5 नवंबर 2026
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वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल का दिग्विजय सिंह से सवाल: हिंदुत्व को सनातन से अलग कैसे करेंगे?

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वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल का दिग्विजय सिंह से सवाल: हिंदुत्व को सनातन से अलग कैसे करेंगे?

सारांश

वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल ने दिग्विजय सिंह से सीधे सवाल किया — क्या हिंदुत्व को सनातन से अलग किया जा सकता है? साथ ही एएमयू चुनाव में उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में नारेबाजी को 'चिंताजनक' बताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से कठोर कार्रवाई की माँग की।

मुख्य बातें

वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल ने 5 नवंबर 2026 को कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पर सनातन धर्म और हिंदुत्व को लेकर परस्पर विरोधी बयानबाजी का आरोप लगाया।
बंसल ने पूछा कि हिंदुत्व को सनातन धर्म से अलग करने का आधार क्या है और कांग्रेस की दृष्टि में सनातन की परिभाषा क्या है।
एएमयू छात्रसंघ चुनावों में करीब आठ वर्षों के बाद मतदान के दौरान उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में नारे लगाए गए।
बंसल ने एएमयू प्रशासन से कथित नारेबाजी में शामिल छात्रों को चुनाव से अयोग्य घोषित करने और उनके विरुद्ध कार्रवाई की माँग की।
बंसल ने कुछ मुद्दों पर 'चयनात्मक प्रतिक्रिया' को 'सेलेक्टिव सेक्युलरिज्म' बताते हुए इस पर भी सवाल उठाए।

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने 5 नवंबर 2026 को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह पर सनातन धर्म और हिंदुत्व को लेकर परस्पर विरोधाभासी बयानबाजी करने का आरोप लगाया। बंसल ने सीधे प्रश्न किया कि कांग्रेस की दृष्टि में सनातन की परिभाषा क्या है और क्या हिंदुत्व को सनातन धर्म से पृथक किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के छात्रसंघ चुनावों में उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में नारे लगाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई।

दिग्विजय सिंह पर वीएचपी का हमला

बंसल के अनुसार, कांग्रेस नेता अलग-अलग अवसरों पर सनातन धर्म और हिंदुत्व पर परस्पर विरोधी रुख अपनाते हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को एक ओर सर्वसमावेशी और सौहार्दपूर्ण बताया जाता है, वहीं हिंदुत्व को नफरत से जोड़कर प्रस्तुत किया जाता है। बंसल ने इसे 'दिग्भ्रमित करने वाली राजनीति' करार देते हुए कहा कि कांग्रेस स्वयं अपने नेताओं के बयानों को लेकर असमंजस में है।

कांग्रेस के सहयोगियों पर भी निशाना

वीएचपी प्रवक्ता ने कांग्रेस के सहयोगी दलों के नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कहीं सनातन धर्म की मान्यताओं पर सवाल उठाए जाते हैं, तो कहीं ब्राह्मणों के विरुद्ध आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल होता है। उन्होंने कहा कि कुछ नेता सनातन को 'डेंगू, मलेरिया और कोरोना' जैसी बीमारियों से तुलना करते हुए इसे समाप्त करने की बात कर चुके हैं। बंसल ने दिग्विजय सिंह से मध्य प्रदेश की संस्कृति का सम्मान करने की अपील करते हुए कहा कि राजनीतिक विचारधारा अपनी जगह है, परंतु राज्य की सांस्कृतिक विरासत को आघात नहीं पहुँचाना चाहिए।

एएमयू चुनाव: नारेबाजी पर वीएचपी की आपत्ति

बंसल ने बताया कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनावों में — जो कथित तौर पर करीब आठ वर्षों के अंतराल के बाद हो रहे हैं — छात्रसंघ अध्यक्ष पद के एक दावेदार की ओर से उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में नारे लगाए गए। इसके साथ ही गाज़ा और फ़िलिस्तीन से जुड़े नारे भी लगाए गए। उन्होंने ध्यान दिलाया कि जिन व्यक्तियों के समर्थन में नारे लगाए जा रहे हैं, वे गंभीर आपराधिक मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं। बंसल ने इसे शैक्षणिक वातावरण के लिए 'निंदनीय, शर्मनाक और चिंताजनक' बताया।

