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कर्नाटक कैबिनेट विस्तार विवाद: मंत्री यतींद्र ने पिता सिद्धारमैया का बचाव किया, अहिंदा नेताओं में असंतोष बरकरार

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कर्नाटक कैबिनेट विस्तार विवाद: मंत्री यतींद्र ने पिता सिद्धारमैया का बचाव किया, अहिंदा नेताओं में असंतोष बरकरार

सारांश

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार को लेकर कांग्रेस में अंदरूनी तनाव उभरा है। मंत्री यतींद्र ने पिता सिद्धारमैया का बचाव किया, लेकिन अहिंदा गुट के विधायक नाराज हैं और महादेवप्पा दिल्ली में आलाकमान से मिलने पहुँचे — यह विवाद कर्नाटक कांग्रेस की आंतरिक एकता की परीक्षा बन गया है।

मुख्य बातें

मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया ने 6 अगस्त को मैसूर में पत्रकारों से कहा कि सिद्धारमैया ने कैबिनेट के लिए एच.सी.
महादेवप्पा समेत कई नामों की सिफारिश की थी।
कांग्रेस आलाकमान ने महादेवप्पा की जगह नरेंद्र स्वामी को नया चेहरा बनाने का फैसला किया।
यतींद्र के अनुसार, कुरुबा समुदाय की नाराज़गी को देखते हुए उन्हें कैबिनेट में शामिल किया गया।
पूर्व मंत्री एचसी महादेवप्पा पार्टी राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात के लिए नई दिल्ली रवाना हुए।
अहिंदा गुट के विधायकों में कैबिनेट चयन प्रक्रिया को लेकर असंतोष बना हुआ है।

कर्नाटक के शहरी विकास मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया ने गुरुवार, 6 अगस्त को मैसूर में पत्रकारों से बात करते हुए अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का खुलकर बचाव किया। उन पर यह आरोप लगाए जा रहे थे कि हालिया कैबिनेट विस्तार के दौरान उन्होंने अपने वफादार 'अहिंदा' नेताओं के लिए मंत्रिमंडल में स्थान सुनिश्चित करने की पर्याप्त कोशिश नहीं की।

यतींद्र का पक्ष: सिफारिशें की थीं, फैसला आलाकमान का

यतींद्र ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य सिद्धारमैया ने मंत्रिमंडल के लिए सुझाए गए नामों की सूची में पूर्व मंत्री एच.सी. महादेवप्पा समेत कई वरिष्ठ नेताओं के नाम शामिल किए थे। उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय कांग्रेस आलाकमान ने कई कारकों पर विचार करने के बाद लिया, जिसमें महादेवप्पा की जगह नरेंद्र स्वामी को नया चेहरा बनाया गया।

यतींद्र ने कहा, 'पार्टी हाईकमान ने एच.सी. महादेवप्पा और तनवीर सैत जैसे वरिष्ठ नेताओं से पहले ही बात कर ली है और उन्हें इस फैसले के पीछे की वजहें बता दी हैं।'

कुरुबा समुदाय की नाराज़गी और यतींद्र का मंत्रिमंडल में प्रवेश

यतींद्र ने यह भी बताया कि सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद कुरुबा समुदाय में असंतोष उभरा था, और इसी भावना को ध्यान में रखते हुए उन्हें कैबिनेट में शामिल किया गया। उन्होंने कहा, 'सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद कुरुबा समुदाय नाराज था। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए मुझे कैबिनेट में मौका दिया गया है।'

महादेवप्पा की दिल्ली यात्रा और पार्टी में उथल-पुथल

सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री एचसी महादेवप्पा गुरुवार को नई दिल्ली रवाना हुए और उनके पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात करने की उम्मीद है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कैबिनेट विस्तार को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें आ रही हैं।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, कुछ विधायकों का मानना है कि सिद्धारमैया ने केवल चुनिंदा नामों की सिफारिश की, जबकि उनके कई करीबी सहयोगियों और वफादारों को अंतिम सूची में जगह नहीं मिली। गौरतलब है कि महादेवप्पा ने पहले कई मुद्दों पर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से सार्वजनिक रूप से असहमति जताई थी और सिद्धारमैया के कार्यकाल के दौरान अतिरिक्त डिप्टी सीएम पद बनाने की वकालत भी की थी।

