भी इसके विरोध में 'झूठ के आधार पर दिल्ली को जलाया गया।' यह ऐसे समय में आया है जब CAA 2019 से लागू है और उसके बाद से किसी भी नागरिक की नागरिकता रद्द होने का कोई आधिकारिक मामला सामने नहीं आया।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की स्थिति
गौरतलब है कि उमर खालिद 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में UAPA के अंतर्गत वर्षों से जेल में हैं और उनकी जमानत याचिकाएँ बार-बार खारिज हो चुकी हैं। कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष हरिप्रसाद का उन्हें 'राष्ट्रवादी' कहना राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषय को फिर से चर्चा में ले आया है। कांग्रेस की ओर से इस विवाद पर अभी तक कोई केंद्रीय आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आने वाले दिनों में इस बयानबाज़ी के और तेज़ होने की संभावना है।