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अहमदाबाद पुलिस का 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप 2.0': 24 घंटे में 190 गिरफ्तार, 21 साल से फरार अपराधी भी पकड़ा

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अहमदाबाद पुलिस का 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप 2.0': 24 घंटे में 190 गिरफ्तार, 21 साल से फरार अपराधी भी पकड़ा

सारांश

रथ यात्रा से पहले अहमदाबाद पुलिस का 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप 2.0' सिर्फ एक रूटीन कार्रवाई नहीं थी — 341 अधिकारियों की 43 टीमों ने 24 घंटे में 190 आरोपी पकड़े, जिनमें दो दशक से फरार अपराधी भी शामिल। यह डेटा-आधारित, बहु-राज्यीय पुलिसिंग का एक नया मानक है।

मुख्य बातें

अहमदाबाद सिटी पुलिस ने 5–6 जुलाई के दौरान 24 घंटे में 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप 2.0' के तहत 190 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
2005 के नकली नोट मामले में 21 वर्षों से फरार और 2006 के चोरी मामले में 20 वर्षों से फरार दो आरोपी भी पकड़े गए।
341 अधिकारियों की 43 टीमें तैनात; ऑपरेशन गुजरात के कई जिलों और 5 अन्य राज्यों तक फैला।
गिरफ्तारियों में 83 फरार आरोपी , 54 गैर-जमानती वारंट वाले, 28 शराबबंदी और 11 नशे में वाहन चलाने के मामले शामिल।
ऑपरेशन डीसीपी शिवम वर्मा के एक्शन प्लान और पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत के मार्गदर्शन में चलाया गया।
पुलिस ने घोषणा की कि भविष्य के बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों से पहले ऐसे ऑपरेशन जारी रहेंगे ।

अहमदाबाद सिटी पुलिस ने रथ यात्रा से पहले कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाए गए 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप 2.0' के तहत 5 जुलाई की सुबह 8 बजे से 6 जुलाई तक महज 24 घंटों में जोन 7 के आठ पुलिस स्टेशनों से 190 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें दो ऐसे व्यक्ति भी शामिल हैं जो क्रमशः 21 वर्ष और 20 वर्ष से कानून की पकड़ से बाहर थे।

ऑपरेशन की रूपरेखा

यह अभियान डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (जोन 7) शिवम वर्मा द्वारा तैयार विशेष एक्शन प्लान के तहत संचालित किया गया। पुलिस के अनुसार, 43 टीमों में कुल 341 अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए, जिनमें 8 पुलिस इंस्पेक्टर, 37 सब-इंस्पेक्टर और 261 पुलिसकर्मी शामिल थे। टीमों ने ह्यूमन इंटेलिजेंस और टेक्निकल सर्विलांस दोनों का उपयोग किया।

अभियान का दायरा केवल अहमदाबाद तक सीमित नहीं था — पुलिस ने राजकोट, कच्छ, जूनागढ़, मेहसाणा, गांधीनगर और बनासकांठा के साथ-साथ महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी छापे मारे।

गिरफ्तारियों का विवरण

गिरफ्तार 190 लोगों में से 83 फरार आरोपी थे जो चल रही जाँच में वांछित थे। 54 गैर-जमानती वारंट के तहत पकड़े गए, 28 शराबबंदी से जुड़े मामलों में, 11 पर मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 (नशे में वाहन चलाना) के तहत कार्रवाई हुई, और 5 शहर से बाहर निकाले गए अपराधी थे।

दीर्घकालिक फरार आरोपियों में सबसे उल्लेखनीय मामला 2005 के नकली नोट मामले से जुड़ा है — यह व्यक्ति सैटेलाइट पुलिस स्टेशन द्वारा वांछित था और 21 वर्षों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। उसे जोन की लोकल क्राइम ब्रांच ने दबोचा। इसी तरह 2006 के चोरी के एक मामले में वेजलपुर पुलिस स्टेशन का वांछित आरोपी 20 वर्ष बाद उत्तर प्रदेश से पकड़ा गया।

घर में सेंधमारी के एक मामले से जुड़े आरोपी को 10 वर्षों से वांछित होने के कारण मृत मान लिया गया था, लेकिन वह इस ऑपरेशन में जीवित पकड़ा गया। तीन अन्य आरोपी धोखाधड़ी और सेंधमारी के मामलों में तीन वर्षों से फरार थे, जबकि 17 अन्य विभिन्न मामलों में एक वर्ष से अधिक समय से गिरफ्तारी से बचते रहे थे।

