29 जुलाई 2026
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कर्नाटक कैबिनेट विस्तार पर आज अंतिम फैसला संभव, 30 जुलाई को शपथ ग्रहण की तैयारी

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कर्नाटक कैबिनेट विस्तार पर आज अंतिम फैसला संभव, 30 जुलाई को शपथ ग्रहण की तैयारी

सारांश

लगभग दो महीने की राजनीतिक खींचतान के बाद कर्नाटक कैबिनेट विस्तार आज अंतिम मोड़ पर है। दिल्ली में राहुल गांधी की मौजूदगी में होने वाली बैठक में शेष 6 नामों पर फैसला होगा। नए बनाम अनुभवी, जातीय संतुलन और दो नए उपमुख्यमंत्री पदों का सवाल — सब कुछ आज तय होने की उम्मीद है।

मुख्य बातें

29 जुलाई 2026 को कांग्रेस हाईकमान नई दिल्ली में कर्नाटक कैबिनेट विस्तार पर अंतिम फैसला ले सकता है।
यदि सहमति बनी, तो 30 जुलाई को नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह लोक भवन में होगा।
मंगलवार की बैठक में 14 मंत्री पदों पर सहमति; शेष 6 नामों पर राहुल गांधी अंतिम निर्णय लेंगे।
लिंगायत और अनुसूचित जनजाति समुदाय के नेताओं को दो नए उपमुख्यमंत्री पद दिए जाने पर विचार।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने 75% नए चेहरों का सुझाव दिया; हाईकमान 60:40 के फॉर्मूले पर विचार कर रहा है।
लक्ष्मी हेब्बालकर , रूपकला , आरती कृष्णा , नयना मोटम्मा और कनीज फातिमा मंत्री पद की दौड़ में प्रमुख महिला दावेदार।

कर्नाटक में लंबे समय से अटके कैबिनेट विस्तार पर 29 जुलाई 2026 को अंतिम निर्णय होने की प्रबल संभावना है। कांग्रेस हाईकमान आज नई दिल्ली में शेष नामों पर मुहर लगा सकता है, और यदि सहमति बन गई तो 30 जुलाई को नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, जिन्होंने 3 जून को पदभार संभाला था, अब तक अधूरे मंत्रिमंडल के साथ सरकार चला रहे हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, शपथ ग्रहण की तैयारियाँ शुरू कर दी गई हैं और लोक भवन को आवश्यक इंतजाम के लिए मौखिक सूचना दे दी गई है। हालांकि अंतिम निर्णय कांग्रेस नेतृत्व की औपचारिक मंजूरी के बाद ही होगा।

सूत्रों के मुताबिक, दिन में बाद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मौजूदगी में अंतिम दौर की चर्चा होगी, जिसमें शेष नामों पर फैसला लिया जाएगा। इससे पहले मंगलवार को एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में 14 मंत्री पदों पर सहमति बन चुकी है, जबकि बाकी 6 नामों पर राहुल गांधी वरिष्ठ राज्य नेताओं से परामर्श के बाद अंतिम निर्णय लेंगे।

नए बनाम अनुभवी: फॉर्मूले पर मतभेद

मंत्रिमंडल के गठन को लेकर पार्टी के अंदर दो अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं। मुख्यमंत्री शिवकुमार चाहते हैं कि लगभग 75 प्रतिशत नए और पहली बार चुने गए विधायकों को मौका दिया जाए। दूसरी ओर, कांग्रेस हाईकमान 60:40 के फॉर्मूले पर विचार कर रहा है, जिसमें नए और अनुभवी नेताओं के बीच संतुलन बनाया जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया कथित तौर पर कई वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल में बनाए रखने के पक्ष में हैं।