एएमयू प्रशासन से कार्रवाई की माँग

वीएचपी प्रवक्ता ने एएमयू प्रशासन से स्पष्ट माँग की कि नारेबाजी में कथित तौर पर शामिल छात्रों के विरुद्ध तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे छात्रों को न केवल वर्तमान चुनाव बल्कि भविष्य के चुनावों से भी अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। बंसल ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में इस प्रकार की गतिविधियाँ छात्रों की मानसिकता को प्रभावित करने का प्रयास हैं।

'सेलेक्टिव सेक्युलरिज्म' पर सवाल

बंसल ने मुस्लिम समुदाय की ओर से कुछ अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर 'चयनात्मक प्रतिक्रिया' दिखाए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इसे 'सेलेक्टिव सेक्युलरिज्म' की संज्ञा देते हुए कहा कि सऊदी अरब पर हूती हमले जैसे मामलों में वैसी आवाज नहीं उठाई गई जैसी कुछ अन्य मुद्दों पर उठाई जाती है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब धार्मिक पहचान और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर देशभर में बहस तेज है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह बहस केवल राजनीतिक कीचड़ उछालने तक सीमित रहेगी। एएमयू वाले प्रकरण में बंसल की माँगें तथ्यात्मक जाँच की माँग करती हैं — नारेबाजी हुई या नहीं, और यदि हुई तो विश्वविद्यालय का रुख क्या है, यह प्रश्न विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए अनुत्तरित नहीं रह सकता। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि इस पूरी बहस में सनातन और हिंदुत्व दोनों की परिभाषाओं पर विद्वानों और धर्माचार्यों के बीच भी स्पष्ट सहमति नहीं है — राजनीतिक दलों की तो बात ही छोड़ें।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विनोद बंसल ने दिग्विजय सिंह से क्या सवाल किया?
वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल ने दिग्विजय सिंह से पूछा कि कांग्रेस की नजर में सनातन धर्म की परिभाषा क्या है और क्या हिंदुत्व को सनातन से अलग किया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता इन दोनों पदों पर परस्पर विरोधी बयान देते रहे हैं।
एएमयू छात्रसंघ चुनाव में क्या विवाद हुआ?
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनावों के दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष पद के एक दावेदार की ओर से उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में नारे लगाए गए। साथ ही गाज़ा और फ़िलिस्तीन से जुड़े नारे भी सुने गए, जिस पर वीएचपी ने कड़ी आपत्ति जताई।
वीएचपी ने एएमयू प्रशासन से क्या माँग की?
विनोद बंसल ने एएमयू प्रशासन से माँग की कि नारेबाजी में कथित तौर पर शामिल छात्रों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और उन्हें वर्तमान तथा भविष्य के चुनावों से अयोग्य घोषित किया जाए।
बंसल ने 'सेलेक्टिव सेक्युलरिज्म' किसे कहा?
बंसल ने उस प्रवृत्ति को 'सेलेक्टिव सेक्युलरिज्म' बताया जिसमें कुछ वर्ग केवल चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर ही प्रतिक्रिया देते हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि सऊदी अरब पर हूती हमले जैसे मामलों पर वैसी आवाज नहीं उठाई गई जैसी अन्य मुद्दों पर उठाई जाती है।
वीएचपी ने कांग्रेस पर सनातन के संदर्भ में क्या आरोप लगाए?
वीएचपी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ऐसे नेताओं और सहयोगी दलों को साथ रखा है जो सनातन धर्म के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ नेता सनातन को 'डेंगू, मलेरिया और कोरोना' से तुलना करते हुए इसे समाप्त करने की बात कर चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
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