हिरण्मय महाराज ने इमाम-पुरोहित भत्ता बंद करने का किया समर्थन, CM सुवेंदु अधिकारी की सराहना

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हिरण्मय महाराज ने इमाम-पुरोहित भत्ता बंद करने का किया समर्थन, CM सुवेंदु अधिकारी की सराहना

सारांश

दुर्गापुर के आध्यात्मिक गुरु हिरण्मय महाराज ने इमाम-पुरोहित भत्ता बंद करने के फैसले को समानता का कदम बताया और CM सुवेंदु अधिकारी की तारीफ की। साथ ही स्कूलों-मदरसों में 'वंदे मातरम' अनिवार्यता का भी समर्थन किया।

मुख्य बातें

हिरण्मय महाराज ने 21 मई 2026 को दुर्गापुर में इमाम और पुरोहित भत्ता बंद करने के फैसले को सही ठहराया।
उनका कहना है कि सरकारी सुविधाएँ सभी नागरिकों के लिए समान होनी चाहिए, विशेष वर्ग के लिए अलग व्यवस्था नहीं।
महाराज ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने के प्रयासों की प्रशंसा की।
स्कूलों और मदरसों में 'वंदे मातरम' अनिवार्य करने के फैसले का भी उन्होंने समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि बच्चों में बचपन से देशभक्ति की भावना विकसित करना समय की जरूरत है।

पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में आध्यात्मिक गुरु हिरण्मय महाराज ने 21 मई 2026 को राज्य सरकार के इमाम और पुरोहित भत्ता बंद करने के निर्णय का खुलकर समर्थन किया। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ सभी नागरिकों को समान रूप से मिलना चाहिए, न कि किसी विशेष वर्ग को अलग से। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य के गरीब, वंचित और उपेक्षित तबकों तक सहायता पहुँचाना कहीं अधिक प्राथमिकता है।

भत्ता बंद करने पर हिरण्मय महाराज का पक्ष

हिरण्मय महाराज ने कहा कि चाहे इमाम भत्ता हो या पुरोहित भत्ता — इन पर खर्च होने वाले संसाधन उन लोगों तक पहुँचने चाहिए जो वास्तव में जरूरतमंद हैं। उनके अनुसार किसी एक धार्मिक समुदाय के लिए विशेष व्यवस्था बनाना समानता के सिद्धांत के विरुद्ध है। उन्होंने इस फैसले को समाज के व्यापक हित में बताया।

CM सुवेंदु अधिकारी के प्रयासों की सराहना

महाराज ने पश्चिम बंगाल की नई सरकार और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के प्रयासों की तारीफ करते हुए कहा कि वे समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की बात कर रहे हैं, जो स्वागत योग्य है। उनका मानना है कि यदि सरकार समानता के आधार पर काम करती है तो यह समाज के लिए एक सकारात्मक कदम है।

वंदे मातरम को अनिवार्य करने पर समर्थन

स्कूलों और मदरसों में 'वंदे मातरम' को अनिवार्य करने के फैसले पर हिरण्मय महाराज ने कहा कि राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति हर नागरिक के हृदय में होनी चाहिए। उनके अनुसार बचपन से ही विद्यार्थियों में देश के प्रति सम्मान और जुड़ाव की भावना विकसित करना आवश्यक है, क्योंकि यही युवा आगे चलकर देश का भविष्य बनते हैं। उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम' महज एक गीत नहीं, बल्कि देशभक्ति की भावना का प्रतीक है।

राष्ट्रप्रेम और शिक्षा पर जोर

महाराज ने कहा कि स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और मदरसों समेत सभी शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रप्रेम का वातावरण होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में रहकर देश का विरोध करने वाली मानसिकता उचित नहीं है। उनके अनुसार यदि बच्चों और युवाओं में देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना नहीं होगी, तो समाज में नकारात्मक सोच पनप सकती है।

आगे की दिशा

हिरण्मय महाराज का मानना है कि विद्यार्थियों के मन में सकारात्मक सोच, देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में नई सरकार के धार्मिक-भत्ता नीति और शिक्षा संस्थानों में 'वंदे मातरम' अनिवार्यता जैसे फैसलों पर राज्यव्यापी बहस जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें धार्मिक भत्तों को 'तुष्टिकरण' बनाम 'समानता' के नजरिए से देखा जा रहा है। गौरतलब है कि इमाम भत्ता योजना दशकों से विवादों में रही है और इसे बंद करना एक प्रतीकात्मक राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। असली सवाल यह है कि बचाए गए संसाधन वास्तव में वंचित तबकों तक पहुँचेंगे या नहीं — यह नीतिगत ढाँचे और क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। 'वंदे मातरम' अनिवार्यता जैसे फैसलों पर धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों की आपत्तियों को भी इस बहस में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
RashtraPress
22 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिरण्मय महाराज ने इमाम-पुरोहित भत्ता बंद करने के फैसले पर क्या कहा?
हिरण्मय महाराज ने इस फैसले को सही बताया और कहा कि सरकारी सुविधाएँ सभी नागरिकों के लिए समान होनी चाहिए। उनके अनुसार राज्य के वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुँचाना किसी विशेष वर्ग को भत्ता देने से अधिक जरूरी है।
पश्चिम बंगाल में इमाम और पुरोहित भत्ता बंद करने का फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह फैसला पश्चिम बंगाल में नई सरकार की समानता-आधारित नीति का हिस्सा माना जा रहा है। इमाम भत्ता योजना लंबे समय से राजनीतिक विवाद का विषय रही है, और इसे बंद करना धार्मिक-तटस्थ शासन की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
हिरण्मय महाराज ने CM सुवेंदु अधिकारी की तारीफ क्यों की?
महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की बात कर रहे हैं, जो स्वागत योग्य है। उनके अनुसार समानता के आधार पर काम करने वाली सरकार समाज के लिए फायदेमंद होती है।
स्कूलों और मदरसों में 'वंदे मातरम' अनिवार्य करने पर हिरण्मय महाराज का क्या मत है?
हिरण्मय महाराज ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि 'वंदे मातरम' केवल एक गीत नहीं बल्कि देशभक्ति का प्रतीक है। उनके अनुसार सभी शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रप्रेम का वातावरण होना चाहिए ताकि बच्चों में देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो।
हिरण्मय महाराज कौन हैं?
हिरण्मय महाराज पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में स्थित एक आध्यात्मिक गुरु हैं। वे सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपने विचार व्यक्त करते रहते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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