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कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस में असंतोष, सीएम शिवकुमार ने कहा — 'धैर्य रखें'

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कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस में असंतोष, सीएम शिवकुमार ने कहा — 'धैर्य रखें'

सारांश

कर्नाटक में कांग्रेस का कैबिनेट विस्तार राहत नहीं, नई मुसीबत लेकर आया। 20 मंत्रियों की नियुक्ति के बाद बाहर रहे विधायकों में रायचूर से बेंगलुरु तक विरोध की लहर है। सीएम शिवकुमार ने अपना 2004 का अनुभव सुनाकर धैर्य की दुहाई दी — पर सवाल यह है कि पार्टी एकता कितने दिन टिकेगी।

मुख्य बातें

कांग्रेस आलाकमान ने 20 विधायकों को कर्नाटक कैबिनेट में मंत्री पद देने की मंजूरी दी।
मंत्री पद से वंचित विधायकों में विरोध-प्रदर्शन और इस्तीफे की धमकियाँ सामने आईं।
शिवकुमार ने 2004 का अपना अनुभव साझा करते हुए विधायकों से धैर्य रखने की अपील की।
छह बार के विधायक तनवीर सैत और पाँच बार के विधायक हम्पनागौड़ा बदारली समेत कई वरिष्ठ नेता कैबिनेट से बाहर रहे।
कोलार, चिक्कबल्लापुर, गडग और विजयनगर जिलों के विधायकों ने क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व न मिलने पर नाराजगी जताई।
असंतुष्ट विधायक मंगलवार को बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने सोमवार, 4 अगस्त 2025 को नाराज कांग्रेस विधायकों से संयम बनाए रखने की अपील की, जब कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के बाद राज्य के कई हिस्सों से विरोध-प्रदर्शन, इस्तीफे की धमकियाँ और व्यापक असंतोष की खबरें सामने आईं। कांग्रेस आलाकमान ने 20 विधायकों को मंत्री पद देने की मंजूरी दी, लेकिन दर्जनों वरिष्ठ और बहु-बार निर्वाचित विधायक मंत्रालय से बाहर रह गए।

मुख्यमंत्री की अपील और व्यक्तिगत अनुभव

बढ़ती नाराजगी पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवकुमार ने स्वीकार किया कि कई काबिल और वरिष्ठ नेताओं को मंत्रालय में जगह नहीं मिल पाई। उन्होंने पत्रकारों से कहा, 'मैं इससे इनकार नहीं करता। हालांकि, पार्टी को कई बातों को ध्यान में रखकर फैसले लेने होते हैं।'

शिवकुमार ने अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा, '2004 में मुझे कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया था। यहाँ तक कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कार्यकाल के दौरान भी मैं लंबे समय तक कैबिनेट से बाहर रहा। मैंने धैर्य बनाए रखा, और उसी धैर्य की वजह से आज मैं इस पद पर हूँ।' उन्होंने आश्वासन दिया कि पार्टी समय के साथ सभी के लिए अवसर बनाएगी।

असंतुष्ट विधायकों की नाराजगी

छह बार के विधायक तनवीर सैत, जिन्हें कैबिनेट में जगह नहीं मिली, ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं के समर्थन ने उन्हें भावुक कर दिया। उन्होंने कहा, 'जब से मुझ पर हमला हुआ है, पार्टी कार्यकर्ता मजबूती से मेरे साथ खड़े रहे हैं। वे मेरी ताकत हैं। मैं अपने समर्थकों से सलाह करने के बाद फैसला लूँगा।'

पाँच बार के विधायक हम्पनागौड़ा बदारली ने रायचूर जिले को प्रतिनिधित्व न मिलने पर निराशा जताई और कहा कि वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के बावजूद जिले को एक बार फिर नजरअंदाज किया गया।

बेंगलुरु के गोविंदराजनगर विधायक प्रिया कृष्णा को मंत्री पद न मिलने पर उनके समर्थकों ने विरोध-प्रदर्शन किया। गौरतलब है कि प्रिया कृष्णा और उनके पिता, वरिष्ठ कांग्रेस विधायक एम. कृष्णप्पा, दोनों मंत्री पद की दौड़ में थे — लेकिन दोनों को ही कैबिनेट से बाहर रखा गया।

क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का विवाद

कोलार और चिक्कबल्लापुर जिलों के विधायक मंत्रालय में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की कमी के मुद्दे पर चर्चा के लिए मंगलवार को बैठक करने वाले हैं। इसी तरह, गडग और विजयनगर जिलों के कांग्रेस विधायकों ने भी कैबिनेट गठन पर नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि बार-बार प्रतिनिधित्व की माँग के बावजूद उनके जिलों को नजरअंदाज किया गया।

कैबिनेट विस्तार की पृष्ठभूमि

कई महीनों की अटकलों और राजनीतिक सस्पेंस को खत्म करते हुए कांग्रेस आलाकमान ने सोमवार को आखिरकार कर्नाटक कैबिनेट विस्तार को हरी झंडी दी और 20 विधायकों को मंत्री पद दिया। यह विस्तार ऐसे समय में हुआ है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार को नेतृत्व और गठबंधन प्रबंधन को लेकर लगातार आंतरिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

आगे देखें तो असंतुष्ट विधायकों की प्रतिक्रिया और जिला-स्तरीय बैठकों के नतीजे तय करेंगे कि यह असंतोष संगठित विरोध का रूप लेता है या शिवकुमार की अपील काम आती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उन विधायकों को संतुष्ट नहीं करेगा जो क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की संरचनात्मक माँग कर रहे हैं। असली जोखिम यह है कि रायचूर, कोलार और गडग जैसे जिलों की नाराजगी अगर संगठित रूप ले ले, तो यह सरकार की स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार में कितने मंत्री शामिल किए गए?
कांग्रेस आलाकमान ने 20 विधायकों को कर्नाटक कैबिनेट में मंत्री पद देने की मंजूरी दी। यह विस्तार कई महीनों की अटकलों और राजनीतिक सस्पेंस के बाद सोमवार को हुआ।
सीएम शिवकुमार ने असंतुष्ट विधायकों से क्या कहा?
सीएम डी.के. शिवकुमार ने विधायकों से धैर्य रखने की अपील की और अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा किया कि 2004 में उन्हें भी कैबिनेट में जगह नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि पार्टी समय आने पर सभी के लिए अवसर बनाएगी।
तनवीर सैत और हम्पनागौड़ा बदारली ने क्या कहा?
छह बार के विधायक तनवीर सैत ने कहा कि वे समर्थकों से सलाह के बाद फैसला लेंगे। पाँच बार के विधायक हम्पनागौड़ा बदारली ने रायचूर जिले को प्रतिनिधित्व न मिलने पर निराशा जताई।
कौन-से जिलों में कैबिनेट विस्तार को लेकर सबसे अधिक नाराजगी है?
रायचूर, कोलार, चिक्कबल्लापुर, गडग और विजयनगर जिलों के विधायकों ने क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व न मिलने पर नाराजगी जताई है। कोलार और चिक्कबल्लापुर के विधायक मंगलवार को इस मुद्दे पर बैठक करने वाले हैं।
क्या यह असंतोष कर्नाटक सरकार की स्थिरता के लिए खतरा है?
अभी तक किसी विधायक ने औपचारिक इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन कई जिलों में एक साथ विरोध-प्रदर्शन और बैठकों की योजना चिंता का विषय है। सीएम शिवकुमार की अपील के बाद स्थिति पर नजर बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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