24 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जामिया में विवादित नारों पर VHP का हमला: विनोद बंसल की माँग — दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जामिया में विवादित नारों पर VHP का हमला: विनोद बंसल की माँग — दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई

सारांश

जामिया परिसर में 'फ्री कश्मीर' और शरजील इमाम के समर्थन में कथित तौर पर लिखे नारों पर VHP का पलटवार — विनोद बंसल ने सख्त कार्रवाई माँगी और सोनिया, राहुल, प्रियंका व खड़गे से सीधे जवाब माँगा। यह मामला परिसर की स्वायत्तता बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा की बहस को फिर केंद्र में ले आया है।

मुख्य बातें

VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने 23 अक्टूबर 2026 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में विवादित नारों की निंदा की।
कथित नारों में 'फ्री कश्मीर' , 'गो बैक आरएसएस' और शरजील इमाम के समर्थन में लिखे गए संदेश शामिल बताए गए हैं।
बंसल ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जिम्मेदार लोगों की पहचान कर तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की माँग की।
कांग्रेस और इंडिया गठबंधन पर शरजील इमाम को राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप लगाया गया।
सोनिया गांधी , राहुल गांधी , प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से स्पष्टीकरण और माफी माँगी गई।

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने 23 अक्टूबर 2026 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय परिसर में कथित तौर पर लिखे गए विवादित नारों की कड़े शब्दों में निंदा की और विश्वविद्यालय प्रशासन से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की माँग की। बंसल ने साथ ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और इंडिया गठबंधन के नेताओं पर जेल में बंद शरजील इमाम को राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप लगाया।

मुख्य घटनाक्रम

बंसल के अनुसार, नई दिल्ली स्थित इस केंद्रीय विश्वविद्यालय के परिसर में 'फ्री कश्मीर', 'गो बैक आरएसएस' और 'गो बैक वीसी' जैसे नारे कथित तौर पर लिखे गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा, तथा महज नारेबाजी से किसी को पद से नहीं हटाया जा सकता।

VHP प्रवक्ता ने कहा कि पिछले कई वर्षों से जामिया मिल्लिया इस्लामिया की संस्थागत छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिशें होती रही हैं और यह हालिया घटना उसी कड़ी में एक और उदाहरण है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया कि ऐसे तत्वों की पहचान कर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएँ।

शरजील इमाम प्रकरण और राजनीतिक आरोप

बंसल ने आरोप लगाया कि जेल में बंद शरजील इमाम के समर्थन में परिसर में नारे लिखे गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी आरोपी का लगातार महिमामंडन करना 'दुर्भाग्यपूर्ण' है। उनका यह भी आरोप था कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के नेता ऐसे व्यक्तियों को राजनीतिक संरक्षण और समर्थन प्रदान कर रहे हैं।

गौरतलब है कि शरजील इमाम पर 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में गंभीर आरोप हैं और वह न्यायिक हिरासत में हैं। इस संदर्भ में VHP की यह प्रतिक्रिया राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।

कांग्रेस नेतृत्व से जवाब की माँग

VHP प्रवक्ता ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से सीधे सवाल किया कि क्या वे अपने नेताओं के कथित बयानों से सहमत हैं। बंसल ने कांग्रेस से इस मामले में अपना स्पष्ट रुख सामने रखने और सार्वजनिक रूप से माफी माँगने की माँग की।

उन्होंने कहा कि भारत के संविधान, लोकतंत्र और न्याय-व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़े करने वाली किसी भी गतिविधि को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब विश्वविद्यालय परिसरों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है।

विश्वविद्यालय प्रशासन से अपेक्षाएँ

बंसल ने विश्वविद्यालय प्रशासन से माँग की कि परिसर में अनुशासन बनाए रखने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाए जाएँ। आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार की माँगें शैक्षणिक स्वायत्तता और परिसर में विमर्श की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती हैं। हालाँकि, VHP का पक्ष है कि 'देशविरोधी मानसिकता' और वैध असहमति में अंतर किया जाना आवश्यक है।

इस पूरे मामले पर जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन या कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इस विवाद के और गहराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक सुस्थापित राजनीतिक प्रतिमान का हिस्सा दिखती है — जिसमें विश्वविद्यालय परिसर राष्ट्रवाद बनाम नागरिक स्वतंत्रता की बड़ी लड़ाई का अखाड़ा बन जाते हैं। जामिया 2019-20 से ही इस तरह की घटनाओं का केंद्र रहा है, और हर बार कार्रवाई की माँग और प्रति-आरोपों का वही चक्र दोहराता है। असली सवाल यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन किस हद तक स्वायत्त रहकर अनुशासन और अभिव्यक्ति के बीच संतुलन बना सकता है — और क्या राजनीतिक दबाव उस संतुलन को बिगाड़ रहा है। कांग्रेस से माफी माँगने की VHP की माँग न्यायिक या प्रशासनिक कदम से अधिक, चुनावी ध्रुवीकरण की रणनीति लगती है।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में किस तरह के नारे लिखे गए बताए जा रहे हैं?
विश्व हिंदू परिषद के अनुसार परिसर में 'फ्री कश्मीर', 'गो बैक आरएसएस', 'गो बैक वीसी' और जेल में बंद शरजील इमाम के समर्थन में नारे कथित तौर पर लिखे गए हैं। इन नारों की अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन सामने नहीं आया है।
VHP ने इस मामले में क्या माँगें रखी हैं?
VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की माँग की है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन से इस मामले में अपना स्पष्ट रुख सामने रखने और माफी माँगने को कहा है।
शरजील इमाम कौन हैं और उनका यहाँ क्या संदर्भ है?
शरजील इमाम 2020 के दिल्ली दंगों और नागरिकता संशोधन अधिनियम विरोधी आंदोलन से जुड़े मामलों में आरोपी हैं और वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। VHP का आरोप है कि जामिया परिसर में उनके समर्थन में नारे लिखे गए और कांग्रेस नेता उन्हें राजनीतिक समर्थन दे रहे हैं।
क्या इस मामले में कांग्रेस या जामिया प्रशासन ने कोई प्रतिक्रिया दी है?
23 अक्टूबर 2026 तक जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन या कांग्रेस की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। VHP ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से सीधे जवाब माँगा है।
क्या जामिया में इस तरह के विवाद पहले भी हुए हैं?
जामिया मिल्लिया इस्लामिया 2019-20 में नागरिकता संशोधन अधिनियम विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भी राष्ट्रीय विवाद का केंद्र बना था। आलोचकों का कहना है कि यह विश्वविद्यालय बार-बार राष्ट्रवाद और शैक्षणिक स्वतंत्रता की बहस का प्रतीकात्मक केंद्र बन जाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले