कर्नाटक कैबिनेट विस्तार: मंत्री पद न मिलने पर एमएलसी राजन्ना ने कहा — 'पार्टी का फैसला सर्वोपरि'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक कैबिनेट विस्तार में मंत्री पद न मिलने के बावजूद विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) राजेंद्र राजन्ना ने 4 अगस्त को स्पष्ट किया कि वे पार्टी के निर्णय का पूरा सम्मान करते हैं और कांग्रेस के साथ मिलकर काम करते रहेंगे। मैसूर में पत्रकारों से बात करते हुए राजन्ना ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी, लेकिन पार्टी नेतृत्व का फैसला अंतिम है।
राजन्ना का बयान: उम्मीद थी, पर कोई शिकायत नहीं
राजन्ना ने कहा, 'मुझे उम्मीद थी कि कैबिनेट विस्तार में मेरे नाम पर विचार किया जाएगा। ऐसी अपेक्षा थी कि हमारे जिले को भी मंत्री पद मिलेगा। लेकिन पार्टी ने अलग फैसला लिया है और मैं उसका सम्मान करता हूं।' उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी जिसे भी मंत्री बनाएगी, वे उनके साथ मिलकर काम करेंगे।
राजन्ना ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए जोड़ा, 'मैं अपनी माँ का आशीर्वाद लेने आया हूं। मैंने ईश्वर से प्रार्थना की है कि राज्य में अच्छी वर्षा हो और सभी लोग शांति व सुख से जीवन बिताएं।' उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री, कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस समिति (केपीसीसी) अध्यक्ष और पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व का निर्णय ही अंतिम होता है।
मुख्य घटनाक्रम: 20 नए मंत्रियों के साथ कैबिनेट विस्तार
गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार के गठन के करीब 2 महीने बाद सोमवार को कैबिनेट का विस्तार किया गया, जिसमें 20 नए मंत्री शामिल किए गए। कैबिनेट में स्थान न मिलने से कई वरिष्ठ नेताओं में असंतोष उभरा है।
टीबी जयचंद्र की नाराज़गी: वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार करने का आरोप
कैबिनेट विस्तार के एक दिन पहले सोमवार को वरिष्ठ कांग्रेस नेता और नई दिल्ली में कर्नाटक सरकार के विशेष प्रतिनिधि टीबी जयचंद्र ने खुलकर नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता कि वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है या ईमानदार नेताओं को। मैं समझ नहीं पा रहा हूं। मैं दुखी हूं।'
सात बार विधायक रहे जयचंद्र ने कहा कि उनके समर्थकों और समुदाय के लोगों को उम्मीद थी कि उन्हें कैबिनेट में जगह मिलेगी। मंत्रियों की सूची पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, 'लिस्ट देखकर मुझे हैरानी होती है कि हम उन्हें अपना मंत्री कैसे कहें।' जयचंद्र के समर्थक कथित तौर पर उनके इस्तीफे की माँग कर रहे हैं।
राजन्ना की सफाई: सीधी बात को न समझें गलत
राजन्ना ने यह भी स्पष्ट किया कि वे हमेशा सीधी और सच्ची बात करने वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति में कुछ लोग उनकी सीधी बातों का गलत अर्थ निकाल रहे हैं। उनके अनुसार, अगले चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी को और मजबूत करने की दिशा में काम होना चाहिए तथा जिले के मुद्दों पर भी उचित ध्यान दिया जाना चाहिए।
आगे क्या
कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर यह असंतोष ऐसे समय में उभरा है जब पार्टी अगले विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी है। आलोचकों का कहना है कि वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा से पार्टी की एकजुटता पर असर पड़ सकता है। राजन्ना ने भले ही सार्वजनिक रूप से अनुशासन का परिचय दिया है, लेकिन पार्टी नेतृत्व के सामने आंतरिक सामंजस्य बनाए रखने की चुनौती बनी रहेगी।