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एनसीएल के पूर्व सीएमडी भोला सिंह पर ईडी की कार्रवाई, ₹2.79 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग में जबलपुर कोर्ट में शिकायत दर्ज

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एनसीएल के पूर्व सीएमडी भोला सिंह पर ईडी की कार्रवाई, ₹2.79 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग में जबलपुर कोर्ट में शिकायत दर्ज

सारांश

प्रवर्तन निदेशालय ने एनसीएल के पूर्व सीएमडी भोला सिंह के खिलाफ जबलपुर पीएमएलए कोर्ट में अभियोजन शिकायत दर्ज की है। आरोप है कि उन्होंने ₹2.79 करोड़ की अपराध-अर्जित संपत्ति को नकद, सोने के गहनों और रांची फ्लैट के ज़रिए वैध दिखाने की कोशिश की।

मुख्य बातें

ईडी भोपाल जोनल ऑफिस ने जबलपुर स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में एनसीएल के पूर्व सीएमडी भोला सिंह के खिलाफ अभियोजन शिकायत दायर की।
आरोप है कि 1 जनवरी 2022 से 31 जनवरी 2024 के बीच सीएमडी पद पर रहते हुए आय से अधिक संपत्ति अर्जित की गई।
जाँच में ₹2.79 करोड़ की अपराध-अर्जित संपत्ति चिह्नित; संपत्तियाँ पहले ही प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत कुर्क।
तीसरे पक्ष से प्राप्त ₹50 लाख का उपयोग रांची के एसएआईएल सिटी में रिहायशी फ्लैट खरीदने में किया गया।
जब्त संपत्तियों में बैंक लॉकर से बरामद सोने के गहने और रांची फ्लैट शामिल।
मामले की जड़ सीबीआई एंटी-करप्शन ब्रांच-II, नई दिल्ली द्वारा दर्ज एफआईआर में है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल जोनल ऑफिस ने नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) के पूर्व चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर भोला सिंह के विरुद्ध जबलपुर की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत अभियोजन शिकायत दायर की है। कोर्ट ने इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए आरोपी को नोटिस जारी कर दिया है। जाँच में ₹2.79 करोड़ की अपराध से अर्जित संपत्ति की पहचान की गई है, जिसे पहले ही अनंतिम रूप से कुर्क किया जा चुका है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने यह जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई), एंटी-करप्शन ब्रांच-II, नई दिल्ली द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 (2018 में संशोधित) की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(बी) और धारा 12 के तहत भोला सिंह के खिलाफ दर्ज की गई थी।

एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि 1 जनवरी 2022 से 31 जनवरी 2024 के बीच एनसीएल के सीएमडी पद पर रहते हुए भोला सिंह ने अपनी ज्ञात आय के अनुपात से अधिक संपत्ति अर्जित की।

मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप

पीएमएलए के तहत जाँच में यह सामने आया कि भोला सिंह ने कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन को जानबूझकर हासिल किया, अपने पास रखा, छिपाया और उसे वैध संपत्ति के रूप में प्रदर्शित किया। जाँच एजेंसी के अनुसार, इसके लिए नकद एवं सोने के गहनों का उपयोग किया गया, साथ ही अचल संपत्ति की खरीद के लिए बैंकिंग चैनलों के माध्यम से तीसरे पक्ष के फंड का इस्तेमाल किया गया।

जाँच में विशेष रूप से यह पाया गया कि तीसरे पक्ष से प्राप्त ₹50 लाख की राशि को अन्य फंड के साथ मिलाकर रांची के एसएआईएल सिटी में एक रिहायशी फ्लैट खरीदने में लगाया गया और उसे वैध संपत्ति के रूप में दर्शाया गया।

जब्त की गई संपत्तियाँ

ईडी ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत ₹2.79 करोड़ मूल्य की चल और अचल संपत्तियों का प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर पहले ही जारी कर दिया था। जब्त की गई संपत्तियों में बैंक लॉकर से बरामद सोने के गहने और रांची में स्थित एक रिहायशी फ्लैट शामिल हैं।

आगे क्या होगा

जबलपुर की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट द्वारा नोटिस जारी होने के बाद अब भोला सिंह को अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा। यह मामला उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें ईडी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच तेज कर रही है। इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसे मामले दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीएल के पूर्व सीएमडी भोला सिंह पर क्या आरोप हैं?
भोला सिंह पर आरोप है कि उन्होंने एनसीएल के सीएमडी पद पर रहते हुए अपनी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित की और अपराध से हुई ₹2.79 करोड़ की कमाई को नकद, सोने के गहनों तथा अचल संपत्ति के ज़रिए वैध दिखाने का प्रयास किया। यह आरोप पीएमएलए, 2002 और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 के तहत लगाए गए हैं।
ईडी ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
ईडी ने ₹2.79 करोड़ मूल्य की चल और अचल संपत्तियों का प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया है और जबलपुर की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में अभियोजन शिकायत दाखिल की है। जब्त संपत्तियों में बैंक लॉकर से बरामद सोने के गहने और रांची का एक रिहायशी फ्लैट शामिल हैं।
रांची का फ्लैट मामले से कैसे जुड़ा है?
जाँच के अनुसार, तीसरे पक्ष से प्राप्त ₹50 लाख की राशि को अन्य फंड के साथ मिलाकर रांची के एसएआईएल सिटी में एक रिहायशी फ्लैट खरीदा गया। इस लेनदेन को बैंकिंग चैनलों के माध्यम से वैध संपत्ति के रूप में दर्शाया गया, जो मनी लॉन्ड्रिंग का प्रमुख आधार बना।
इस मामले की जाँच कब और कैसे शुरू हुई?
ईडी ने यह जाँच सीबीआई एंटी-करप्शन ब्रांच-II, नई दिल्ली द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की। एफआईआर में 1 जनवरी 2022 से 31 जनवरी 2024 की अवधि के दौरान आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप था।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
जबलपुर स्पेशल पीएमएलए कोर्ट द्वारा नोटिस जारी होने के बाद भोला सिंह को अदालत में अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा। अगली सुनवाई की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है; कोर्ट की कार्यवाही के साथ मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
राष्ट्र प्रेस
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