कर्नाटक कैबिनेट विभाग बंटवारा: सीएम शिवकुमार ने राज्यपाल गहलोत को भेजी लिस्ट, मानसून सत्र से पहले फैसला
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बुधवार, 12 अगस्त को घोषणा की कि नए मंत्रियों के बीच विभागों के बंटवारे की सूची अंतिम रूप ले चुकी है और औपचारिक मंजूरी के लिए राज्यपाल थावरचंद गहलोत को भेज दी गई है। इस घोषणा से कर्नाटक कांग्रेस सरकार में कैबिनेट फेरबदल को लेकर चल रही अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है।
मुख्यमंत्री का बयान
बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत में शिवकुमार ने स्पष्ट किया, 'विभागों के बंटवारे की लिस्ट फाइनल हो गई है और मंजूरी के लिए गवर्नर के पास भेज दी गई है। मीडिया को कुछ घंटों में लिस्ट मिल जाएगी। कैबिनेट में कोई बदलाव नहीं हो रहा है।' यह बयान उस समय आया जब विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार से शुरू होने वाला था और विपक्ष देरी को राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में था।
मंत्रियों की लॉबिंग और दबाव
सूत्रों के अनुसार, नवनियुक्त मंत्रियों और वरिष्ठ मंत्रियों के बीच महत्वपूर्ण विभाग पाने के लिए जबरदस्त लॉबिंग चल रही थी। खाद्य मंत्री केएच मुनियप्पा कथित तौर पर सोशल वेलफेयर विभाग के इच्छुक बताए गए। वहीं, पूर्व सिद्दारमैया सरकार में मंत्री रहे जमीर अहमद खान, एन. चेलुवरयास्वामी, संतोष लाड, मधु बंगारप्पा और एस.एस. मल्लिकार्जुन अपने पुराने विभाग वापस पाने के लिए प्रयासरत थे।
नए मंत्रियों में के. शिवलिंगेगौड़ा, रिजवान अरशद, के.एस. बसंतप्पा, पी.एम. नरेंद्र स्वामी, एच.सी. बालकृष्ण और अजय सिंह भी अहम विभागों के लिए प्रयास कर रहे थे।
कांग्रेस हाईकमान की भूमिका
सूत्रों का कहना है कि विभागों के बंटवारे में कांग्रेस हाईकमान बारीकी से शामिल था और मुख्यमंत्री शिवकुमार पर दबाव था। शिवकुमार के कई बार दिल्ली दौरे के बावजूद बुधवार तक अंतिम बंटवारा लंबित रहा, जो इस प्रक्रिया की जटिलता को दर्शाता है। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पर पहले से ही गारंटी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मानसून सत्र और राजनीतिक दांव
गौरतलब है कि गुरुवार से शुरू होने वाले कर्नाटक विधानसभा मानसून सत्र से ठीक पहले यह विलंब राजनीतिक रूप से संवेदनशील था। आलोचकों का कहना है कि विपक्ष इस देरी को सरकार की अंदरूनी खींचतान के प्रमाण के रूप में पेश करने की कोशिश कर सकता है। अब जब राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद औपचारिक घोषणा अपेक्षित है, सरकार इस मुद्दे को सत्र से पहले सुलझाने में सफल रही।
आगे क्या
राज्यपाल थावरचंद गहलोत की मंजूरी के बाद विभागों की आधिकारिक सूची जारी होने की उम्मीद है। विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने से पहले यह कदम कांग्रेस सरकार के लिए राजनीतिक रूप से राहत देने वाला है, हालांकि सत्र के दौरान विपक्ष की रणनीति पर सबकी नजरें रहेंगी।