कर्नाटक कैबिनेट विस्तार: राहुल गांधी की वापसी के बाद 17 जुलाई तक फैसले की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के विदेश दौरे से स्वदेश लौटने के बाद कर्नाटक मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर पहुँचने की संभावना है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बेंगलुरु और नई दिल्ली में हुई कई उच्च स्तरीय बैठकों के बाद कांग्रेस हाई कमान 17 जुलाई 2026 तक अंतिम निर्णय ले सकती है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के पदभार संभालने के 40 दिन से अधिक बीत जाने के बावजूद मंत्रिमंडल में अभी केवल 13 मंत्री हैं।
मुख्य घटनाक्रम
सोमवार को कई कांग्रेस विधायकों ने बेंगलुरु स्थित मुख्यमंत्री शिवकुमार के आधिकारिक आवास कृष्णा पर उनसे मुलाकात की, जहाँ आगामी मंत्रिमंडल विस्तार पर विस्तृत चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, शिवकुमार और केपीसीसी अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद दोनों नए मंत्रियों की घोषणा से पहले हाई कमान की अंतिम स्वीकृति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
पिछले कुछ दिनों में मंत्री पद की दावेदारी भी तेज हो गई है। कई इच्छुक विधायकों ने नई दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर उनसे मिलकर अपने दावे प्रस्तुत किए हैं।
हाई कमान की भूमिका
एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इस समय बेंगलुरु में हैं और मंगलवार तक नई दिल्ली लौटने की उम्मीद है। राहुल गांधी के 14 जुलाई या इस सप्ताह के अंत तक भारत वापस आने की संभावना बताई जा रही है। मुख्यमंत्री शिवकुमार के भी इसी सप्ताह दिल्ली दौरे पर जाने की उम्मीद है, जहाँ राहुल गांधी और खड़गे से परामर्श के बाद मंत्रिमंडल विस्तार को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
अधूरे मंत्रिमंडल का राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार को अपने शासन की गति को लेकर विपक्ष की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि पदभार ग्रहण के 40 दिन से अधिक बाद भी केवल 13 मंत्रियों के साथ काम चलाना प्रशासनिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण रहा है। कांग्रेस नेतृत्व ने अब तक कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की है, लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी की वापसी के बाद विचार-विमर्श में तेजी आना तय माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
सूत्रों के अनुसार 17 जुलाई 2026 तक मंत्रिमंडल विस्तार होने की प्रबल संभावना है। राहुल गांधी, खड़गे और शिवकुमार के बीच नई दिल्ली में होने वाली बैठक को इस प्रक्रिया की अंतिम कड़ी माना जा रहा है। नए मंत्रियों की सूची में जाति समीकरण, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और वरिष्ठता जैसे कारक निर्णायक भूमिका निभाएँगे।