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कर्नाटक कैबिनेट विस्तार: शिवकुमार-सिद्दारमैया दिल्ली में, 20 खाली पदों पर जल्द होगा फैसला

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कर्नाटक कैबिनेट विस्तार: शिवकुमार-सिद्दारमैया दिल्ली में, 20 खाली पदों पर जल्द होगा फैसला

सारांश

सात सप्ताह की देरी के बाद कर्नाटक कैबिनेट विस्तार अब निर्णायक मोड़ पर है। शिवकुमार, सिद्दारमैया और हरिप्रसाद दिल्ली में हाईकमान से मिल रहे हैं। 20 रिक्त मंत्री पद, जाति-समुदाय संतुलन और युवा नेताओं की दावेदारी — यह विस्तार कांग्रेस की कर्नाटक रणनीति की असली परीक्षा है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार , पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और KPCC अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद कांग्रेस हाईकमान से मुलाकात के लिए नई दिल्ली पहुँचे।
कर्नाटक में 3 जून 2025 से मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद से कैबिनेट विस्तार लंबित है; 20 मंत्री पद अभी भी रिक्त हैं।
परमेश्वर ने कहा — हाईकमान की मंजूरी के बाद राज्यपाल से समय लेकर शपथ ग्रहण कराया जाएगा।
मंत्री पद की दौड़ में टीबी जयचंद्र , लक्ष्मी हेब्बालकर , रिजवान अरशद , शरत बच्छे गौड़ा सहित दर्जनों नेताओं के नाम चर्चा में।
अल्पसंख्यक समुदाय से तीन और महिला नेताओं को भी प्रतिनिधित्व देने पर विचार।
सूत्रों के अनुसार इसी सप्ताह के अंत तक शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हो सकता है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के सदस्य सिद्दारमैया और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद 22 जुलाई 2025 को नई दिल्ली पहुँचे, जहाँ कांग्रेस हाईकमान के साथ निर्णायक बैठकों के बाद लंबे समय से लंबित कैबिनेट विस्तार पर अंतिम मुहर लगने की संभावना है। राज्य में 20 मंत्री पद अभी भी रिक्त हैं, जो विपक्ष के लिए लगातार निशाने का विषय बने हुए हैं।

दिल्ली में मंथन का दौर

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, डीके शिवकुमार फिलहाल दिल्ली में ही रुकेंगे और कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ बैठकों की श्रृंखला में भाग लेंगे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नए मंत्रियों की सूची को इन्हीं बैठकों में अंतिम रूप दिया जाएगा। माना जा रहा है कि बुधवार तक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और इसी सप्ताह के अंत तक शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है।

गौरतलब है कि 3 जून 2025 को मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद से ही कैबिनेट विस्तार लंबित चला आ रहा है — यानी यह प्रक्रिया सात सप्ताह से अधिक समय से अधर में है। इस देरी ने न केवल विपक्ष को हमले का मौका दिया है, बल्कि पार्टी के भीतर भी दावेदारों की बेचैनी बढ़ाई है।

उपमुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत में उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि कांग्रेस हाईकमान की स्वीकृति मिलते ही कैबिनेट विस्तार तत्काल प्रभाव से किया जाएगा। उन्होंने कहा, "राज्य के नेता दिल्ली गए हैं। सूची को मंजूरी मिलने के बाद राज्यपाल से समय लिया जाएगा और उसके बाद नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा।"

परमेश्वर ने यह भी संकेत दिया कि इस बार कांग्रेस नेतृत्व युवा नेताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने की अपनी परंपरागत नीति पर इस बार भी कायम रह सकती है।

मंत्री पद के प्रमुख दावेदार

सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट में जगह पाने की दौड़ में कई वरिष्ठ और युवा नेता सक्रिय हैं। वरिष्ठ नेताओं में टीबी जयचंद्र, एचसी बालकृष्ण, शिवलिंगे गौड़ा, एन. चेलुवरायस्वामी, गुब्बी वासु, अशोक पटन, लक्ष्मण सावदी, बसवराज रायारेड्डी, विजयानंद काशप्पनावर, अप्पाजी नाडागौड़ा, हम्पाना गौड़ा बदरली और लक्ष्मी हेब्बालकर के नाम चर्चा में हैं। युवा नेताओं में शरत बच्छे गौड़ा का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।

अल्पसंख्यक समुदाय से रिजवान अरशद, जमीर अहमद खान, तनवीर सैत, सलीम अहमद और कनीज फातिमा के नाम सामने आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, विस्तारित मंत्रिमंडल में अल्पसंख्यक समुदाय से तीन नेताओं को प्रतिनिधित्व मिल सकता है।

महिला नेताओं में आरती कृष्णा, कनीज फातिमा, लक्ष्मी हेब्बालकर, उमाश्री और नयना मोटम्मा के नामों पर विचार हो रहा है। सामाजिक संतुलन के लिहाज से एएस पोनन्ना (कोडावा समुदाय), एचसी महादेवप्पा, रघु मूर्ति और कम्पली गणेश के नाम भी सूची में शामिल बताए जा रहे हैं।

वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और संवैधानिक पद

वरिष्ठ नेताओं दिनेश गुंडू राव, आर.वी. देशपांडे और एचके पाटिल को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपे जाने की संभावना जताई जा रही है। इनमें से कुछ नेताओं को विधानसभा अध्यक्ष जैसे संवैधानिक पदों पर नियुक्त किए जाने की भी चर्चा है।

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर)JD(S) — लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि 20 रिक्त मंत्री पदों के कारण राज्य प्रशासन प्रभावित हो रहा है और सरकारी निर्णय प्रक्रिया धीमी पड़ी है। कांग्रेस हाईकमान के लिए यह विस्तार जितनी जल्दी हो, उतना ही राजनीतिक दबाव कम होगा।

आगे क्या होगा

सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में बैठकों के बाद अंतिम सूची को हाईकमान की मंजूरी मिलते ही कर्नाटक के राज्यपाल से शपथ ग्रहण के लिए समय माँगा जाएगा। यदि सब कुछ तय समय पर रहा, तो इस सप्ताह के अंत तक नए मंत्री शपथ ले सकते हैं। इस विस्तार से राज्य सरकार की प्रशासनिक क्षमता मज़बूत होने और विपक्ष के एक प्रमुख हमले का जवाब मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजनीतिक है — जाति समीकरण, क्षेत्रीय संतुलन और वरिष्ठ बनाम युवा नेतृत्व की खींचतान ने हाईकमान को सावधानी से चलने पर मजबूर किया है। 20 रिक्त पदों के साथ सरकार चलाना विपक्ष को मुफ्त में हथियार देना है, और कांग्रेस यह जानती है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या विस्तार के बाद मंत्रिमंडल में दावेदारों का संतुलन 2028 के विधानसभा चुनाव की नींव बन पाता है — या यह केवल अंदरूनी दबाव प्रबंधन का अभ्यास बनकर रह जाता है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार कब होगा?
सूत्रों के अनुसार दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान की मंजूरी के बाद इसी सप्ताह के अंत तक शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने पुष्टि की है कि सूची स्वीकृत होते ही राज्यपाल से समय माँगा जाएगा।
कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार इतने समय से क्यों लंबित है?
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 3 जून 2025 को पद संभाला था, लेकिन जाति-समुदाय संतुलन, वरिष्ठ और युवा नेताओं के बीच प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय दावेदारी को लेकर सहमति बनाने में सात सप्ताह से अधिक का समय लग गया। 20 मंत्री पद अभी भी रिक्त हैं।
कर्नाटक कैबिनेट में मंत्री पद के प्रमुख दावेदार कौन हैं?
सूत्रों के अनुसार टीबी जयचंद्र, एचसी बालकृष्ण, लक्ष्मी हेब्बालकर, शरत बच्छे गौड़ा, रिजवान अरशद, जमीर अहमद खान, नयना मोटम्मा और दिनेश गुंडू राव सहित कई नेताओं के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। अल्पसंख्यक और महिला नेताओं को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की योजना है।
कर्नाटक कैबिनेट विस्तार में अल्पसंख्यक समुदाय को कितनी जगह मिलेगी?
पार्टी सूत्रों के अनुसार विस्तारित मंत्रिमंडल में अल्पसंख्यक समुदाय से तीन नेताओं को स्थान मिल सकता है। रिजवान अरशद, जमीर अहमद खान, तनवीर सैत, सलीम अहमद और कनीज फातिमा के नाम इस श्रेणी में सबसे आगे बताए जा रहे हैं।
कर्नाटक में 20 रिक्त मंत्री पदों का क्या असर हो रहा है?
विपक्षी BJP और JD(S) लगातार इस मुद्दे पर कांग्रेस सरकार को घेर रही हैं। उनका कहना है कि रिक्त पदों के कारण राज्य प्रशासन और नीतिगत निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। कैबिनेट विस्तार से सरकार की प्रशासनिक क्षमता मज़बूत होने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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