मदरसों में शुक्रवार छुट्टी पर धामी के फैसले का VHP ने किया समर्थन, बंसल बोले — सरकारी संस्थानों में एकरूपता ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने 21 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मदरसों में शुक्रवार की छुट्टी समाप्त करने संबंधी बयान का खुलकर समर्थन किया। बंसल ने कहा कि सरकारी अनुदान से संचालित सभी शैक्षणिक संस्थानों में एकसमान नीति लागू होनी चाहिए — किसी एक समुदाय के लिए अलग अवकाश-व्यवस्था का कोई तार्किक आधार नहीं है।
मुख्य बयान: एकरूपता और समता का सिद्धांत
विनोद बंसल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षा व्यवस्था में समता और एकरूपता का भाव अनिवार्य है। उनके अनुसार, जब किसी विशेष समुदाय के शैक्षणिक संस्थान में एक दिन अवकाश हो और अन्य संस्थानों में दूसरे दिन, तो यह भेदभावपूर्ण व्यवस्था है। उन्होंने सीएम धामी के कदम का स्वागत करते हुए कहा कि अन्य राज्यों की सरकारों को भी इसी मॉडल का अनुसरण करना चाहिए।
बंसल ने विशेष रूप से सरकारी अनुदान प्राप्त मदरसों और सरकारी तंत्र के साथ संचालित होने वाले संस्थानों का उल्लेख किया। उनका कहना था कि जो संस्थान सरकारी धन से चलते हैं, उन पर सरकार की तय नीतियाँ उसी तरह लागू होनी चाहिए, जैसे किसी भी अन्य विद्यालय पर होती हैं।
पश्चिम बंगाल के हालात पर VHP की प्रतिक्रिया
पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी के इस आरोप पर कि भारत में बांग्लादेश जैसे हालात बनाने की कोशिशें हो रही हैं, बंसल ने CJP, कांग्रेस और कम्युनिस्ट विचारधारा से जुड़े लोगों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समूह देश की संप्रभुता और संविधान को नुकसान पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं।
बंसल ने कहा कि ऐसे तत्वों को आत्मचिंतन करना चाहिए और देश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश बंद करनी चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि कांग्रेस और कम्युनिस्ट न होते, तो भारत की स्थिति आज भिन्न होती — हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दुर्गा प्रतिमा विसर्जन और धार्मिक आस्था का प्रश्न
सुवेंदु अधिकारी की इस टिप्पणी पर कि दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान केवल सनातन धर्म को मानने वाले ही प्रतिमा स्पर्श करें, बंसल ने धार्मिक आस्था और परंपरा का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति भारत माता की जय और वंदे मातरम नहीं बोल सकते या हिंदू धर्म की आस्थाओं में विश्वास नहीं रखते, उन्हें धार्मिक आयोजनों में सहभागिता पर पुनर्विचार करना चाहिए।
बंसल के अनुसार, धार्मिक आस्था के केंद्रों में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को वहाँ की मान्यताओं और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति ऐसे धार्मिक आयोजन में शामिल होता है, तो उसे श्रद्धा और निष्ठा के साथ पूजा-आरती में भाग लेना चाहिए। आस्था में विश्वास न रखने वाले लोगों के धार्मिक स्थलों पर प्रवेश पर प्रतिबंध की वकालत करते हुए उन्होंने एक विवादास्पद रुख अपनाया, जो आलोचकों के अनुसार सामाजिक समरसता के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
व्यापक संदर्भ: मदरसा नीति पर राष्ट्रीय बहस
गौरतलब है कि मदरसों की अवकाश-नीति और पाठ्यक्रम को लेकर देश में लंबे समय से बहस जारी है। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में मदरसा शिक्षा के मानकीकरण पर सरकारी प्रयास पहले भी हो चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मदरसा शिक्षा सुधार को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में भी सुनवाई चल रही है।
विश्व हिंदू परिषद (VHP) का यह बयान स्पष्ट रूप से एक व्यापक राजनीतिक-सामाजिक एजेंडे का हिस्सा है, जिसमें धार्मिक और शैक्षणिक नीतियों में 'एकरूपता' की माँग केंद्र में है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अन्य राज्य सरकारें धामी मॉडल को अपनाती हैं या नहीं।