सूडान में 2026 के पहले छह महीनों में 330 बच्चे ड्रोन हमलों का शिकार: यूनिसेफ रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
यूनिसेफ की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के पहले छह महीनों में सूडान में कम से कम 330 बच्चे मारे गए या घायल हुए — और इनमें से करीब 60 प्रतिशत मामलों में ड्रोन हमले ज़िम्मेदार पाए गए। दारफुर और कोर्डोफान राज्यों में बच्चों के हताहत होने की सर्वाधिक घटनाएँ दर्ज की गई हैं, जो इस संघर्ष की मानवीय कीमत को रेखांकित करती हैं।
ड्रोन हमलों का बच्चों पर कहर
यूनिसेफ की रिपोर्ट में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि मई 2026 से राज्य में ड्रोन हमलों और अन्य हमलों की वजह से 35 से अधिक बच्चे प्रभावित हुए। इनमें कम से कम 18 बच्चों की मौत हुई और 17 से अधिक बच्चे घायल हुए। प्रभावित बच्चों की आयु महज दो महीने से लेकर 17 वर्ष तक थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन घटनाओं में करीब 60 प्रतिशत बच्चे ड्रोन हमलों का शिकार हुए। यह आँकड़ा इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन तकनीक का बेलगाम इस्तेमाल आम नागरिकों, विशेषकर बच्चों के लिए कितना घातक सिद्ध हो रहा है।
बुनियादी ढाँचे पर हमले और राहत में बाधाएँ
लगातार हो रहे ड्रोन हमलों और गोलाबारी से घर, स्कूल, अस्पताल, जल-आपूर्ति व्यवस्था और बाज़ार जैसी नागरिक सुविधाएँ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं। राहत सामग्री पहुँचाने वाले मार्ग भी बाधित हुए हैं, जिससे ज़रूरी सेवाओं पर दबाव निरंतर बढ़ता जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब सूडान पहले से ही दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक का सामना कर रहा है।
नॉर्थ कोर्डोफान में पाँच लाख लोगों की जान खतरे में
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अल ओबैद और उसके आसपास के इलाकों सहित पूरे नॉर्थ कोर्डोफान में करीब 5 लाख लोगों की जान खतरे में है। यूनिसेफ ने अल ओबैद की स्थिति को 'बेहद चिंताजनक' करार दिया है। यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो और अधिक बच्चों को मौत, चोट, बेघर होने और अन्य गंभीर खतरों का सामना करना पड़ सकता है।
यूनिसेफ प्रतिनिधि की पुकार
सूडान में यूनिसेफ के प्रतिनिधि शेल्डन येट ने कहा, 'बच्चे लगातार हिंसा, बेघर होने और बुनियादी ज़रूरतों की कमी के एक अंतहीन चक्र में फँसे हुए हैं। कई बच्चों के लिए अब कोई भी जगह सुरक्षित नहीं बची है। वे अपने घरों में, सड़कों पर, बाज़ारों में और स्कूल या इलाज जैसी ज़रूरी सेवाएँ लेने जाते समय भी मारे जा रहे हैं या घायल हो रहे हैं। बच्चों को कभी निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके जीवन, उनके अधिकारों और उनके भविष्य की रक्षा होना बेहद ज़रूरी है।'
संघर्ष के अन्य गंभीर खतरे और यूनिसेफ की अपील
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि बच्चों के सामने केवल मौत या चोट का ही खतरा नहीं है — इस संघर्ष के कारण उन्हें जबरन लड़ाई में शामिल किए जाने, अपहरण, यौन हिंसा तथा स्कूलों और अस्पतालों पर हमलों जैसी गंभीर स्थितियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
यूनिसेफ ने संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से अपील की है कि वे आम नागरिकों और नागरिक सुविधाओं की सुरक्षा करें, राहत एजेंसियों को सुरक्षित एवं निर्बाध रूप से ज़रूरतमंदों तक पहुँचने दें, और बच्चों को हर प्रकार के नुकसान से बचाने के लिए हर संभव कदम उठाएँ। आने वाले हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय दबाव और मानवीय सहायता की माँग और तेज़ होने की संभावना है।