जैश-ए-मोहम्मद मॉड्यूल केस: गुजरात एटीएस ने बनासकांठा के भागल गांव में तीन आरोपियों से कराया घटनास्थल पुनर्निर्माण
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) ने सोमवार, 7 जुलाई 2025 को कथित जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) मॉड्यूल मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों में से तीन को पुलिस रिमांड के दौरान बनासकांठा जिले के पालनपुर स्थित भागल गांव ले जाकर घटनाक्रम का पुनर्निर्माण कराया। जांच एजेंसी के अनुसार, यह कार्रवाई सबूतों की पुष्टि और कथित साजिश की समय-श्रृंखला को स्थापित करने के उद्देश्य से की गई।
कौन हैं तीन आरोपी
भागल गांव ले जाए गए तीन आरोपियों की पहचान इब्राहिम मोहम्मद हुसैन घाघा, मुदस्सिर अब्दुल्ला गाजीवाला और अहमद अब्दुल्ला गाजीवाला के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, अहमद और मुदस्सिर सगे भाई हैं, जबकि इब्राहिम उनका मामा है। एटीएस का आरोप है कि अहमद और इब्राहिम इस मॉड्यूल में प्रमुख भूमिका निभा रहे थे।
घटनास्थल पुनर्निर्माण का उद्देश्य
सूत्रों के अनुसार, आरोपियों को गांव ले जाने का मकसद घटनाओं के क्रम को दोबारा समझना, जांच में जुटाए गए सबूतों की पुष्टि करना और गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी का सत्यापन करना था। यह प्रक्रिया एटीएस की मानक जांच पद्धति का हिस्सा है, जिसके तहत आरोपियों की गतिविधियों और कथित साजिश की समय-श्रृंखला की जमीनी स्तर पर पुष्टि की जाती है।
मॉड्यूल की कार्यप्रणाली और आरोप
एटीएस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों ने 'दार-उल-इस्लाम गुजरात जैश-ए-मोहम्मद' नाम से एक स्थानीय मॉड्यूल तैयार किया था। जांच एजेंसियों का दावा है कि ये आरोपी पाकिस्तान में बैठे अब्दुल्ला और मोहम्मद उमर नामक हैंडलरों के संपर्क में थे और उनके निर्देश पर काम कर रहे थे।
एटीएस के डीआईजी सुनील जोशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, 'यह समूह गुजरात में एक नेटवर्क तैयार करने की कोशिश कर रहा था, जो भविष्य में जरूरत पड़ने पर जैश-ए-मोहम्मद को रसद और अन्य सहायता उपलब्ध करा सके। हालांकि, जांच में किसी खास हमले के लक्ष्य का पता नहीं चला है।'
जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपियों ने जैश-ए-मोहम्मद के साहित्य का गुजराती भाषा में अनुवाद कर संगठन की विचारधारा फैलाने का प्रयास किया। इसके अलावा, अहमद और इब्राहिम ने कथित तौर पर एक पाकिस्तानी हैंडलर के निर्देश पर वडोदरा में कश्मीर के एक अज्ञात मध्यस्थ से मुलाकात की थी।
वित्तीय लेनदेन और बरामदगी
एटीएस के अनुसार, आरोपियों को 'डेड-ड्रॉप' पद्धति के जरिए कथित तौर पर करीब ₹3 लाख प्राप्त हुए थे, जिनमें से कुछ रकम का इस्तेमाल एक सेकेंड हैंड वाहन खरीदने में किया गया। छापेमारी के दौरान मोबाइल फोन, हस्तलिखित पत्र, किताबें, डिजिटल फाइलें, अनुवादित साहित्य और अन्य सामग्री बरामद की गई, जिनका फिलहाल विश्लेषण जारी है।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
सभी आठ आरोपियों के विरुद्ध गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), 1967 की धाराएं 13, 17, 18, 38 और 39 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धाराएं 61 और 148 के तहत मामला दर्ज किया गया है। अदालत ने सभी आरोपियों को 14 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। गौरतलब है कि ये गिरफ्तारियां गुजरात और मध्य प्रदेश से की गई थीं। भागल गांव में कराया गया पुनर्निर्माण इस मामले की जांच को और गहरा करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।