अहमदाबाद क्राइम ब्रांच का 'ऑपरेशन करावास': तीन साल से फरार दंपति गिरफ्तार, मंदिरों के बाहर भीख माँगकर छुपे थे
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने 3 जुलाई 2026 को अपने चल रहे अभियान 'ऑपरेशन करावास' के तहत दो फरार विचाराधीन कैदियों को गिरफ्तार किया, जो 2023 में अंतरिम जमानत मिलने के बाद से न्यायिक हिरासत में वापस नहीं लौटे थे। पुलिस के अनुसार, इस दंपति ने लगभग तीन वर्षों तक भेष बदलकर और गुजरात भर के मंदिरों के बाहर भीख माँगकर गिरफ्तारी से बचने की कोशिश की।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान अशोक उर्फ महाराज पटेल (48) और उनकी पत्नी रेणुका पटेल (51) के रूप में हुई है। दोनों को अहमदाबाद के रामोल इलाके में हनुमान नगर के सामने सीटीएम पुल के नीचे से हिरासत में लिया गया। पुलिस के मुताबिक, दंपति फुटपाथ पर रह रहे थे और अपनी पहचान छुपाने के लिए वेश बदलकर राज्य के विभिन्न हिस्सों में मंदिरों के बाहर भीख माँगते थे।
जमानत और फरारी का घटनाक्रम
अशोक (विचाराधीन कैदी संख्या 6737) और रेणुका (विचाराधीन कैदी संख्या 353) को 5 अगस्त 2023 को अहमदाबाद केंद्रीय जेल से अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था। उन्हें 9 अगस्त 2023 को जेल में आत्मसमर्पण करना था, परंतु जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद वे वापस नहीं लौटे और तब से फरार चल रहे थे। सीटीएम क्षेत्र में दोनों के मौजूद होने की सूचना मिलने पर क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने निगरानी रखी और उन्हें हिरासत में ले लिया।
आरोपियों पर दर्ज मामले
क्राइम ब्रांच के अनुसार, दोनों अहमदाबाद केंद्रीय जेल में कई आपराधिक मामलों में विचाराधीन कैदी थे। इनमें यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम, अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, भारतीय दंड संहिता (IPC) और निषेध अधिनियम के तहत अपराध शामिल हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अशोक का आपराधिक इतिहास 2015 से है, जिसमें मेघानीनगर, वेजलपुर, ओधव, शाहिबाग, काम्भा, रणपुर और कपड़वनज ग्रामीण पुलिस स्टेशनों में दर्ज मामले शामिल हैं। इन मामलों में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, अपहरण, दुष्कर्म और जालसाजी जैसे गंभीर आरोप हैं। रेणुका पर शाहिबाग, काम्भा, रणपुर और कपड़वनज ग्रामीण पुलिस स्टेशनों में POCSO अधिनियम, अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम और IPC की धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं।
ऑपरेशन करावास: क्या है यह अभियान
अधिकारियों ने बताया कि यह गिरफ्तारी क्राइम ब्रांच के विशेष अभियान 'ऑपरेशन करावास' के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य फरार कैदियों का पता लगाकर उन्हें न्यायिक हिरासत में वापस भेजना है। गौरतलब है कि अंतरिम जमानत के बाद जेल न लौटने वाले विचाराधीन कैदियों की बढ़ती संख्या जेल प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है।
गिरफ्तारी के बाद क्या हुआ
हिरासत में लिए जाने के बाद दोनों को अहमदाबाद केंद्रीय जेल में उनकी शेष सजा काटने के लिए सौंप दिया गया। क्राइम ब्रांच के अनुसार, 'ऑपरेशन करावास' के तहत ऐसे अन्य फरार कैदियों की तलाश जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।