3 जुलाई 2026
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गुजरात एटीएस ने जैश-ए-मोहम्मद के 8 संदिग्ध गिरफ्तार, पाक हैंडलर्स से था संपर्क

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गुजरात एटीएस ने जैश-ए-मोहम्मद के 8 संदिग्ध गिरफ्तार, पाक हैंडलर्स से था संपर्क

सारांश

गुजरात एटीएस ने 3 जुलाई को एक साथ पाँच ज़िलों में छापेमारी कर जैश-ए-मोहम्मद के 8 संदिग्धों को दबोचा। पाक हैंडलर्स से संपर्क, गुजराती में अनुवादित कट्टरपंथी सामग्री और ₹3 लाख की संदिग्ध फंडिंग — यह ऑपरेशन राज्य में आतंकी जड़ों की गहराई उजागर करता है।

मुख्य बातें

गुजरात एटीएस ने 3 जुलाई 2026 को जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 8 संदिग्धों को गिरफ्तार किया।
छापेमारी बनासकांठा, मेहसाणा, पाटण, नवसारी (गुजरात) और देवास (मध्य प्रदेश) में एक साथ की गई।
आरोपी पाकिस्तान में बैठे जैश हैंडलर्स के संपर्क में थे और मसूद अजहर की सामग्री गुजराती में अनुवाद कर वितरित कर रहे थे।
नॉर्डलॉकर ऐप से 250 से अधिक आपत्तिजनक दस्तावेज़, वीडियो और ऑडियो फाइलें बरामद।
आरोपियों को कथित तौर पर ₹3 लाख की आतंकी फंडिंग मिली थी; स्रोत की जाँच जारी।
सभी आरोपियों पर UAPA और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत मामला दर्ज।

गुजरात की आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने 3 जुलाई 2026 को प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक सक्रिय मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए 8 संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार किया। जाँच अधिकारियों के अनुसार, ये संदिग्ध सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने और गुजरात में जैश का नेटवर्क खड़ा करने में सक्रिय थे।

मुख्य घटनाक्रम

एटीएस की अलग-अलग टीमों ने एक साथ बनासकांठा, मेहसाणा, पाटण, नवसारी (गुजरात) और देवास (मध्य प्रदेश) में छापेमारी कर सभी 8 आरोपियों को हिरासत में लिया। एटीएस के अनुसार, आरोपियों ने 'गुजरात जैश-ए-मोहम्मद' के नाम से एक स्थानीय नेटवर्क तैयार किया था, जिसका उद्देश्य अधिक से अधिक युवाओं को संगठन से जोड़ना और राज्य में आतंकी विचारधारा का विस्तार करना था।

गुजरात एटीएस के डीआईजी सुनील जोशी ने इस ऑपरेशन की जानकारी साझा करते हुए बताया कि एजेंसी को काफी समय से इनपुट मिल रहे थे कि राज्य में कुछ तत्व जैश-ए-मोहम्मद की विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। इसके बाद तकनीकी निगरानी, ह्यूमन इंटेलिजेंस और डिजिटल सर्विलांस के ज़रिए पूरे नेटवर्क पर नज़र रखी गई।

पाकिस्तान कनेक्शन और डिजिटल साक्ष्य

पूछताछ में सामने आया कि आरोपी पाकिस्तान में बैठे जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलर्स के सीधे संपर्क में थे। कथित तौर पर वे संगठन के प्रमुख मसूद अजहर के भाषण, किताबें और अन्य कट्टरपंथी सामग्री को गुजराती भाषा में अनुवाद कर स्थानीय स्तर पर वितरित कर रहे थे। इसके साथ ही नए सदस्यों की भर्ती के लिए ऑनलाइन अभियान भी संचालित किया जा रहा था।

छापेमारी के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई। एटीएस के अनुसार, नॉर्डलॉकर ऐप से जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 250 से अधिक दस्तावेज़, फोटो, वीडियो और ऑडियो फाइलें मिलीं। इसके अलावा पाकिस्तान में प्रकाशित किताबें, मसूद अजहर का साहित्य, संगठन से जुड़ने के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट पत्र और गुजराती में अनुवादित कट्टरपंथी सामग्री भी जब्त की गई।

फंडिंग और वित्तीय जाँच

जाँच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों को आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए कथित तौर पर करीब ₹3 लाख की फंडिंग प्राप्त हुई थी। एटीएस अब इस फंडिंग के स्रोत, विदेशी कनेक्शन और पूरे नेटवर्क की गहराई से जाँच कर रही है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब देश में आतंकी फंडिंग के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियाँ पहले से सक्रिय हैं।

कानूनी कार्रवाई

गुजरात एटीएस ने सभी 8 आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। एटीएस के अनुसार, जाँच अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

आगे की जाँच

एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि इस मॉड्यूल से जुड़े अन्य सदस्य गुजरात या देश के अन्य राज्यों में सक्रिय तो नहीं हैं। गौरतलब है कि यह गुजरात में जैश-ए-मोहम्मद के नेटवर्क के खिलाफ हाल के वर्षों की सबसे बड़ी एकल कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है। आने वाले दिनों में इस ऑपरेशन से जुड़े नए तथ्य सामने आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

'ऑनलाइन रैडिकलाइज़ेशन' का एक नया मॉडल है जिससे सुरक्षा एजेंसियाँ पहले से चेतावनी दे रही हैं। ₹3 लाख की फंडिंग की राशि भले ही छोटी लगे, लेकिन इसके स्रोत और रूटिंग की जाँच असली तस्वीर सामने लाएगी। सवाल यह है कि क्या यह एक अलग-थलग मॉड्यूल था या किसी बड़े राष्ट्रव्यापी नेटवर्क की एक कड़ी — और इसका जवाब आने वाली जाँच पर निर्भर करेगा।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात एटीएस ने किसे और कहाँ से गिरफ्तार किया?
गुजरात एटीएस ने 3 जुलाई 2026 को जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 8 संदिग्धों को गिरफ्तार किया। छापेमारी बनासकांठा, मेहसाणा, पाटण, नवसारी (गुजरात) और देवास (मध्य प्रदेश) में एक साथ की गई।
आरोपियों का पाकिस्तान से क्या संबंध था?
जाँच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी पाकिस्तान में बैठे जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलर्स के सीधे संपर्क में थे। वे जैश प्रमुख मसूद अजहर के भाषण और साहित्य को गुजराती में अनुवाद कर वितरित कर रहे थे और ऑनलाइन भर्ती अभियान भी चला रहे थे।
छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ?
एटीएस ने नॉर्डलॉकर ऐप से जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 250 से अधिक दस्तावेज़, फोटो, वीडियो और ऑडियो फाइलें बरामद कीं। इसके अलावा पाकिस्तान में प्रकाशित किताबें, ड्राफ्ट भर्ती पत्र और गुजराती में अनुवादित कट्टरपंथी सामग्री भी जब्त की गई।
आरोपियों पर कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
सभी 8 आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। एटीएस के अनुसार जाँच अभी प्रारंभिक चरण में है।
इस मॉड्यूल को मिली फंडिंग कितनी थी और जाँच कहाँ तक पहुँची है?
जाँच में सामने आया है कि आरोपियों को आतंकी गतिविधियों के लिए कथित तौर पर करीब ₹3 लाख की फंडिंग मिली थी। एटीएस अब इस फंडिंग के स्रोत, विदेशी कनेक्शन और नेटवर्क के दायरे की गहराई से जाँच कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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