अहमदाबाद साइबर क्राइम: डिजिटल अरेस्ट स्कैम में बुजुर्ग महिला से ₹55.50 लाख की ठगी, हरियाणा-दिल्ली से दो गिरफ्तार

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अहमदाबाद साइबर क्राइम: डिजिटल अरेस्ट स्कैम में बुजुर्ग महिला से ₹55.50 लाख की ठगी, हरियाणा-दिल्ली से दो गिरफ्तार

सारांश

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो फर्जी पुलिस पहचान और जाली सरकारी दस्तावेजों के जरिए बुजुर्ग महिलाओं को 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर ठगता था। गुरुग्राम और दिल्ली से गिरफ्तार दोनों आरोपियों के खिलाफ पाँच राज्यों में साइबर शिकायतें दर्ज हैं।

मुख्य बातें

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
आरोपियों ने एक बुजुर्ग महिला से ₹55,50,094 की ठगी की — पैसे ट्रांसफर और गोल्ड लोन के जरिए।
गिरफ्तार आरोपी हैं गुरुग्राम निवासी सोनू कुमार और दिल्ली के कपासहेड़ा निवासी प्रदीप कुमार ।
गिरोह ने नकली एफआईआर, वित्त मंत्रालय के फर्जी पत्र और सुप्रीम कोर्ट के नाम से जाली दस्तावेज भेजे।
गिरोह से जुड़े बैंक खातों पर महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में शिकायतें दर्ज हैं।

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम के जरिए एक बुजुर्ग महिला से ₹55,50,094 रुपए की ठगी की थी। आरोपियों ने फर्जी पुलिस पहचान, नकली एफआईआर और सुप्रीम कोर्ट के नाम से बनाए गए जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर पीड़िता को मानसिक दबाव में रखा। यह मामला 12 मई को सामने आया जब अहमदाबाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता, 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

कैसे दिया गया ठगी को अंजाम

पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता बुजुर्ग महिला को व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया गया। कॉल करने वालों ने खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन का अधिकारी 'रणवीर सिंह' बताया और महिला पर आरोप लगाया कि वह एक फ्रॉड केस में शामिल है तथा उसके खिलाफ वारंट जारी हो चुका है।

इसके बाद आरोपियों ने महिला को करीब एक महीने तक 'डिजिटल अरेस्ट' में होने का झांसा दिया। डर का माहौल बनाने के लिए उन्होंने नकली एफआईआर, वित्त मंत्रालय के फर्जी पत्र और सुप्रीम कोर्ट के नाम से तैयार किए गए जाली दस्तावेज भेजे।

बैंक डिटेल्स और गोल्ड लोन से वसूले पैसे

पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने संपत्ति की जांच का बहाना बनाकर महिला से उसकी बैंक डिटेल्स हासिल कीं। इसके बाद उन्होंने पीड़िता को पैसे ट्रांसफर करने और गोल्ड लोन लेने के लिए भी मजबूर किया। इस प्रकार अलग-अलग ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए कुल ₹55,50,094 की ठगी की गई।

आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी

जांच में सामने आया कि यह ठगी एक संगठित नेटवर्क के जरिए की गई थी। दोनों आरोपियों को हरियाणा और दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। पहले आरोपी की पहचान गुरुग्राम निवासी सोनू कुमार और दूसरे की पहचान दिल्ली के कपासहेड़ा क्षेत्र निवासी प्रदीप कुमार के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों ने दिल्ली के एक होटल में वसीम खान नामक सहयोगी से मुलाकात कर ठगी के पैसों के लेनदेन की योजना बनाई थी। इस दौरान उन्होंने करोड़ों रुपए के ट्रांजेक्शन को अंजाम दिया।

कई राज्यों में दर्ज हैं शिकायतें

जांच में यह भी उजागर हुआ कि इस गिरोह से जुड़े बैंक खातों के खिलाफ महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में कई साइबर शिकायतें पहले से दर्ज हैं। साइबर क्राइम शाखा के अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों का नाम लेकर फर्जी गिरफ्तारी का भय दिखाता था और इसी आधार पर लोगों से पैसे ऐंठता था।

अधिकारियों की चेतावनी

अधिकारियों ने आम नागरिकों को सतर्क करते हुए कहा है कि कोई भी वैध पुलिस या जांच एजेंसी वीडियो कॉल के माध्यम से गिरफ्तारी नहीं करती और न ही ओटीपी, पिन या ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की मांग करती है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई ऐप इंस्टॉल न करें और ऐसी किसी भी कॉल की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें। यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम देशभर में तेज़ी से फैल रहे हैं और बुजुर्ग नागरिक इनके सबसे आसान निशाने बन रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अंतरराज्यीय साइबर अपराध जांच के समन्वय में गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है। वित्त मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट के नाम से जाली दस्तावेज बनाना यह दर्शाता है कि ये गिरोह अब केवल तकनीकी नहीं, बल्कि संस्थागत विश्वास का भी दोहन कर रहे हैं। जब तक केंद्रीय स्तर पर रियल-टाइम बैंक खाता निगरानी और अंतरराज्यीय साइबर टास्क फोर्स की व्यवस्था नहीं होती, ऐसे मामले बढ़ते रहेंगे।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या होता है?
डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग खुद को पुलिस या केंद्रीय जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर पीड़ित को 'डिजिटल अरेस्ट' में होने का झांसा देते हैं। इस दौरान वे जाली दस्तावेज भेजकर मानसिक दबाव बनाते हैं और बैंक ट्रांसफर के जरिए पैसे ऐंठते हैं।
अहमदाबाद में गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?
गिरफ्तार आरोपियों में गुरुग्राम निवासी सोनू कुमार और दिल्ली के कपासहेड़ा क्षेत्र निवासी प्रदीप कुमार शामिल हैं। दोनों एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह के सदस्य बताए जा रहे हैं।
बुजुर्ग महिला से कितनी ठगी हुई और कैसे?
पीड़िता बुजुर्ग महिला से कुल ₹55,50,094 की ठगी हुई। आरोपियों ने उन्हें पैसे ट्रांसफर करने और गोल्ड लोन लेने के लिए मजबूर किया, जो अलग-अलग ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए वसूले गए।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम से कैसे बचें?
अधिकारियों के अनुसार, कोई भी वैध पुलिस या जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती और न ही ओटीपी या ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की मांग करती है। ऐसी कोई भी कॉल आने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचित करें।
इस गिरोह के खिलाफ और कहाँ-कहाँ शिकायतें दर्ज हैं?
इस गिरोह से जुड़े बैंक खातों के खिलाफ महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में कई साइबर शिकायतें पहले से दर्ज हैं, जो इस नेटवर्क की व्यापक पहुँच को दर्शाती हैं।
राष्ट्र प्रेस