कर्नाटक कैबिनेट विभाग बंटवारे से पहले कांग्रेस मंत्रियों में लॉबिंग तेज़, CM शिवकुमार ने संभाला मोर्चा
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक में 7 अगस्त को विभागों के बंटवारे की उम्मीद के बीच कांग्रेस के नवनियुक्त मंत्रियों में अहम पोर्टफोलियो हासिल करने की होड़ तेज़ हो गई है। 3 अगस्त को 19 मंत्रियों की शपथ के बाद से विभागों का आवंटन लटका हुआ है, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष और लॉबिंग दोनों एक साथ बढ़े हैं। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार एक तरफ विभाग आवंटन का संतुलन बना रहे हैं, तो दूसरी तरफ कैबिनेट से बाहर रह गए विधायकों की नाराज़गी शांत करने में जुटे हैं।
किन विभागों के लिए है सबसे ज़्यादा दौड़
सूत्रों के अनुसार, वित्त, श्रम, समाज कल्याण, योजना और उच्च शिक्षा विभागों की सर्वाधिक माँग है। कई मंत्री अपनी पसंद सीधे पार्टी नेतृत्व तक पहुँचा चुके हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नवनियुक्त मंत्री बसवराज रायरेड्डी ने खुलकर वित्त विभाग में अपनी रुचि ज़ाहिर की। उन्होंने पत्रकारों से कहा, 'मैंने मुख्यमंत्री के वित्त सलाहकार के तौर पर काम किया है। पार्टी ने सभी की खूबियों को परखा होगा। अगर मुझे वित्त विभाग की ज़िम्मेदारी दी जाती है, तो मैं इसका स्वागत करूंगा। मेरी दिलचस्पी सिर्फ टैक्स कलेक्शन में है। मुख्यमंत्री को ही बजट तैयार करने और पेश करने दें। चपरासी से लेकर आईएएस अफसर तक किसी का भी तबादला करने का अधिकार मुख्यमंत्री अपने पास रख सकते हैं।'
रायरेड्डी ने यह भी जोड़ा कि यदि वित्त विभाग न मिले, तो वे योजना विभाग में काम करने के इच्छुक हैं। उन्होंने कहा, 'गोविंदराव कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने की ज़रूरत है और इसमें मेरी व्यक्तिगत दिलचस्पी है।'
वंचित समुदायों के प्रतिनिधियों की नज़र समाज कल्याण पर
हाल ही में शपथ लेने वाले पी. नरेंद्रस्वामी और शिवराज तंगदगी — दोनों वंचित समुदायों से — कथित तौर पर समाज कल्याण विभाग की माँग कर रहे हैं। वहीं, सात बार सांसद रहे और मौजूदा खाद्य व नागरिक आपूर्ति मंत्री के.एच. मुनियप्पा सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वे अपने वर्तमान विभाग से संतुष्ट नहीं हैं और किसी अहम पोर्टफोलियो की अपेक्षा रखते हैं।
CM के निर्देश के बावजूद बेंगलुरु में डटे मंत्री
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री शिवकुमार ने मंत्रियों को अपने ज़िलों में जाकर सूखे की स्थिति का जायज़ा लेने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके, दावणगेरे जिले के मंत्री के.एस. बसवंथप्पा और एस.एस. मल्लिकार्जुन नेतृत्व से बातचीत के लिए बेंगलुरु में ही रुके हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के कई हिस्सों में सूखे की स्थिति गंभीर बनी हुई है और ज़मीनी दौरों की दरकार है।
असंतुष्ट विधायकों की नाराज़गी: सरकार के लिए दोहरी चुनौती
विभाग आवंटन की यह कवायद उन विधायकों के बीच बढ़ते असंतोष के साए में हो रही है जिन्हें 3 अगस्त के विस्तार में कैबिनेट में जगह नहीं मिली। पार्टी सूत्रों के अनुसार, 40 विधायक विधानसभा सत्र के पहले दिन बैठक करने की योजना बना रहे हैं।
सात बार के विधायक टी.बी. जयचंद्र ने नई कैबिनेट को सार्वजनिक रूप से 'शर्म की बात' कहा था। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने विधानसभा में विपक्ष के साथ बैठने की व्यवस्था करने के लिए पत्र भेजने की धमकी भी दी है। स्थिति को भाँपते हुए मुख्यमंत्री शिवकुमार स्वयं जयचंद्र के घर जाने वाले हैं और पूर्व मंत्री एम.सी. सुधाकर से भी मुलाकात करने की उम्मीद है।
आगे क्या होगा
कांग्रेस नेतृत्व के सामने अब दोहरी परीक्षा है — क्षेत्रीय, जातीय और राजनीतिक समीकरणों को साधते हुए विभागों का न्यायसंगत वितरण करना और विधानसभा सत्र से पहले पार्टी की आंतरिक एकता बनाए रखना। यदि असंतोष समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो यह सत्र सरकार के लिए राजनीतिक रूप से असहज साबित हो सकता है।