कर्नाटक कैबिनेट विस्तार पर आज अंतिम फैसला संभव, 30 जुलाई को शपथ ग्रहण की तैयारी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक में लंबे समय से अटके कैबिनेट विस्तार पर 29 जुलाई 2026 को अंतिम निर्णय होने की प्रबल संभावना है। कांग्रेस हाईकमान आज नई दिल्ली में शेष नामों पर मुहर लगा सकता है, और यदि सहमति बन गई तो 30 जुलाई को नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, जिन्होंने 3 जून को पदभार संभाला था, अब तक अधूरे मंत्रिमंडल के साथ सरकार चला रहे हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, शपथ ग्रहण की तैयारियाँ शुरू कर दी गई हैं और लोक भवन को आवश्यक इंतजाम के लिए मौखिक सूचना दे दी गई है। हालांकि अंतिम निर्णय कांग्रेस नेतृत्व की औपचारिक मंजूरी के बाद ही होगा।
सूत्रों के मुताबिक, दिन में बाद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मौजूदगी में अंतिम दौर की चर्चा होगी, जिसमें शेष नामों पर फैसला लिया जाएगा। इससे पहले मंगलवार को एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में 14 मंत्री पदों पर सहमति बन चुकी है, जबकि बाकी 6 नामों पर राहुल गांधी वरिष्ठ राज्य नेताओं से परामर्श के बाद अंतिम निर्णय लेंगे।
नए बनाम अनुभवी: फॉर्मूले पर मतभेद
मंत्रिमंडल के गठन को लेकर पार्टी के अंदर दो अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं। मुख्यमंत्री शिवकुमार चाहते हैं कि लगभग 75 प्रतिशत नए और पहली बार चुने गए विधायकों को मौका दिया जाए। दूसरी ओर, कांग्रेस हाईकमान 60:40 के फॉर्मूले पर विचार कर रहा है, जिसमें नए और अनुभवी नेताओं के बीच संतुलन बनाया जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया कथित तौर पर कई वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल में बनाए रखने के पक्ष में हैं।
जातीय और क्षेत्रीय संतुलन की चुनौती
कैबिनेट विस्तार में जातीय और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, आगामी चुनावों को देखते हुए दो नए उपमुख्यमंत्री पद बनाए जाने पर गंभीरता से विचार हो रहा है — ये पद लिंगायत और अनुसूचित जनजाति समुदाय के नेताओं को दिए जा सकते हैं। फिलहाल जी. परमेश्वर, जो अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं, उपमुख्यमंत्री पद पर हैं।
महिला प्रतिनिधित्व के मोर्चे पर भी दबाव है। मंत्रिमंडल में जगह पाने की दौड़ में लक्ष्मी हेब्बालकर, रूपकला, आरती कृष्णा, नयना मोटम्मा और कनीज फातिमा के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं।
अंदरूनी समीकरण और विवाद
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री शिवकुमार छह बार के विधायक तनवीर सैत, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलीम अहमद और युवा विधायक रिजवान अरशद को मंत्री बनाने के पक्ष में हैं। इस बीच, एआईसीसी महासचिव और कर्नाटक प्रभारी जमीर अहमद खान भी दिल्ली में चल रही बैठकों का हिस्सा हैं। उन्हें हाल ही में रणदीप सिंह सुरजेवाला ने दिल्ली बुलाया था। उल्लेखनीय है कि जमीर अहमद खान पर दावणगेरे उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की हार की साजिश रचने के आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस हाईकमान और राज्य नेतृत्व से माफी माँगी थी।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में विधायकों का असंतोष लगातार बढ़ रहा था और क्षेत्रीय व जातीय प्रतिनिधित्व की माँगें तेज हो रही थीं। गौरतलब है कि मंत्रिमंडल का विस्तार लगभग दो महीने से लंबित था। यदि आज दिल्ली में सहमति बन जाती है, तो 30 जुलाई को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह कर्नाटक कांग्रेस सरकार के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत होगी।