कर्नाटक कैबिनेट विस्तार: शिवकुमार ने खड़गे से की मुलाकात, 20 मंत्री पद खाली, 40+ दावेदार
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 18 जुलाई को बेंगलुरु के सदाशिवनगर स्थित आवास पर कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। यह बैठक कर्नाटक कैबिनेट के बहुप्रतीक्षित विस्तार और पार्टी संगठन में प्रस्तावित बड़े बदलावों को लेकर बनी अनिश्चितता की पृष्ठभूमि में हुई। बैठक में उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर भी उपस्थित रहे।
मुख्य घटनाक्रम
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, शिवकुमार ने खड़गे को नई दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ राष्ट्रीय नेताओं के साथ हुई बैठकों की जानकारी दी। ये चर्चाएँ कैबिनेट विस्तार की दिशा और स्वरूप तय करने के लिए हो रही हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस हाईकमान ने अभी तक नए मंत्रियों को शामिल करने पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
वर्तमान में कर्नाटक की कांग्रेस सरकार मुख्यमंत्री सहित केवल 14 मंत्रियों के साथ कार्यरत है, जबकि कैबिनेट में 20 पद रिक्त हैं। सूत्रों के मुताबिक, 40 से अधिक वरिष्ठ नेता मंत्री पद पाने की दौड़ में हैं, जिससे क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, जातिगत समीकरण, वरिष्ठता और राजनीतिक संतुलन बनाना एक जटिल चुनौती बन गई है।
दिल्ली में बैठकें, फिर भी सहमति नहीं
नई दिल्ली में मुख्यमंत्री सिद्दारमैया, शिवकुमार और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद के बीच कई उच्चस्तरीय बैठकें हुईं, लेकिन किसी आम सहमति तक नहीं पहुँचा जा सका। तीनों नेताओं ने सोनिया गांधी के आवास पर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष की उपस्थिति में राहुल गांधी से मुलाकात की।
इन बैठकों में कांग्रेस महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल, कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला और राज्य के ऊर्जा मंत्री के.जे. जॉर्ज भी शामिल रहे। यह ऐसे समय में आया है जब गुरुवार को खड़गे के अचानक बेंगलुरु रवाना होने के बाद कैबिनेट विस्तार की प्रक्रिया रोक दी गई थी।
संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी
कैबिनेट विस्तार के साथ-साथ कांग्रेस कर्नाटक में संगठनात्मक पुनर्गठन की भी तैयारी कर रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, हाईकमान ने राज्यभर के सभी जिला कांग्रेस अध्यक्षों को बदलने का निर्णय लिया है। नियुक्तियाँ अंतिम रूप देने से पहले अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (AICC) के ऑब्जर्वर प्रत्येक जिले का दौरा कर फीडबैक लेंगे।
सूत्रों का कहना है कि नेतृत्व ने स्थानीय सत्ता-केंद्रों के दबाव में न आने का संकल्प लिया है और इसके बजाय वफादार पार्टी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की रणनीति अपनाई है। यह पहल बी.के. हरिप्रसाद के केपीसीसी अध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद शुरू की गई है। जिला अध्यक्षों के बाद उपाध्यक्षों और राज्य महासचिवों के पदों में भी बदलाव किए जाने की योजना है।
आगे क्या होगा
AICC महासचिव के.सी. वेणुगोपाल 26 जुलाई को बेंगलुरु का दौरा करेंगे और मुख्यमंत्री शिवकुमार तथा सिद्दारमैया के साथ बैठकें करेंगे। इन चर्चाओं में कैबिनेट विस्तार और संगठनात्मक बदलावों पर मुख्य रूप से विचार-विमर्श होने की उम्मीद है। आलोचकों का कहना है कि इस देरी से उम्मीदवारों में बेचैनी बढ़ रही है — इनमें से कई किसी घोषणा की आस में दिल्ली में डेरा जमाए बैठे थे। ये फैसले कर्नाटक में आगामी चुनावों से पहले कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।