महिलाओं को आरक्षण का हक, हुसैन दलवई ने की नई जनगणना की मांग
सारांश
Key Takeaways
- महिलाओं को आरक्षण का हक मिलना चाहिए।
- परिसीमन 2011 की जनगणना पर आधारित नहीं होना चाहिए।
- दक्षिण के राज्यों की चिंता उचित है।
- महिलाओं को समान अधिकार और प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
- राजनीतिक स्थिति में सुधार की आवश्यकता है।
मुंबई, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महिला आरक्षण बिल पर संसद का विशेष सत्र आज से प्रारंभ हो गया है। तीन दिन तक चलने वाले इस सत्र के संबंध में कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा कि महिलाओं को आरक्षण मिलना चाहिए, यह आम सहमति है। लेकिन, परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर करना गलत है।
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि नई जनगणना या सर्वेक्षण होना चाहिए। दक्षिण के राज्यों का कहना है कि हमनें बेहतर चिकित्सा सुविधाएं और शिक्षा उपलब्ध कराई है, जिससे उनकी आबादी नियंत्रित हुई है, लेकिन अब उनकी लोकसभा सीटें कम की जा रही हैं। यह सरासर गलत है। दक्षिण के राज्यों को सीटें घटने का डर है, जबकि उत्तर की सीटें बढ़ेंगी। उनकी यह आशंका उचित है।
हुसैन दलवई ने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था को चौथे से तीसरे स्थान पर लाने का दावा किया गया था, लेकिन वह अब छठे स्थान पर चली गई है। लोगों की नौकरियांमहंगाई बढ़ गई है। अमीरों की अमीरी बढ़ी है और गरीबों की गरीबी बढ़ी है, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
उन्होंने कहा कि आप लोगों को कैसे शिक्षित करेंगे, आप तो स्कूल बंद कर रहे हैं और दवाखाने बंद कर रहे हैं। सत्ता में बने रहना और ऊपरी जाति तथा अमीर वर्ग का भला करना ही इनका मकसद है। इसलिए हिंदू-मुस्लिम-ईसाई के नाम पर ऐसी गड़बड़ियां की जाती हैं।
महिला आरक्षण बिल पर दलवई ने कहा कि संसद में इस पर पूरी बहस होगी, लेकिन टू-थर्ड मेजॉरिटी हासिल करने के लिए जो जरूरी है, वह उन्हें मिलेगी, ऐसा मुझे नहीं लगता। मुसलमान देश की 15 प्रतिशत आबादी हैं। उनका कहीं न कहीं प्रतिनिधित्व होना चाहिए। पार्टियों को बाध्य किया जाना चाहिए कि उनके उम्मीदवारों में एक निश्चित प्रतिशत मुसलमानों और अन्य पिछड़े वर्गों का भी हो। आज एक भी मुसलमान मंत्री नहीं है, क्या यह उचित है? यह क्या चल रहा है?
नासिक आईटी कंपनी में कथित धर्मांतरण मामले पर दलवई ने कहा कि जो भी हुआ वह ठीक नहीं है। जब तक औरतों के प्रति समाज का नजरिया नहीं बदलेगा, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। जिन्होंने भी यह किया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। यह कहना गलत है कि केवल मुसलमान ही ऐसा करते हैं। हिंदू भी करते हैं, क्योंकि समस्या नजरिए की है। समाज का नजरिया बदलना चाहिए। महिलाओं को पूरे अधिकार और समान अधिकार मिलने चाहिए। सबको समान अधिकार मिलने चाहिए।
ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए एक मई से बदल रहे नियम पर उन्होंने कहा कि मराठी नहीं आती हो तो सीखना चाहिए। अगर यात्री मराठी में बात करे तो जवाब मराठी में देना चाहिए, लेकिन पढ़ना-लिखना भी अनिवार्य करना गलत है।
बंगाल चुनाव को लेकर हुसैन दलवई ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा की मदद कर रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के आयुक्त को बदल देना चाहिए।