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चीन का परमाणु पनडुब्बी से मिसाइल परीक्षण, जापान-ताइवान-ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों ने जताई कड़ी आपत्ति

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चीन का परमाणु पनडुब्बी से मिसाइल परीक्षण, जापान-ताइवान-ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों ने जताई कड़ी आपत्ति

सारांश

चीन ने परमाणु पनडुब्बी से प्रशांत में मिसाइल दागी — जापान, ताइवान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड ने एक साथ आपत्ति जताई। यह 2024 के ICBM परीक्षण के बाद चीन का एक और उकसावा है, जो इंडो-पैसिफिक में बढ़ते सैन्य तनाव की तस्वीर को और गहरा करता है।

मुख्य बातें

चीन ने 6 जुलाई को परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बी से प्रशांत महासागर की दिशा में मिसाइल परीक्षण किया।
जापान के प्रवक्ता मिनोरू किहारा ने कहा — मिसाइल जापान के EEZ या भू-क्षेत्र में नहीं गई; चीन ने सुबह 11:30 बजे पूर्व सूचना दी थी।
ताइवान की प्रवक्ता कैरेन कुओ ने चीन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को डराने का आरोप लगाया और संयम की अपील की।
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने परीक्षण को क्षेत्र के लिए अस्थिरता बढ़ाने वाला बताया।
न्यूज़ीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने इसे 2024 के दक्षिणी प्रशांत ICBM परीक्षण की कड़ी से जोड़ा।

चीनी सेना ने सोमवार, 6 जुलाई को एक परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बी से प्रशांत महासागर की दिशा में मिसाइल परीक्षण सफलतापूर्वक अंजाम दिया, जिसके बाद जापान, ताइवान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड सहित कई देशों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। जापानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह परीक्षण क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर पहले से बनी आशंकाओं को और गहरा करता है।

मुख्य घटनाक्रम

जापान सरकार के प्रवक्ता मिनोरू किहारा ने स्पष्ट किया कि मिसाइल न तो जापान के भू-क्षेत्र के ऊपर से गुजरी और न ही उसके एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (EEZ) में प्रवेश किया। उन्होंने बताया कि चीन ने परीक्षण से पूर्व — सुबह लगभग 11:30 बजे — जापान को इसकी पूर्व सूचना दे दी थी।

किहारा ने यह भी कहा कि इस परीक्षण से जापान के किसी जहाज़ या विमान को कोई क्षति नहीं पहुँची। बावजूद इसके, जापान ने चीन से आग्रह किया कि वह ऐसे परीक्षणों पर पुनर्विचार करे ताकि जापान की सुरक्षा को कोई खतरा न रहे।

जापान की चिंता और आलोचना

किहारा ने चीन की आलोचना करते हुए कहा कि वह पर्याप्त पारदर्शिता के बिना अपना रक्षा बजट लगातार और तेज़ी से बढ़ा रहा है तथा अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) समेत अपनी परमाणु मिसाइल क्षमता का बड़े पैमाने पर विस्तार कर रहा है। जापान ने कहा कि वह इस संदर्भ में पूरी सतर्कता बनाए रखेगा और चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर गंभीर चिंता दर्ज कराई।

ताइवान की प्रतिक्रिया

ताइवान के राष्ट्रपति कार्यालय ने भी इस परीक्षण की कड़ी निंदा की। कार्यालय की प्रवक्ता कैरेन कुओ ने कहा कि चीन इस प्रकार के परीक्षणों के ज़रिये अंतरराष्ट्रीय समुदाय को डराने की कोशिश कर रहा है और यह कदम विश्व में शांति एवं स्थिरता के लिए हानिकारक है। कुओ ने चीन से संयम बरतने, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का सम्मान करने और ऐसे 'गैर-जिम्मेदाराना एकतरफा कदम' तत्काल बंद करने की अपील की।

ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की आपत्ति

ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने इस परीक्षण को पूरे क्षेत्र के लिए अस्थिरता बढ़ाने वाला कदम करार दिया। न्यूज़ीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने कहा कि उनका देश परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम इस मिसाइल के परीक्षण को लेकर गहरी चिंता में है।

पीटर्स ने यह भी कहा कि यह परीक्षण चीन के उसी निरंतर रुख का हिस्सा प्रतीत होता है, जो उसने 2024 में दक्षिणी प्रशांत महासागर में एक ICBM का परीक्षण करके प्रदर्शित किया था। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में पहले से ही तनाव चरम पर है।

क्या होगा आगे

विश्लेषकों के अनुसार, यह परीक्षण चीन की समुद्र-आधारित परमाणु प्रतिरोध क्षमता को प्रदर्शित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। क्षेत्र के देशों की एकजुट प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक दबाव और बहुपक्षीय मंचों पर इस मुद्दे पर बहस तेज़ हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह वास्तव में उस ताकत का प्रदर्शन है जो कहती है — 'हम कर सकते हैं, और हम करेंगे।' 2024 के ICBM परीक्षण के बाद यह दूसरा बड़ा कदम है, जो दर्शाता है कि चीन की परमाणु आधुनिकीकरण की गति पश्चिमी अनुमानों से कहीं तेज़ है। इंडो-पैसिफिक देशों की एकजुट प्रतिक्रिया स्वागतयोग्य है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह आपत्ति केवल बयानों तक सीमित रहेगी या ठोस बहुपक्षीय रणनीति में बदलेगी।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीन ने किस तरह की मिसाइल का परीक्षण किया और कहाँ?
चीन ने 6 जुलाई को एक परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बी से प्रशांत महासागर की दिशा में मिसाइल परीक्षण किया। रिपोर्टों के अनुसार यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बताई जा रही है।
जापान ने इस परीक्षण पर क्या प्रतिक्रिया दी?
जापान के सरकारी प्रवक्ता मिनोरू किहारा ने कहा कि मिसाइल जापान के क्षेत्र या EEZ में नहीं गई और किसी जहाज़ या विमान को नुकसान नहीं हुआ। हालाँकि, जापान ने चीन से ऐसे परीक्षणों पर पुनर्विचार करने को कहा और चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर गंभीर चिंता जताई।
ताइवान ने चीन के मिसाइल परीक्षण की निंदा क्यों की?
ताइवान के राष्ट्रपति कार्यालय की प्रवक्ता कैरेन कुओ ने कहा कि चीन इस तरह के परीक्षणों से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को डराने की कोशिश करता है, जो वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए हानिकारक है। उन्होंने चीन से नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का सम्मान करने की अपील की।
ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड ने क्या कहा?
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने इसे क्षेत्र के लिए अस्थिरता बढ़ाने वाला कदम बताया। न्यूज़ीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे 2024 के दक्षिणी प्रशांत ICBM परीक्षण से जोड़ा।
क्या चीन ने पहले भी ऐसे परीक्षण किए हैं?
हाँ, न्यूज़ीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स के अनुसार, चीन ने 2024 में दक्षिणी प्रशांत महासागर में एक ICBM का परीक्षण किया था। यह ताज़ा परीक्षण उसी क्रम की अगली कड़ी प्रतीत होती है।
राष्ट्र प्रेस
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