इमाम अलाउंस बंद करने पर हुसैन दलवई का वार: 'पहले शिक्षा में उपयोग सुनिश्चित करो'

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इमाम अलाउंस बंद करने पर हुसैन दलवई का वार: 'पहले शिक्षा में उपयोग सुनिश्चित करो'

सारांश

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने पश्चिम बंगाल सरकार के इमाम भत्ता बंद करने के फैसले को गलत ठहराया। उन्होंने कहा कि शिक्षा में उपयोग पहले सुनिश्चित हो — बिना जवाबदेही के यह फैसला गरीब इमाम परिवारों पर सीधी मार है।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने पश्चिम बंगाल सरकार के इमाम भत्ता समाप्त करने के फैसले को 'गलत' करार दिया।
दलवई ने शर्त रखी कि भत्ते की राशि का उपयोग शिक्षा क्षेत्र में ही हो, इसकी पहले पुख्ता गारंटी दी जाए।
उनके अनुसार इमाम आमतौर पर गरीब पृष्ठभूमि से आते हैं और भत्ता बंद होने से उनके परिवारों पर जीवन-यापन का संकट आ गया है।
दलवई ने चेताया कि इस फैसले से इमामों की संख्या में गिरावट आएगी।
केंद्र के 'नक्सलमुक्त भारत' के दावे को उन्होंने अविश्वसनीय बताया; नक्सलवाद में हिंसा को गलत कहा।
तमिलनाडु की द्विभाषा नीति पर कहा — किसी राज्य पर भाषा थोपना उचित नहीं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने 19 मई को मुंबई में पश्चिम बंगाल सरकार के उस निर्णय की कड़ी आलोचना की, जिसमें इमामों को मिलने वाले भत्ते को समाप्त करने का फैसला किया गया है। राज्य सरकार का तर्क है कि इन राशियों का पुनर्उपयोग शिक्षा क्षेत्र में किया जाएगा। दलवई ने कहा कि इस फैसले से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि धनराशि वास्तव में शिक्षा पर ही खर्च हो।

दलवई का मुख्य आपत्ति बिंदु

दलवई ने कहा, 'हमें इस बात से कोई हर्ज नहीं है कि अगर इमामों को दिए जाने वाले पैसों का इस्तेमाल शिक्षा के क्षेत्र में किया जाएगा, लेकिन आपको पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि इन पैसों का इस्तेमाल हर हाल में शिक्षा के क्षेत्र में ही हो और इस दिशा में किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार न की जाए।'

उन्होंने इमामों की आर्थिक स्थिति का प्रत्यक्ष अनुभव साझा करते हुए कहा कि आमतौर पर इमाम गरीब पृष्ठभूमि से आते हैं और उनकी आर्थिक स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण रहती है। उनके अनुसार, भत्ता बंद होने से इन परिवारों के सामने जीवन-यापन का संकट उत्पन्न हो गया है।

इमामों की संख्या पर चेतावनी

दलवई ने आगाह किया कि इस फैसले के दीर्घकालिक परिणाम भी होंगे। उन्होंने कहा, 'इस फैसले की वजह से इमामों की संख्या में कमी दर्ज की जाएगी।' साथ ही उन्होंने मुसलमान मतदाताओं को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि वे लगातार ऐसी सरकारें चुन रहे हैं जो उनके हितों के विरुद्ध काम कर रही हैं।

नक्सलवाद और केंद्र सरकार के दावे पर प्रतिक्रिया

केंद्र सरकार के 'नक्सलमुक्त भारत' के दावे पर दलवई ने कहा कि इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद और उसमें निहित हिंसा दोनों गलत हैं, लेकिन उनके अनुसार जब सरकार आवाज उठाने का अवसर नहीं देती, तब हिंसा की प्रवृत्ति बढ़ती है।

अन्य मुद्दों पर दलवई का रुख

भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता सुवेंदु अधिकारी के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर की तरह पश्चिम बंगाल में भी पथराव की घटनाएँ समाप्त होंगी — दलवई ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से पथराव की घटनाएँ बिल्कुल पसंद नहीं हैं।

तमिलनाडु की द्विभाषा नीति पर उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य पर भाषा नीति थोपना उचित नहीं है। उन्होंने कहा, 'आप किसी को भी जबरन कोई भाषा नहीं सिखा सकते।' कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला को असम पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा पासपोर्ट विवाद मामले में समन किए जाने पर दलवई ने कहा कि अगर कोई आरोप है तो उसे स्पष्ट किया जाए — सबको बोलने का अधिकार है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में इमाम भत्ते का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है और विभिन्न दल इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने में जुटे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल सरकार ने इमाम भत्ता क्यों बंद किया?
पश्चिम बंगाल सरकार का कहना है कि इमामों को दिए जाने वाले भत्ते की राशि का पुनर्उपयोग शिक्षा क्षेत्र में किया जाएगा। हालाँकि इस निर्णय के विस्तृत कार्यान्वयन का ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
हुसैन दलवई ने इस फैसले पर क्या कहा?
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने फैसले को गलत बताया और कहा कि शिक्षा में उपयोग पहले सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भत्ता बंद होने से इमाम परिवारों के सामने जीवन-यापन का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
इमाम भत्ता बंद होने से क्या असर पड़ेगा?
दलवई के अनुसार, इस फैसले से इमामों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आएगी क्योंकि अधिकांश इमाम गरीब पृष्ठभूमि से आते हैं और भत्ता उनकी आजीविका का अहम हिस्सा था।
दलवई ने नक्सलवाद पर केंद्र सरकार के दावे पर क्या कहा?
दलवई ने केंद्र सरकार के 'नक्सलमुक्त भारत' के दावे को अविश्वसनीय बताया। उन्होंने नक्सलवाद में हिंसा को गलत ठहराया, लेकिन यह भी कहा कि जब सरकार आवाज उठाने का अवसर नहीं देती तो हिंसा की प्रवृत्ति बढ़ती है।
तमिलनाडु की द्विभाषा नीति पर दलवई का क्या रुख है?
दलवई ने कहा कि किसी भी राज्य पर भाषा नीति थोपना उचित नहीं है और किसी को जबरन कोई भाषा नहीं सिखाई जा सकती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में सभी राज्यों को एकजुट करने की कोशिश की।
राष्ट्र प्रेस
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