असम बजट सत्र: कांग्रेस ने बिजली कटौती, 26 लाख छात्रों की गिरावट और गुवाहाटी जलभराव पर सरकार को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
असम विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन, 6 जुलाई को, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के विधायकों ने विधानसभा परिसर में जोरदार प्रदर्शन करते हुए राज्य सरकार को चार बड़े मुद्दों पर घेरा — ग्रामीण बिजली संकट, सरकारी स्कूलों में छात्रों की घटती संख्या, केंद्र की इथेनॉल मिश्रित ईंधन नीति और गुवाहाटी में वर्षों से बनी जलभराव की समस्या। कांग्रेस विधायक डॉ. जॉय प्रकाश दास, रेकिबुद्दीन अहमद और अखिल गोगोई ने मीडिया के सामने सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल खड़े किए।
बिजली संकट: गांवों में 24 घंटे बिजली का वादा बेनतीजा
कांग्रेस विधायक डॉ. जॉय प्रकाश दास ने कहा कि पार्टी ने ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार हो रही बिजली कटौती के मुद्दे पर विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव लाने की कोशिश की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इसे स्वीकार नहीं किया। उनके अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने चुनावी घोषणापत्र में 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का वादा किया था, जबकि वर्तमान में गांवों में स्थिति इसके विपरीत है।
डॉ. दास ने कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद ग्रामीण इलाकों में लोगों को नियमित बिजली नहीं मिल रही। उनके शब्दों में, गांवों में अब यह धारणा बन गई है कि बिजली जाने के बजाय कभी-कभी आती है।
इथेनॉल नीति: मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर असर की आशंका
कांग्रेस विधायक रेकिबुद्दीन अहमद ने केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रित ईंधन नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पूरे देश पर एक बड़े प्रयोग की तरह लागू की जा रही है। उन्होंने पूछा कि इस नीति के पीछे किस विशेषज्ञ की सिफारिश है और क्या इसके दीर्घकालिक प्रभावों का पर्याप्त अध्ययन किया गया है।
अहमद ने आरोप लगाया कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग से आम लोगों के वाहनों के इंजन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि देश में बड़ी संख्या में लोग ऋण लेकर दोपहिया और चारपहिया वाहन खरीदते हैं, और यदि ईंधन नीति के कारण इंजनों को नुकसान होता है तो सबसे अधिक असर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि कुछ विशेषज्ञ इथेनॉल मिश्रित ईंधन को सुरक्षित बताते हैं, जबकि अन्य विशेषज्ञों ने इंजन की कार्यक्षमता और वाहन की गति प्रभावित होने की आशंका जताई है।
शिक्षा संकट: सात वर्षों में करीब 26 लाख छात्र सरकारी स्कूलों से कम
विधायक अखिल गोगोई ने असम की शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि यू-डाइस प्लस पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, पिछले सात वर्षों में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में करीब 26 लाख की भारी गिरावट आई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य में लगभग 11 हजार स्कूल या तो बंद कर दिए गए हैं अथवा उनका अन्य स्कूलों में विलय कर दिया गया है।
गोगोई ने कहा कि राज्य के शिक्षा मंत्री ने भी मीडिया को दिए एक साक्षात्कार में शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियों का स्वयं उल्लेख किया है, जो इस बात का प्रमाण है कि समस्या की गंभीरता से इनकार नहीं किया जा सकता।
गुवाहाटी जलभराव: लाइफ जैकेट पहनकर विधानसभा पहुंचे गोगोई
अखिल गोगोई ने गुवाहाटी में लगातार होने वाले जलभराव के विरोध में विधानसभा पहुंचने के दौरान लाइफ जैकेट पहनकर प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि शहर में कुछ मिनटों की बारिश के बाद ही कई इलाके जलमग्न हो जाते हैं और हर वर्ष नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
गोगोई ने याद दिलाया कि 2016 में BJP ने सत्ता में आने के छह महीने के भीतर गुवाहाटी की कृत्रिम बाढ़ की समस्या समाप्त करने का वादा किया था, लेकिन लगभग 11 वर्ष बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। यह मुद्दा इस बजट सत्र में भी केंद्र में रहने की संभावना है, और देखना होगा कि सरकार इन सवालों का सदन के भीतर क्या जवाब देती है।