15 सितंबर 2026
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कांग्रेस के 35 जिला अध्यक्षों में एक भी महिला नहीं: विधायक केएन राजन्ना ने उठाया मुद्दा

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कांग्रेस के 35 जिला अध्यक्षों में एक भी महिला नहीं: विधायक केएन राजन्ना ने उठाया मुद्दा

सारांश

कर्नाटक में कांग्रेस के 35 जिला अध्यक्षों की नियुक्ति में न कोई महिला, न पर्याप्त पिछड़ा वर्ग प्रतिनिधित्व — विधायक केएन राजन्ना ने केपीसीसी अध्यक्ष हरिप्रसाद से मिलकर मुद्दा उठाया। शिकायत अब राष्ट्रीय प्रभारी सुरजेवाला और वेणुगोपाल तक पहुँचाई जाएगी।

मुख्य बातें

कांग्रेस ने हाल ही में कर्नाटक में 35 जिला इकाई अध्यक्षों की नियुक्ति की, जिनमें एक भी महिला शामिल नहीं है।
पूर्व मंत्री और विधायक केएन राजन्ना ने 15 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में केपीसीसी अध्यक्ष बी.के.
हरिप्रसाद और उपमुख्यमंत्री जी.
परमेश्वर से मिलकर यह मुद्दा उठाया।
राजन्ना के अनुसार, 35 में से केवल 8 जिला अध्यक्ष पिछड़े वर्गों से हैं और उनमें भी उचित सामाजिक संतुलन नहीं है।
हरिप्रसाद ने भरोसा दिलाया कि वे ये चिंताएं एआईसीसी प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला और के.सी.
वेणुगोपाल तक पहुँचाएंगे।
राजन्ना ने अगला विधानसभा चुनाव न लड़ने और भविष्य में लोकसभा चुनाव लड़ने की योजना की पुष्टि की।

कर्नाटक के पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक केएन राजन्ना ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को पार्टी की ओर से हाल ही में की गई 35 जिला इकाई अध्यक्षों की नियुक्तियों पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। राजन्ना ने कहा कि इन तमाम पदों पर किसी भी महिला नेता को जगह नहीं दी गई और पिछड़े वर्गों का प्रतिनिधित्व भी अपर्याप्त रहा। बेंगलुरु में वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकों के बाद उन्होंने पत्रकारों को यह जानकारी दी।

मुख्य घटनाक्रम

राजन्ना मंगलवार को पहले सदाशिवनगर स्थित उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर के आवास पर उनसे मिले और बाद में केपीसीसी अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद से उनके निवास पर मुलाकात की। दोनों बैठकों में उन्होंने मुख्य रूप से तुमकुरु जिले में पार्टी संगठन की स्थिति और जिला नियुक्तियों में प्रतिनिधित्व की कमी पर चर्चा की।

राजन्ना ने कहा, 'मैंने उन्हें बताया कि हाल ही में नियुक्त किए गए 35 पार्टी जिला अध्यक्षों में कोई भी महिला उम्मीदवार नहीं है। मैंने उनसे कहा कि वे इन कमियों को एआईसीसी महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला और एआईसीसी महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल के ध्यान में लाएं, जो उस दिन बेंगलुरु आ रहे थे।'

पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व पर सवाल

राजन्ना ने केवल महिलाओं तक ही अपनी आपत्ति सीमित नहीं रखी। उन्होंने कहा कि 35 में से केवल 8 जिला अध्यक्ष पिछड़े वर्गों से हैं और इन आठ में भी उचित सामाजिक संतुलन नहीं बनाया गया है। उनके अनुसार, 'पिछड़े वर्गों से ताल्लुक रखने वाले नेता 35 में से केवल आठ हैं। इन आठ लोगों में भी उचित सामाजिक संतुलन नहीं बनाया गया है।'

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस का नेतृत्व आंतरिक खींचतान से गुज़र रहा है। राजन्ना पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के करीबी माने जाते हैं और इससे पहले उन्होंने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को सीधे चुनौती देते हुए किसी दलित नेता को मुख्यमंत्री बनाने की वकालत की थी।

हरिप्रसाद की प्रतिक्रिया

राजन्ना के अनुसार, हरिप्रसाद ने माना कि उन्हें भी इन कमियों की जानकारी है और उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व तक ये चिंताएं पहुँचाएंगे। हरिप्रसाद और राजन्ना के संबंध यूथ कांग्रेस के दिनों से हैं — राजन्ना ने बताया कि 1979 में हरिप्रसाद राज्य महासचिव थे, केजे जॉर्ज अध्यक्ष थे और वे स्वयं जिला अध्यक्ष थे।

