14 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

असम बजट 2026-27 में बाढ़ राहत और माजुली विकास नजरअंदाज: कांग्रेस विधायक जॉय प्रकाश दास

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
असम बजट 2026-27 में बाढ़ राहत और माजुली विकास नजरअंदाज: कांग्रेस विधायक जॉय प्रकाश दास

सारांश

असम कांग्रेस विधायक जॉय प्रकाश दास ने 2026-27 के बजट को 'खोखली घोषणाओं का पुलिंदा' करार दिया — बाढ़ राहत, माजुली विकास और 'असम दर्शन' जैसी योजनाएं बजट से गायब हैं, जबकि मेट्रो जैसे शहरी प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी गई है।

मुख्य बातें

कांग्रेस विधायक जॉय प्रकाश दास ने 13 जुलाई 2026 को असम के 2026-27 बजट पर BJP सरकार की तीखी आलोचना की।
आरोप: बजट में बाढ़ राहत के लिए कोई ठोस योजना नहीं, जबकि राज्य के कई जिले हर साल जलमग्न होते हैं।
'चार-चपोरी' क्षेत्रों के विकास के लिए बार-बार आश्वासन के बावजूद कोई राशि आवंटित नहीं।
'असम दर्शन' योजना और माजुली के विकास के लिए भी बजट में कोई प्रावधान नहीं।
मत्स्य पालकों की आजीविका सुधार के लिए ठोस योजना का अभाव बताया गया।
असम सरकार ने बजट में बुनियादी ढाँचे और शहरी परिवहन में बड़े निवेश की रूपरेखा पेश की थी।

असम कांग्रेस के विधायक जॉय प्रकाश दास ने 13 जुलाई 2026 को गुवाहाटी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि असम बजट 2026-27 में बाढ़ जैसी गंभीर आपदा तथा जनकल्याण की प्रमुख योजनाओं को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया है। उनके अनुसार, सरकार ने ऐसे प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी है जो आम लोगों की तात्कालिक जरूरतों को पूरा नहीं करते।

बाढ़ संकट पर सरकार की चुप्पी

पत्रकारों से बातचीत में दास ने कहा कि असम का एक बड़ा हिस्सा हर वर्ष बाढ़ की चपेट में आता है और कई जिले महीनों तक जलमग्न रहते हैं, किंतु बजट में इस बारंबार आने वाली आपदा से स्थायी रूप से निपटने की कोई ठोस योजना नहीं है। उन्होंने कहा, 'भाजपा की 'डबल इंजन' सरकार पिछले एक दशक से सत्ता में है, फिर भी हर साल बाढ़ का पानी राज्य के बड़े इलाकों को डुबो देता है। लोग परेशान होते रहते हैं, लेकिन इन चुनौतियों का समाधान करने के बजाय सरकार मेट्रो रेल लाने की बात कर रही है। बजट में मेट्रो प्रोजेक्ट्स की बात तो है, लेकिन लोगों की असली समस्याओं को नजरअंदाज किया गया है।'

योजनाओं के वादे और जमीनी हकीकत

कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ऐसी घोषणाओं के जरिए लोगों को गुमराह कर रही है जिन्हें व्यवहार में लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि पहले जिन कई अहम योजनाओं को प्रमुखता से दिखाया गया था, उनका ताजा बजट में कोई उल्लेख नहीं है। विशेष रूप से, बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद 'चार-चपोरी' क्षेत्रों के विकास के लिए कोई राशि आवंटित नहीं की गई और 'असम दर्शन' जैसी योजनाएं, जिन्हें कभी लोकप्रिय पहल के रूप में पेश किया गया था, बजट प्रस्तावों से पूरी तरह गायब हैं।

माजुली और मत्स्य पालन क्षेत्र की अनदेखी

दास ने दावा किया कि राज्य के सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और नदी-द्वीप क्षेत्रों में से एक, माजुली के विकास के लिए भी बजट में कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया है। मत्स्य पालन और जल निकायों से जुड़ी सरकार की घोषणाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि तालाबों का उल्लेख तो है, लेकिन मछली पालकों की मदद करने या इस क्षेत्र पर निर्भर लोगों की आजीविका सुधारने की कोई ठोस रूपरेखा बजट में नहीं है।

