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ईडी छापों के बाद सीएम डीके शिवकुमार की आबकारी अधिकारियों को कड़ी चेतावनी, तबादले का कानून बनाने का ऐलान

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ईडी छापों के बाद सीएम डीके शिवकुमार की आबकारी अधिकारियों को कड़ी चेतावनी, तबादले का कानून बनाने का ऐलान

सारांश

ईडी के 'संगठित रिश्वत गिरोह' के आरोपों के ठीक एक दिन बाद सीएम शिवकुमार ने विधान सौधा में आबकारी अधिकारियों को सीधे चेतावनी दी — सरकार की बदनामी बर्दाश्त नहीं होगी, और जरूरत पड़ी तो तबादले के लिए कानून बदला जाएगा।

मुख्य बातें

शिवकुमार ने विधान सौधा, बेंगलुरु में आबकारी विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 26 जून को छापेमारी के बाद आरोप लगाया कि विभाग 'संगठित रिश्वत गिरोह' की तरह काम कर रहा था।
सीएम ने कहा — जरूरत पड़ी तो आबकारी अधिकारियों के अन्य विभागों में तबादले के लिए कानूनी बदलाव किए जाएंगे।
विभाग में 574 नए लाइसेंस ई-नीलामी के जरिए जारी करने का फैसला; नवीनीकरण शुल्क दो किस्तों में जमा करने की सुविधा।
एआईबी प्रणाली लागू होने के बाद विभाग में उम्मीद के मुताबिक प्रगति होने का दावा।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 27 जून 2025 को विधान सौधा, बेंगलुरु में आबकारी विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी कि सरकार की छवि को नुकसान पहुँचाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो ऐसा कानूनी बदलाव किया जाएगा, जिससे आबकारी विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों का अन्य विभागों में भी तबादला संभव हो सके।

ईडी की कार्रवाई की पृष्ठभूमि

यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 26 जून को राज्यभर में छापेमारी के बाद आरोप लगाया कि कर्नाटक का आबकारी विभाग रिश्वत वसूली के लिए एक संगठित गिरोह की तरह संचालित हो रहा था। ईडी के अनुसार, इस गिरोह में सरकारी अधिकारी, उनके सहयोगी और कुछ निजी व्यक्ति शामिल थे। गौरतलब है कि यह कार्रवाई कर्नाटक सरकार के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षण में हुई है।

मुख्यमंत्री के निर्देश और चेतावनी

मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को सीधे संबोधित करते हुए कहा, 'अगर आप सम्मान के साथ काम करेंगे तो सरकार की प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी। अगर आप ऐसा कोई काम करेंगे, जिससे सरकार की छवि खराब हो, तो हम चुपचाप नहीं बैठेंगे।' उन्होंने जोड़ा कि यह मत सोचिए कि आबकारी विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों का दूसरे विभागों में तबादला नहीं किया जा सकता — जरूरत पड़ी तो इसके लिए जरूरी कानूनी बदलाव भी किए जाएंगे।

शिवकुमार ने यह भी कहा, 'मैं किसी भी ऐसे व्यक्ति या कोशिश को बर्दाश्त नहीं करूंगा, जिससे सरकार की बदनामी हो। ऐसा पेशेवर रवैया अपनाइए, जिससे सरकार की साख बढ़े। अन्यथा सख्त कार्रवाई करना जरूरी हो जाएगा।'

विभागीय सुधार और नई घोषणाएँ

बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि विभाग में एआईबी प्रणाली लागू होने के बाद उम्मीद के मुताबिक प्रगति हुई है। उन्होंने घोषणा की कि 574 नए लाइसेंस ई-नीलामी के जरिए जारी करने का फैसला लिया गया है और लाइसेंस नवीनीकरण शुल्क दो किस्तों में जमा करने की सुविधा भी दी जाएगी। उन्होंने पड़ोसी राज्यों के आबकारी विभागों का उदाहरण देते हुए कहा कि कर्नाटक को अपने तय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ईमानदारी से काम करना होगा।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

ईडी की इस कार्रवाई ने कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के लिए विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को हमले का मौका दे दिया है। आलोचकों का कहना है कि मुख्यमंत्री की यह चेतावनी ईडी के आरोपों के बाद नुकसान-नियंत्रण की कोशिश है। सरकार की विश्वसनीयता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अधिकारियों के विरुद्ध कितनी तेजी और पारदर्शिता से कार्रवाई करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राजनीतिक आग हैं — और शिवकुमार की यह चेतावनी उसी आग को बुझाने की कोशिश दिखती है। सवाल यह है कि क्या तबादले की धमकी और 574 लाइसेंसों की ई-नीलामी जैसे सुधार उस विश्वसनीयता संकट को दूर कर पाएंगे, जो ईडी की कार्रवाई ने खड़ा किया है। मुख्यधारा की कवरेज मुख्यमंत्री के बयान पर केंद्रित है, लेकिन असली सवाल यह है कि ईडी के नामित अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई कब और कैसे होगी। बिना ठोस जवाबदेही के, यह चेतावनी भी उन तमाम सरकारी फटकारों की सूची में जुड़ जाएगी जो सुर्खियों से आगे नहीं जा पातीं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएम डीके शिवकुमार ने आबकारी अधिकारियों को चेतावनी क्यों दी?
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा 26 जून को राज्यभर में छापेमारी के बाद यह आरोप लगाया गया कि कर्नाटक का आबकारी विभाग रिश्वत वसूली के लिए एक संगठित गिरोह की तरह काम कर रहा था। इसके बाद सीएम शिवकुमार ने विधान सौधा में समीक्षा बैठक बुलाकर अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी।
ईडी ने कर्नाटक आबकारी विभाग पर क्या आरोप लगाए हैं?
ईडी ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक का आबकारी विभाग रिश्वत वसूली के लिए एक संगठित गिरोह की तरह काम कर रहा था, जिसमें सरकारी अधिकारी, उनके सहयोगी और कुछ निजी व्यक्ति शामिल थे। यह आरोप राज्यभर में की गई छापेमारी के बाद लगाए गए।
आबकारी अधिकारियों के तबादले के लिए कानून बदलने का क्या मतलब है?
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो ऐसा कानूनी बदलाव किया जाएगा जिससे आबकारी विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों का अन्य विभागों में भी तबादला किया जा सके। फिलहाल विभागीय नियमों के कारण ऐसे तबादले सीमित माने जाते हैं।
आबकारी विभाग में 574 नए लाइसेंस का फैसला क्या है?
समीक्षा बैठक में घोषणा की गई कि 574 नए लाइसेंस ई-नीलामी के जरिए जारी किए जाएंगे। साथ ही लाइसेंस नवीनीकरण शुल्क दो किस्तों में जमा करने की सुविधा भी दी जाएगी।
इस मामले का कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर क्या राजनीतिक असर होगा?
ईडी की कार्रवाई ने विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार पर हमले का मौका दिया है। आलोचकों का कहना है कि मुख्यमंत्री की चेतावनी ईडी के आरोपों के बाद नुकसान-नियंत्रण की कोशिश है, और सरकार की विश्वसनीयता अब ठोस कार्रवाई पर निर्भर करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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