एनसीएल के पूर्व सीएमडी भोला सिंह पर ईडी की कार्रवाई, ₹2.79 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग में जबलपुर कोर्ट में शिकायत दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल जोनल ऑफिस ने नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) के पूर्व चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर भोला सिंह के विरुद्ध जबलपुर की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत अभियोजन शिकायत दायर की है। कोर्ट ने इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए आरोपी को नोटिस जारी कर दिया है। जाँच में ₹2.79 करोड़ की अपराध से अर्जित संपत्ति की पहचान की गई है, जिसे पहले ही अनंतिम रूप से कुर्क किया जा चुका है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने यह जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई), एंटी-करप्शन ब्रांच-II, नई दिल्ली द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 (2018 में संशोधित) की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(बी) और धारा 12 के तहत भोला सिंह के खिलाफ दर्ज की गई थी।
एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि 1 जनवरी 2022 से 31 जनवरी 2024 के बीच एनसीएल के सीएमडी पद पर रहते हुए भोला सिंह ने अपनी ज्ञात आय के अनुपात से अधिक संपत्ति अर्जित की।
मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप
पीएमएलए के तहत जाँच में यह सामने आया कि भोला सिंह ने कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन को जानबूझकर हासिल किया, अपने पास रखा, छिपाया और उसे वैध संपत्ति के रूप में प्रदर्शित किया। जाँच एजेंसी के अनुसार, इसके लिए नकद एवं सोने के गहनों का उपयोग किया गया, साथ ही अचल संपत्ति की खरीद के लिए बैंकिंग चैनलों के माध्यम से तीसरे पक्ष के फंड का इस्तेमाल किया गया।
जाँच में विशेष रूप से यह पाया गया कि तीसरे पक्ष से प्राप्त ₹50 लाख की राशि को अन्य फंड के साथ मिलाकर रांची के एसएआईएल सिटी में एक रिहायशी फ्लैट खरीदने में लगाया गया और उसे वैध संपत्ति के रूप में दर्शाया गया।
जब्त की गई संपत्तियाँ
ईडी ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत ₹2.79 करोड़ मूल्य की चल और अचल संपत्तियों का प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर पहले ही जारी कर दिया था। जब्त की गई संपत्तियों में बैंक लॉकर से बरामद सोने के गहने और रांची में स्थित एक रिहायशी फ्लैट शामिल हैं।
आगे क्या होगा
जबलपुर की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट द्वारा नोटिस जारी होने के बाद अब भोला सिंह को अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा। यह मामला उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें ईडी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच तेज कर रही है। इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।