सरकार का पक्ष

असम सरकार ने हाल ही में विधानसभा में 2026-27 का बजट पेश किया था, जिसमें बुनियादी ढाँचे, शहरी परिवहन और कल्याणकारी योजनाओं में बड़े निवेश की रूपरेखा बताई गई थी। सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

आगे क्या होगा

दास ने कहा, 'हमें लगता है कि यह सरकार सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें करके चल रही है। यह लगातार बड़ी घोषणाएं करती है, लेकिन लोगों की असल समस्याओं को हल करने के लिए जमीनी स्तर पर बहुत कम काम होता है।' विपक्ष के इन आरोपों के बीच बजट पर विधानसभा में आगे बहस अपेक्षित है, जिसमें बाढ़ राहत आवंटन और कल्याण योजनाओं की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस दीर्घकालिक विफलता पर है जिसे असम की राजनीति दशकों से टालती आई है — बाढ़ प्रबंधन। 'डबल इंजन' सरकार का दावा करने वाली BJP के लिए यह असहज सवाल है कि एक दशक की सत्ता के बाद भी बाढ़ राहत बजट में प्राथमिकता क्यों नहीं बन पाई। मेट्रो जैसे शहरी प्रोजेक्ट्स दृश्यमान और राजनीतिक रूप से आकर्षक होते हैं, जबकि बाढ़ राहत और 'चार-चपोरी' विकास ग्रामीण और हाशिये के मतदाताओं से जुड़े हैं — यह बजट प्राथमिकता का विरोधाभास ही विपक्ष को सबसे तेज हथियार देता है। विधानसभा में बहस यह तय करेगी कि सरकार के पास इन आँकड़ों का जवाब है या नहीं।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम बजट 2026-27 में बाढ़ राहत के लिए क्या प्रावधान है?
कांग्रेस विधायक जॉय प्रकाश दास के अनुसार, असम बजट 2026-27 में बाढ़ की बारंबार आने वाली समस्या से स्थायी रूप से निपटने की कोई ठोस योजना नहीं है। सरकार ने बजट में बुनियादी ढाँचे और शहरी परिवहन पर जोर दिया है, लेकिन बाढ़ राहत के लिए विशेष आवंटन का उल्लेख नहीं किया गया।
'असम दर्शन' योजना बजट से क्यों गायब है?
'असम दर्शन' योजना, जिसे पहले एक लोकप्रिय पहल के रूप में पेश किया गया था, 2026-27 के बजट प्रस्तावों में शामिल नहीं है। कांग्रेस विधायक दास ने इसे सरकार की 'खोखली घोषणाओं' का उदाहरण बताया।
माजुली के विकास के लिए असम बजट में क्या है?
कांग्रेस विधायक जॉय प्रकाश दास ने दावा किया कि राज्य के महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और नदी-द्वीप क्षेत्र माजुली के विकास के लिए बजट में कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया है। यह आरोप सरकार की क्षेत्रीय विकास प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता है।
'चार-चपोरी' क्षेत्र क्या है और इसे बजट में क्यों नजरअंदाज किया गया?
'चार-चपोरी' असम के नदी-तटीय और रेत-द्वीप क्षेत्र हैं, जहाँ के निवासी बाढ़ और भूमि कटाव से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। विधायक दास के अनुसार, बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद इन क्षेत्रों के विकास के लिए 2026-27 के बजट में कोई राशि आवंटित नहीं की गई।
असम में मत्स्य पालकों के लिए बजट में क्या प्रावधान हैं?
बजट में तालाबों का उल्लेख तो किया गया है, लेकिन कांग्रेस विधायक दास के अनुसार मछली पालकों की आजीविका सुधारने या इस क्षेत्र पर निर्भर लोगों की मदद के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। सरकार की घोषणाएं इस वर्ग की व्यावहारिक जरूरतों को पूरा नहीं करतीं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले