कर्नाटक कैबिनेट विस्तार से कांग्रेस में विद्रोह: जयचंद्र बोले — 'सीनियर नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक में बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार के बाद 3 अगस्त 2026 को सत्ताधारी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया। कई वरिष्ठ नेताओं ने मंत्री पद से वंचित रहने पर तीखी नाराजगी जताई, इस्तीफे हुए और समर्थकों ने सड़कें जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। बेंगलुरु से लेकर बेलागवी तक पार्टी के भीतर बढ़ती बेचैनी ने राज्य सरकार के लिए नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।
जयचंद्र की खुली नाराजगी
नई दिल्ली में कर्नाटक सरकार के विशेष प्रतिनिधि और सात बार के विधायक टीबी जयचंद्र ने कैबिनेट में जगह न मिलने पर सार्वजनिक रूप से निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता कि सीनियर नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है या ईमानदार नेताओं को। मैं समझ नहीं पा रहा हूं। मैं दुखी हूं।'
जयचंद्र ने मंत्रियों के चयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि सूची देखकर उन्हें हैरानी होती है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके समर्थक और समुदाय के लोग अब उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और आगे की कार्रवाई तय करने से पहले वे अपने समर्थकों से परामर्श लेंगे। असंतुष्ट नेताओं और समर्थकों की एक बैठक जयचंद्र के आवास पर आयोजित हुई, जो पार्टी के भीतर बढ़ते तनाव का स्पष्ट संकेत है।
इस्तीफों का सिलसिला
होसादुर्गा के विधायक बीजी गोविंदप्पा ने कैबिनेट विस्तार के विरोध में कर्नाटक खाद्य और नागरिक आपूर्ति निगम से इस्तीफा दे दिया। इसी तरह, कर्नाटक सोप्स एंड डिटर्जेंट्स लिमिटेड (KSDL) के चेयरमैन और वरिष्ठ विधायक अप्पाजी नाडागौडा ने भी अपने पद से इस्तीफा दिया।
नाडागौडा ने कहा, 'मुझे दुख है। कांग्रेस पार्टी में ऐसा नहीं होना चाहिए। यह माहौल पार्टी के लिए अच्छा नहीं है।' उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उनके काम को पहचाना था और उन्हें मंत्री बनाया था, लेकिन अफसोस जताया कि अब 'स्वार्थी राजनीति' की वजह से समर्पित नेताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
बेलागवी में सड़क जाम, हेब्बालकर समर्थकों का विरोध
पूर्व मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर को कैबिनेट में शामिल न किए जाने के बाद उनके समर्थकों ने बेलागवी में बेंगलुरु-पुणे हाईवे जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने अपनी नेता के लिए न्याय की मांग की। यह घटना दर्शाती है कि विस्तार को लेकर नाराजगी केवल विधायकों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं तक भी पहुंच चुकी है।
पार्टी अनुशासन पर सवाल
जयचंद्र ने खुलकर कहा कि पार्टी में कोई अनुशासन नहीं है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस कर्नाटक में अपनी सरकार को स्थिर दिखाने की कोशिश कर रही है। आलोचकों का कहना है कि कैबिनेट विस्तार में वरिष्ठता और वफादारी को दरकिनार कर अन्य समीकरणों को प्राथमिकता दी गई, जिससे पार्टी के भीतर दरारें और गहरी हो सकती हैं।
आगे क्या होगा
जयचंद्र ने संकेत दिया कि वे अपने समर्थकों से परामर्श के बाद अगला कदम तय करेंगे, जिससे आगे और राजनीतिक उठापटक की संभावना बनी हुई है। पार्टी नेतृत्व पर दबाव होगा कि वह असंतुष्ट नेताओं को मनाए और आंतरिक एकता बहाल करे, अन्यथा यह असंतोष भविष्य में सरकार की स्थिरता के लिए चुनौती बन सकता है।