सरकार और पुलिस की प्रतिक्रिया

डीसीपी शिवम वर्मा ने बताया कि यह ऑपरेशन रथ यात्रा के मद्देनजर हाई अलर्ट की स्थिति में शुरू किया गया। उन्होंने कहा, 'पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत के मार्गदर्शन में और चल रही रथ यात्रा को देखते हुए, पुलिस हाई अलर्ट पर है। इसके तहत जोन 7 पुलिस, जिसमें आठ पुलिस स्टेशन शामिल हैं, ने ऑपरेशन क्लीन स्वीप 2.0 शुरू किया। इस ऑपरेशन के तहत, हमने कुल 190 आरोपियों को पकड़ा।'

आम जनता पर असर

एंट्री और एग्जिट पॉइंट सहित अन्य संवेदनशील स्थानों पर ब्रेथ एनालाइजर से वाहनों की जाँच की गई। इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर संदिग्ध शराब तस्करी नेटवर्क पर भी छापे मारे गए। पुलिस ने पैरोल, फरलो या अंतरिम जमानत के बाद सरेंडर न करने वाले और पीएएसए वारंट वाले अपराधियों के खिलाफ भी कार्रवाई की।

आगे क्या

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों से पहले वांछित अपराधियों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ इसी तरह के ऑपरेशन भविष्य में भी जारी रहेंगे। गौरतलब है कि यह अभियान पिछले पाँच वर्षों के फरार आरोपियों और लंबित मामलों की सूची तैयार कर, उसी आधार पर चलाया गया — जो इसे एक सुनियोजित, डेटा-आधारित पुलिसिंग का उदाहरण बनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ये अपराधी इतने वर्षों तक सिस्टम से बाहर कैसे रहे। नकली नोट के एक आरोपी को पकड़ने में 21 साल लगना पुलिस की तात्कालिक सफलता से ज़्यादा, पुराने वारंट प्रबंधन और इंटर-स्टेट समन्वय की खामियों को उजागर करता है। रथ यात्रा जैसे आयोजनों से पहले की यह 'इवेंट-ड्रिवन पुलिसिंग' स्वागतयोग्य है, पर सवाल उठता है कि क्या यह सतत निगरानी की जगह ले सकती है। बिना नियमित फॉलो-अप तंत्र के, ऐसे ऑपरेशन चुनावी या आयोजन-केंद्रित दिखावे बनकर रह जाने का जोखिम उठाते हैं।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ऑपरेशन क्लीन स्वीप 2.0' क्या है?
यह अहमदाबाद सिटी पुलिस के जोन 7 द्वारा 5–6 जुलाई को चलाया गया 24 घंटे का विशेष अभियान है, जिसमें रथ यात्रा से पहले कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए 190 वांछित अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इसे डीसीपी शिवम वर्मा के एक्शन प्लान के तहत 43 टीमों ने अंजाम दिया।
इस ऑपरेशन में कितने और किस तरह के अपराधी पकड़े गए?
कुल 190 गिरफ्तारियों में 83 फरार आरोपी, 54 गैर-जमानती वारंट वाले, 28 शराबबंदी कानून तोड़ने वाले, 11 नशे में वाहन चलाने वाले और 5 शहर से बाहर निकाले गए अपराधी शामिल हैं। इनमें 21 और 20 वर्षों से फरार दो आरोपी भी पकड़े गए।
21 साल से फरार आरोपी किस मामले में वांछित था?
यह व्यक्ति 2005 से सैटेलाइट पुलिस स्टेशन द्वारा नकली नोटों के मामले में वांछित था। 21 वर्षों तक फरार रहने के बाद उसे जोन 7 की लोकल क्राइम ब्रांच ने इस ऑपरेशन में गिरफ्तार किया।
यह ऑपरेशन रथ यात्रा से क्यों जोड़ा गया?
पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत के मार्गदर्शन में रथ यात्रा जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों से पहले शहर में संभावित अपराधियों और असामाजिक तत्वों की उपस्थिति कम करना इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य था। डीसीपी वर्मा ने पुष्टि की कि इस दौरान पुलिस हाई अलर्ट पर है।
क्या भविष्य में भी ऐसे ऑपरेशन होंगे?
हाँ, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों से पहले वांछित अपराधियों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ इसी तरह के ऑपरेशन जारी रहेंगे। यह अभियान पिछले पाँच वर्षों के लंबित मामलों की सूची के आधार पर चलाया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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