क्या चुनाव आयोग सरकार की कठपुतली बन गया है? कांग्रेस ने 'लाडली बहना योजना' की किस्तों पर उठाए सवाल
सारांश
Key Takeaways
- हुसैन दलवई ने सरकार की आलोचना की है।
- चुनाव आयोग पर सरकार का नियंत्रण का आरोप।
- लाडली बहना योजना का चुनावों पर असर पड़ सकता है।
- स्वतंत्र संस्थाओं की कमजोरी पर चिंता।
- हिंदुत्व और हिंदू धर्म के बीच भेद का उल्लेख।
मुंबई, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों से पहले ‘लाडली बहना योजना’ की किस्तें जारी करने के लिए सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने चुनाव आयोग पर भी आरोप लगाया और कहा कि यह अब सरकार का एक अन्य विभाग बन गया है।
समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में हुसैन दलवई ने कहा, "सरकार जो भी निर्णय ले सकती है, लेकिन उसे ऐसे निर्णय लेने की इजाजत चुनाव आयोग से मिलती है। चुनाव आयोग को इस पर आपत्ति जतानी चाहिए थी और इसे रोकना चाहिए था। इसके बजाय, यह एक कठपुतली बन गया है।"
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि जवाहरलाल नेहरू के शासन में स्थापित स्वतंत्र संस्थाएं जैसे कि अदालतें, न्यायपालिका और चुनाव आयोग अब कमजोर हो रही हैं। यदि सरकार स्वयं कानून का उल्लंघन करती है, तो चुनाव आयोग को उस पर आपत्ति व्यक्त करनी चाहिए और हस्तक्षेप करना चाहिए। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।
उन्होंने मांग की, "चुनाव आयोग को जारी की जा रही राशि पर रोक लगानी चाहिए। लोग और सभी राजनीतिक पार्टियां पहले ही यह मांग उठा चुकी हैं।" हुसैन दलवई ने कहा कि सरकार का फैसला पूरी तरह से गलत है। यह रिश्वतखोरी के सिवा कुछ नहीं है। जनता से इकट्ठा किया गया पैसा और सरकारी खजाना अब चुनावों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जो पूरी तरह से गलत है।
हुसैन दलवई ने कहा कि इसका चुनाव पर असर पड़ेगा। जब लोगों को पैसे मिलते हैं तो वे स्वाभाविक रूप से सोचते हैं, 'मैं उन्हें वोट क्यों न दूं?' यह सरकार की ईमानदारी नहीं है। उन्होंने दोहराया कि यह पूरी तरह से गलत है। चुनाव आयोग को इसे तुरंत रोकना चाहिए।
सोमनाथ मंदिर के संबंध में उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस को सोमनाथ मंदिर के इतिहास के बारे में बिल्कुल जानकारी नहीं है। सोमनाथ मंदिर को इसलिए लूटा गया था क्योंकि वहां लोग बड़े स्तर पर अपने पैसे रखते थे।
भाजपा से सवाल पूछते हुए हुसैन दलवई ने कहा, "सोमनाथ मंदिर को लूटने के लिए उत्तर भारत में वहां तक पहुंचना एक लंबा रास्ता है। वहां गजनी कैसे पहुंचा था? बीच में हिंदू बस्तियां थीं। उन्होंने क्यों गजनी को नहीं रोका?" उन्होंने कहा कि गजनी वहां तक पहुंचा क्योंकि हिंदुओं में जातीय व्यवस्था है और सोमनाथ मंदिर में केवल ब्राह्मणों को जाने की अनुमति थी। इसके कारण हिंदुओं की अन्य जातियों ने मंदिर को लुटने दिया।"
मणिशंकर अय्यर की ‘हिंदुत्व’ पर टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता ने कहा, "हिंदू धर्म और हिंदुत्व में बहुत बड़ा अंतर है। हिंदू धर्म में उदारता है, लेकिन हिंदुत्व में यह नहीं है। हिंदुत्व केवल एक राजनीतिक विचारधारा है। वर्तमान में हिंदुत्व के नाम पर जो हो रहा है, उसका हिंदू धर्म से कोई संबंध नहीं है।"