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कर्नाटक कैबिनेट विस्तार: मुस्लिम नेताओं ने सलीम अहमद के लिए CM शिवकुमार से की पैरवी, 3-5 मंत्री पदों की मांग

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कर्नाटक कैबिनेट विस्तार: मुस्लिम नेताओं ने सलीम अहमद के लिए CM शिवकुमार से की पैरवी, 3-5 मंत्री पदों की मांग

सारांश

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार से पहले लॉबिंग का दौर चरम पर है। मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने CM शिवकुमार से सलीम अहमद को मंत्री पद देने की माँग की और समुदाय के लिए 3-5 पद सुनिश्चित करने का आग्रह किया। कित्तूर कर्नाटक में दो दशकों से मुस्लिम प्रतिनिधित्व का अभाव इस माँग की केंद्रीय वजह है।

मुख्य बातें

मुस्लिम धार्मिक नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने 22 जून 2026 को बेंगलुरु में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात कर एमएलसी सलीम अहमद को कैबिनेट में शामिल करने की माँग की।
समुदाय की माँग है कि कैबिनेट में कम से कम 3 से 5 मुस्लिम नेताओं को मंत्री पद दिया जाए।
कर्नाटक कैबिनेट में अभी 13 पद भरे हैं और 20 पद रिक्त हैं।
कित्तूर कर्नाटक क्षेत्र से लगभग दो दशकों से कोई मुस्लिम नेता कैबिनेट में नहीं रहा।
सलीम अहमद तीन बार एमएलसी रहे हैं और 50 वर्षों से कांग्रेस से जुड़े हैं।
कांग्रेस विधायक विजयानंद कशप्पनवर सहित अन्य नेताओं ने भी कैबिनेट में स्थान के लिए लॉबिंग की।

कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार की सरगर्मियों के बीच 22 जून 2026 को बेंगलुरु में लॉबिंग का दौर तेज हो गया, जब मुस्लिम धार्मिक नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात कर वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं एमएलसी सलीम अहमद को कैबिनेट में शामिल करने का आग्रह किया। प्रतिनिधिमंडल ने मुस्लिम समुदाय के लिए कम से कम तीन से पाँच मंत्री पद सुनिश्चित करने की भी माँग रखी।

मुख्य घटनाक्रम

फिलहाल कर्नाटक कैबिनेट में 13 पद भरे जा चुके हैं, जबकि शेष 20 रिक्त पदों पर आने वाले दिनों में निर्णय होने की उम्मीद है। ऑल कर्नाटक सुन्नी मशायख काउंसिल के संयोजक सैयद ताजुद्दीन खादरी ने पत्रकारों को बताया कि कित्तूर कर्नाटक क्षेत्र से किसी भी मुस्लिम नेता को लगभग दो दशकों से कैबिनेट में प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।

खादरी ने कहा, 'इस पृष्ठभूमि में, हमने सलीम अहमद के लिए मंत्री पद की माँग की है। वे तीन बार एमएलसी रहे हैं, लगभग 50 वर्षों से कांग्रेस से जुड़े हैं और उन्होंने पार्टी और समाज के लिए सराहनीय काम किया है।' प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री शिवकुमार को एक ज्ञापन सौंपा और इसी माँग को लेकर कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के सदस्य एवं पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से भी भेंट की।

समुदाय का पक्ष और ऐतिहासिक संदर्भ

प्रतिनिधिमंडल के सदस्य विजयपुरा के सैयद हैदर पाशा खादरी ने बताया कि सलीम अहमद उत्तरी कर्नाटक में सूफी संतों को समर्पित कई बड़े आयोजनों की रीढ़ रहे हैं, जिन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव और बसवन्ना की शिक्षाओं को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा, 'हम प्यार और सद्भाव का संदेश फैला रहे हैं। विभिन्न मठों के धार्मिक नेताओं और लाखों लोगों ने इन कार्यक्रमों में भाग लिया है।'

गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय एसएम कृष्णा के कार्यकाल में कैबिनेट में पाँच मुस्लिम नेताओं को शामिल किया गया था। खादरी ने इस ऐतिहासिक नज़ीर का हवाला देते हुए कहा कि उस दौर में डीके शिवकुमार भी कृष्णा के भरोसेमंद सहयोगी के रूप में प्रशासन में सक्रिय भूमिका निभाते थे।

