जामिया में विवादित नारों पर VHP का हमला: विनोद बंसल की माँग — दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने 23 अक्टूबर 2026 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय परिसर में कथित तौर पर लिखे गए विवादित नारों की कड़े शब्दों में निंदा की और विश्वविद्यालय प्रशासन से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की माँग की। बंसल ने साथ ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और इंडिया गठबंधन के नेताओं पर जेल में बंद शरजील इमाम को राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप लगाया।
मुख्य घटनाक्रम
बंसल के अनुसार, नई दिल्ली स्थित इस केंद्रीय विश्वविद्यालय के परिसर में 'फ्री कश्मीर', 'गो बैक आरएसएस' और 'गो बैक वीसी' जैसे नारे कथित तौर पर लिखे गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा, तथा महज नारेबाजी से किसी को पद से नहीं हटाया जा सकता।
VHP प्रवक्ता ने कहा कि पिछले कई वर्षों से जामिया मिल्लिया इस्लामिया की संस्थागत छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिशें होती रही हैं और यह हालिया घटना उसी कड़ी में एक और उदाहरण है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया कि ऐसे तत्वों की पहचान कर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएँ।
शरजील इमाम प्रकरण और राजनीतिक आरोप
बंसल ने आरोप लगाया कि जेल में बंद शरजील इमाम के समर्थन में परिसर में नारे लिखे गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी आरोपी का लगातार महिमामंडन करना 'दुर्भाग्यपूर्ण' है। उनका यह भी आरोप था कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के नेता ऐसे व्यक्तियों को राजनीतिक संरक्षण और समर्थन प्रदान कर रहे हैं।
गौरतलब है कि शरजील इमाम पर 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में गंभीर आरोप हैं और वह न्यायिक हिरासत में हैं। इस संदर्भ में VHP की यह प्रतिक्रिया राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।
कांग्रेस नेतृत्व से जवाब की माँग
VHP प्रवक्ता ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से सीधे सवाल किया कि क्या वे अपने नेताओं के कथित बयानों से सहमत हैं। बंसल ने कांग्रेस से इस मामले में अपना स्पष्ट रुख सामने रखने और सार्वजनिक रूप से माफी माँगने की माँग की।
उन्होंने कहा कि भारत के संविधान, लोकतंत्र और न्याय-व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़े करने वाली किसी भी गतिविधि को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब विश्वविद्यालय परिसरों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है।
विश्वविद्यालय प्रशासन से अपेक्षाएँ
बंसल ने विश्वविद्यालय प्रशासन से माँग की कि परिसर में अनुशासन बनाए रखने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाए जाएँ। आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार की माँगें शैक्षणिक स्वायत्तता और परिसर में विमर्श की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती हैं। हालाँकि, VHP का पक्ष है कि 'देशविरोधी मानसिकता' और वैध असहमति में अंतर किया जाना आवश्यक है।
इस पूरे मामले पर जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन या कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इस विवाद के और गहराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।