क्या ग्रेटर कैलाश में एक और महिला कारोबारी को साइबर ठगी का शिकार होना पड़ा?
सारांश
Key Takeaways
- ग्रेटर कैलाश में साइबर ठगी की बढ़ती घटनाएँ चिंता का विषय हैं।
- बुजुर्गों को साइबर ठगी से बचाने की आवश्यकता है।
- डिजिटल अरेस्ट के तरीके से ठगी की घटनाएँ हो रही हैं।
- पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और एफआईआर दर्ज की है।
- साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।
नई दिल्ली, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली के ग्रेटर कैलाश क्षेत्र में एक और परिवार को साइबर अपराधियों ने ठगी का शिकार बना लिया है। कथित तौर पर 'डिजिटल अरेस्ट' के माध्यम से एक 70 वर्षीय महिला कारोबारी से लगभग सात करोड़ रुपए की ठगी की गई है। अब इस ठगी के संबंध में पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
दिल्ली, जो कि देश की राजधानी है, में साइबर अपराधियों का आतंक बढ़ता जा रहा है। पिछले एक सप्ताह में साउथ दिल्ली से ऐसे दो बड़े मामले प्रकाश में आए हैं, जिनमें बुजुर्गों को डराने, मानसिक दबाव डालने के माध्यम से करोड़ों रुपए की ठगी की गई। इन साइबर फ्रॉड की घटनाओं को 'डिजिटल अरेस्ट' का नाम दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, ग्रेटर कैलाश में रहने वाली 70 वर्षीय महिला कारोबारी को साइबर अपराधियों ने करीब तीन दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा। इस दौरान विभिन्न बैंक खातों में लगभग सात करोड़ रुपए जमा कराए गए। यह सामने आया है कि मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाकर महिला कारोबारी को 'डिजिटल अरेस्ट' किया गया।
इस मामले में, दिल्ली पुलिस की विशेष सेल की साइबर यूनिट ने एफआईआर दर्ज कर ली है और जांच शुरू कर दी है।
इससे पहले, ग्रेटर कैलाश में एक बुजुर्ग दंपति के साथ भी साइबर अपराधियों ने ठगी की थी। डॉक्टर दंपति अमेरिका से लौटे थे और 2016 से ग्रेटर कैलाश में निवास कर रहे थे। उनके बच्चे विदेश में बसे हुए हैं।
पुलिस के अनुसार, बुजुर्ग डॉक्टर दंपति के साथ लगभग 14 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी हुई। साइबर अपराधियों ने उन्हें दो हफ्ते से अधिक समय तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा था।
यह धोखाधड़ी 24 दिसंबर से 9 जनवरी के बीच हुई, जिसमें आरोपियों ने खुद को कानून प्रवर्तन अधिकारी बताकर बुजुर्ग दंपति को विभिन्न बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। शनिवार को एक ई-एफआईआर दर्ज की गई, जिसके बाद दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट ने जांच शुरू की।