अन्य दावेदारों की लॉबिंग

मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल के अलावा, कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक विजयानंद कशप्पनवर ने भी कैबिनेट में स्थान पाने का दावा पेश किया। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवकुमार से उनके बेंगलुरु आवास पर मुलाकात कर मंत्रियों की दूसरी सूची में अपने नाम पर विचार करने का आग्रह किया। प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद से भी भेंट कर ज्ञापन सौंपा।

असंतोष और समझौते की स्थिति

इस बीच, बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री केएच मुनियप्पा और परिवहन व मुजराई मंत्री रामलिंगा रेड्डी कथित तौर पर विभागों के बँटवारे को लेकर असंतोष जताने के बाद पार्टी आलाकमान के हस्तक्षेप से अपने मतभेद सुलझाते दिख रहे हैं।

आगे क्या होगा

असंतोष के शांत होने के साथ ही मुख्यमंत्री शिवकुमार कैबिनेट विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की स्थिति में हैं। यह विस्तार उनके नेतृत्व के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा माना जा रहा है, क्योंकि विभिन्न समुदायों, क्षेत्रों और वरिष्ठ नेताओं की आकांक्षाओं के बीच संतुलन बनाना कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कांग्रेस के लिए एक जटिल राजनीतिक समीकरण है। पार्टी को एक साथ कई मोर्चों पर संतुलन बनाना है — क्षेत्रीय दावेदार, जाति समीकरण और अब धार्मिक प्रतिनिधित्व। दो दशकों से कित्तूर कर्नाटक में मुस्लिम प्रतिनिधित्व का अभाव एक वास्तविक रिक्तता को दर्शाता है, जिसे नज़रअंदाज़ करना शिवकुमार के लिए राजनीतिक रूप से महंगा पड़ सकता है। लेकिन यह भी देखना होगा कि पार्टी आलाकमान विभागीय असंतोष और बाहरी दबाव के बीच किस हद तक सामुदायिक प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार में सलीम अहमद के लिए क्यों हो रही है पैरवी?
सलीम अहमद तीन बार एमएलसी रहे हैं और लगभग 50 वर्षों से कांग्रेस से जुड़े हैं। मुस्लिम धार्मिक नेताओं का तर्क है कि कित्तूर कर्नाटक क्षेत्र से दो दशकों से कोई मुस्लिम नेता कैबिनेट में नहीं रहा, इसलिए उनका नाम सबसे उपयुक्त है।
कर्नाटक कैबिनेट में अभी कितने पद खाली हैं?
कर्नाटक कैबिनेट में 13 पद भरे जा चुके हैं और 20 पद अभी रिक्त हैं। इन रिक्त पदों पर आने वाले दिनों में निर्णय होने की उम्मीद है।
मुस्लिम समुदाय कितने मंत्री पदों की माँग कर रहा है?
प्रतिनिधिमंडल ने मुस्लिम समुदाय के लिए कम से कम तीन से पाँच मंत्री पदों की माँग रखी है। हालाँकि, ऑल कर्नाटक सुन्नी मशायख काउंसिल के संयोजक सैयद ताजुद्दीन खादरी ने कहा कि अंतिम निर्णय पार्टी आलाकमान का होगा।
कर्नाटक कैबिनेट विस्तार में और किन नेताओं ने दावा ठोका है?
कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक विजयानंद कशप्पनवर ने भी मुख्यमंत्री शिवकुमार से उनके बेंगलुरु आवास पर मिलकर मंत्रियों की दूसरी सूची में अपने नाम पर विचार करने का आग्रह किया है।
कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार में देरी क्यों हो रही है?
कथित तौर पर विभागों के बँटवारे को लेकर कुछ मंत्रियों में असंतोष था, जिसके बाद पार्टी आलाकमान को हस्तक्षेप करना पड़ा। अब असंतोष शांत होने के साथ मुख्यमंत्री शिवकुमार विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की स्थिति में बताए जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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