मैसूर दौरा और जिला प्रभारी की जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के निर्देश पर राज्य सरकार की सूखा-आकलन प्रक्रिया के तहत यतींद्र ने मैसूर का दौरा किया। उन्होंने उरुलिंगा पेड्डी मठ और सुत्तूर मठ का दौरा कर संतों का आशीर्वाद लिया। यतींद्र ने बताया कि पहले वे अस्थायी आधार पर मैसूरु जिला प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, और अब आधिकारिक तौर पर जिला प्रभारी मंत्री नियुक्त होने के बाद यह दौरा किया।

अहिंदा गुट में असंतोष: आगे क्या

कैबिनेट विस्तार से 'अहिंदा' गुट से जुड़े विधायकों में असंतोष बना हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, वे चयन प्रक्रिया से नाखुश हैं और मानते हैं कि सिद्धारमैया ने पार्टी आलाकमान के सामने उनकी दावेदारी को मजबूती से नहीं रखा। महादेवप्पा की दिल्ली यात्रा और राष्ट्रीय नेतृत्व से संभावित मुलाकात यह संकेत देती है कि यह आंतरिक विवाद जल्द थमने वाला नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या कांग्रेस आलाकमान ने अहिंदा गुट की सामाजिक राजनीति की अनदेखी कर एक बड़ा जोखिम मोल लिया है। महादेवप्पा जैसे वरिष्ठ नेता का दिल्ली कूच यह दर्शाता है कि असंतोष महज़ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक कांग्रेस पहले से ही सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच अंदरूनी खींचतान से जूझ रही है। बिना ठोस सुलह के, यह दरार 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के लिए एक कमज़ोर कड़ी बन सकती है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार में अहिंदा नेताओं का विवाद क्या है?
हालिया कैबिनेट विस्तार में 'अहिंदा' गुट के कई वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली, जिससे इन नेताओं में असंतोष है। आरोप है कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आलाकमान के सामने उनके नाम पुरज़ोर तरीके से नहीं रखे, हालाँकि यतींद्र ने इसे खारिज किया है।
यतींद्र सिद्धारमैया ने अपने पिता का बचाव कैसे किया?
यतींद्र ने कहा कि सिद्धारमैया ने एच.सी. महादेवप्पा समेत कई वरिष्ठ नेताओं के नाम कैबिनेट सूची में शामिल किए थे, लेकिन अंतिम फैसला कांग्रेस आलाकमान ने लिया। उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी हाईकमान ने महादेवप्पा और तनवीर सैत से इस निर्णय के कारण साझा किए हैं।
एचसी महादेवप्पा दिल्ली क्यों गए?
सूत्रों के अनुसार, पूर्व मंत्री एचसी महादेवप्पा 6 अगस्त को नई दिल्ली रवाना हुए और उनके कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात करने की उम्मीद है। यह दौरा कैबिनेट विस्तार में उन्हें शामिल न किए जाने पर उनकी नाराज़गी के संदर्भ में देखा जा रहा है।
यतींद्र को कैबिनेट में क्यों शामिल किया गया?
यतींद्र के अनुसार, सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद कुरुबा समुदाय में नाराज़गी थी और इसी को देखते हुए उन्हें मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया। वे पहले अस्थायी रूप से मैसूरु जिला प्रभारी थे और अब आधिकारिक रूप से जिला प्रभारी मंत्री नियुक्त हुए हैं।
कर्नाटक कांग्रेस में अहिंदा गुट कौन है और इसका महत्व क्यों है?
'अहिंदा' कन्नड़ का संक्षिप्त रूप है जो अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों और दलितों के गठजोड़ को दर्शाता है। कर्नाटक में यह गुट कांग्रेस का एक महत्वपूर्ण वोट आधार है और सिद्धारमैया की राजनीतिक पहचान का केंद्र रहा है। इस गुट में असंतोष पार्टी के चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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