जातीय और क्षेत्रीय संतुलन की चुनौती

कैबिनेट विस्तार में जातीय और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, आगामी चुनावों को देखते हुए दो नए उपमुख्यमंत्री पद बनाए जाने पर गंभीरता से विचार हो रहा है — ये पद लिंगायत और अनुसूचित जनजाति समुदाय के नेताओं को दिए जा सकते हैं। फिलहाल जी. परमेश्वर, जो अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं, उपमुख्यमंत्री पद पर हैं।

महिला प्रतिनिधित्व के मोर्चे पर भी दबाव है। मंत्रिमंडल में जगह पाने की दौड़ में लक्ष्मी हेब्बालकर, रूपकला, आरती कृष्णा, नयना मोटम्मा और कनीज फातिमा के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं।

अंदरूनी समीकरण और विवाद

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री शिवकुमार छह बार के विधायक तनवीर सैत, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलीम अहमद और युवा विधायक रिजवान अरशद को मंत्री बनाने के पक्ष में हैं। इस बीच, एआईसीसी महासचिव और कर्नाटक प्रभारी जमीर अहमद खान भी दिल्ली में चल रही बैठकों का हिस्सा हैं। उन्हें हाल ही में रणदीप सिंह सुरजेवाला ने दिल्ली बुलाया था। उल्लेखनीय है कि जमीर अहमद खान पर दावणगेरे उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की हार की साजिश रचने के आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस हाईकमान और राज्य नेतृत्व से माफी माँगी थी।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में विधायकों का असंतोष लगातार बढ़ रहा था और क्षेत्रीय व जातीय प्रतिनिधित्व की माँगें तेज हो रही थीं। गौरतलब है कि मंत्रिमंडल का विस्तार लगभग दो महीने से लंबित था। यदि आज दिल्ली में सहमति बन जाती है, तो 30 जुलाई को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह कर्नाटक कांग्रेस सरकार के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के भीतर वर्चस्व की लड़ाई का संकेत है। दो नए उपमुख्यमंत्री पदों का प्रस्ताव जातीय राजनीति की स्वीकृति तो है, लेकिन इससे सत्ता के केंद्र और भी विखंडित होंगे। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह मंत्रिमंडल शासन पर केंद्रित रहेगा या गुटबाजी में उलझा रहेगा।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार कब होगा?
सूत्रों के अनुसार, 29 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान की बैठक में अंतिम नामों पर सहमति बनने की संभावना है। यदि फैसला हो जाता है, तो 30 जुलाई को नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है।
कर्नाटक मंत्रिमंडल में कितने नए मंत्री शामिल होंगे?
मंगलवार की बैठक में 14 मंत्री पदों पर सहमति बन चुकी है, जबकि शेष 6 नामों पर राहुल गांधी अंतिम निर्णय लेंगे। कुल मिलाकर 20 मंत्री पदों पर नियुक्तियाँ होने की संभावना है।
कर्नाटक में नए उपमुख्यमंत्री कौन बन सकते हैं?
सूत्रों के अनुसार, दो नए उपमुख्यमंत्री पद लिंगायत और अनुसूचित जनजाति समुदाय के नेताओं को दिए जाने पर विचार हो रहा है। फिलहाल जी. परमेश्वर, जो अनुसूचित जाति समुदाय से हैं, उपमुख्यमंत्री पद पर हैं।
कर्नाटक कैबिनेट विस्तार में इतनी देरी क्यों हुई?
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 3 जून को पदभार संभाला था, लेकिन नए बनाम अनुभवी नेताओं के अनुपात, जातीय-क्षेत्रीय संतुलन और पार्टी के अंदरूनी समीकरणों पर सहमति न बन पाने के कारण विस्तार लगभग दो महीने से लंबित था।
कर्नाटक कैबिनेट में कौन-सी महिला विधायक मंत्री बन सकती हैं?
मंत्री पद की दौड़ में लक्ष्मी हेब्बालकर, रूपकला, आरती कृष्णा, नयना मोटम्मा और कनीज फातिमा के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं। महिला प्रतिनिधित्व की माँग को देखते हुए इनमें से कुछ को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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