राजन्ना की राजनीतिक स्थिति

कथित तौर पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ 'वोट चोरी' के मुद्दे पर टिप्पणी करने के बाद राजन्ना को उनके कैबिनेट पद से हटा दिया गया था। मंगलवार को उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे अगला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन भविष्य में लोकसभा चुनाव की दावेदारी करेंगे।

कर्नाटक एपेक्स बैंक का अध्यक्ष पद न मिलने के बाद उनकी नाराज़गी की खबरों पर राजन्ना ने कहा, 'मैं 50 सालों से इस आंदोलन से जुड़ा हुआ हूं। किसी पद के लिए चुनाव लड़ना मेरे लिए कम महत्वपूर्ण बात है। मेरी दिलचस्पी सहकारी संस्थाओं में है, खासकर एपेक्स बैंक जैसी संस्था में, जिसे सरकार के साथ तालमेल बिठाकर काम करना चाहिए।' उन्होंने यह भी चेताया कि सरकार के साथ किसी टकराव का असर अंततः किसानों और सहकारी संस्थाओं पर पड़ेगा।

आगे की राह

राजन्ना की आपत्तियाँ अब सुरजेवाला और वेणुगोपाल तक पहुँचाई जाएंगी। अगर राष्ट्रीय नेतृत्व इन शिकायतों पर ध्यान देता है तो कर्नाटक कांग्रेस की जिला नियुक्तियों में फेरबदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी महिला और पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधित्व की माँगों पर किस हद तक सकारात्मक रुख अपनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस विरोधाभास को उजागर करती है जो पार्टी की 'महिला सशक्तिकरण' की राजनीतिक बयानबाज़ी और ज़मीनी संगठन-निर्माण के बीच लंबे समय से बना हुआ है। 35 में से 0 महिलाएं — यह आँकड़ा उस पार्टी के लिए असहज करने वाला है जो महिला आरक्षण विधेयक पर भाजपा को घेरती रही है। इससे भी बड़ा सवाल यह है कि क्या राष्ट्रीय नेतृत्व सुरजेवाला और वेणुगोपाल की बेंगलुरु यात्रा के दौरान वास्तविक सुधार करेगा या केवल आश्वासन से काम चलाया जाएगा। राजन्ना की आवाज़ अकेली नहीं लगती — यह कर्नाटक कांग्रेस के भीतर उस धड़े की अभिव्यक्ति है जो सिद्दारमैया-खेमे की उपेक्षा महसूस कर रहा है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक कांग्रेस के जिला अध्यक्षों की नियुक्ति में विवाद क्यों हुआ?
कांग्रेस द्वारा हाल ही में की गई 35 जिला अध्यक्षों की नियुक्ति में एक भी महिला को स्थान नहीं मिला और पिछड़े वर्गों का प्रतिनिधित्व भी केवल 8 तक सीमित रहा। विधायक केएन राजन्ना ने इसे लेकर केपीसीसी अध्यक्ष हरिप्रसाद से मुलाकात कर आपत्ति दर्ज कराई।
केएन राजन्ना कौन हैं और उन्होंने यह मुद्दा क्यों उठाया?
केएन राजन्ना कर्नाटक के पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक हैं, जो पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के करीबी माने जाते हैं। कथित तौर पर 'वोट चोरी' मुद्दे पर टिप्पणी के बाद उन्हें कैबिनेट से हटाया गया था। वे 50 वर्षों से पार्टी से जुड़े हैं और संगठन में उचित सामाजिक प्रतिनिधित्व की माँग करते रहे हैं।
इस मुद्दे पर अब आगे क्या होगा?
केपीसीसी अध्यक्ष हरिप्रसाद ने भरोसा दिलाया है कि वे यह शिकायत एआईसीसी महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला और एआईसीसी महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल तक पहुँचाएंगे। दोनों नेता 15 सितंबर को बेंगलुरु दौरे पर थे।
35 जिला अध्यक्षों में पिछड़े वर्गों का प्रतिनिधित्व कितना है?
राजन्ना के अनुसार, 35 में से केवल 8 जिला अध्यक्ष पिछड़े वर्गों से हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन आठ में भी उचित सामाजिक संतुलन नहीं बनाया गया है।
क्या राजन्ना ने किसी पद की माँग की है?
नहीं। राजन्ना ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता किसी पद को पाना नहीं बल्कि सहकारी संस्थाओं, विशेषकर कर्नाटक एपेक्स बैंक, के सुचारु कामकाज को लेकर है। उन्होंने यह भी बताया कि वे अगला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन भविष्य में लोकसभा चुनाव में उतरेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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