29 जुलाई 2026
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VHP प्रवक्ता विनोद बंसल का आरोप: सीजेपी 'चलो संसद' हिंसा में पहचान छुपाकर उपद्रव हुआ

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VHP प्रवक्ता विनोद बंसल का आरोप: सीजेपी 'चलो संसद' हिंसा में पहचान छुपाकर उपद्रव हुआ

सारांश

VHP प्रवक्ता विनोद बंसल ने एक्स पर आरोप लगाया कि सीजेपी के 'चलो संसद' मार्च में हुई पत्थरबाजी सुनियोजित थी और उपद्रवियों ने पहचान छुपाई। 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर नीट विवाद को लेकर हुए इस प्रदर्शन में हिंसक झड़पें हुई थीं।

मुख्य बातें

VHP प्रवक्ता विनोद बंसल ने 29 जुलाई को एक्स पर पोस्ट कर सीजेपी 'चलो संसद' हिंसा की निंदा की।
बंसल ने आरोप लगाया कि पत्थरबाजी और तोड़फोड़ सुनियोजित रणनीति का हिस्सा थी और उपद्रवियों ने पहचान छुपाई।
20 जुलाई को जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर नीट पेपर लीक के विरोध में 'चलो संसद' मार्च के दौरान हिंसक झड़पें हुईं।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की थी।
बंसल ने पुलिस कार्रवाई का विरोध करने वाले कश्मीरी नेताओं पर भी तीखा कटाक्ष किया।

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने 29 जुलाई को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 'चलो संसद' मार्च के दौरान हुई हिंसा की कड़ी निंदा की। बंसल ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान हुई पत्थरबाजी और तोड़फोड़ एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा थी, जिसमें उपद्रवियों ने जानबूझकर अपनी पहचान छिपाई।

मुख्य घटनाक्रम

20 जुलाई को जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर सीजेपी द्वारा आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान हिंसक झड़पें हुईं। यह प्रदर्शन नीट परीक्षा पेपर लीक और अन्य कथित धांधलियों के विरोध में बुलाया गया था, जिसमें हज़ारों छात्र और युवा शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की थी। कई स्थानों पर पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और पुलिस के साथ झड़प की घटनाएँ सामने आईं, जिसके बाद पुलिस ने कई मामलों में कार्रवाई शुरू की।

विनोद बंसल का बयान

बंसल ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा कि दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पत्थरबाजी और अन्य हिंसक घटनाओं को देखकर उन्हें संदेह हुआ कि इन कामों में महारत रखने वाले लोग नज़र क्यों नहीं आ रहे। उन्होंने आगे लिखा कि शायद शातिर 'तिलचट्टों' ने अपनी पहचान छुपा ली होगी। यह टिप्पणी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।

कश्मीरी नेताओं पर तंज

बंसल ने उन कश्मीरी राजनेताओं पर भी तीखा कटाक्ष किया जो पुलिस की कार्रवाई का विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि जब उपद्रवी कानून को हाथ में ले रहे थे, तब ये नेता मौन रहे, लेकिन जैसे ही पुलिस ने प्रशासनिक कार्रवाई शुरू की, कुछ नेताओं को प्रदर्शनकारियों में अपने हितैषी दिखने लगे। यह ऐसे समय में आया है जब नीट विवाद को लेकर देशभर में राजनीतिक तनाव चरम पर है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

गौरतलब है कि नीट पेपर लीक का मामला इस वर्ष का सबसे बड़ा शैक्षणिक विवाद बन चुका है, जिसने केंद्र सरकार को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है। आलोचकों का कहना है कि इस मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया धीमी और अपर्याप्त रही। प्रदर्शन में शामिल छात्रों की माँगें वैध मानी जा रही हैं, लेकिन हिंसा के आरोपों ने आंदोलन की दिशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आगे की स्थिति

पुलिस ने हिंसा से जुड़े मामलों में जाँच जारी रखी है और कई संदिग्धों की पहचान की प्रक्रिया चल रही है। बंसल की पोस्ट के बाद VHP और विपक्षी दलों के बीच बयानबाज़ी तेज़ होने की संभावना है। नीट विवाद पर संसद में भी तीखी बहस जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अक्सर इस तरह के बयानों में नहीं होता। कश्मीरी नेताओं पर तंज एक अलग राजनीतिक एजेंडे की ओर इशारा करता है जो नीट मुद्दे से सीधे जुड़ा नहीं है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि हिंसा के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी भी अधूरी है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विनोद बंसल ने सीजेपी प्रदर्शन हिंसा पर क्या कहा?
VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि 'चलो संसद' मार्च के दौरान हुई पत्थरबाजी और तोड़फोड़ सुनियोजित थी और उपद्रवियों ने जानबूझकर अपनी पहचान छुपाई। उन्होंने पुलिस कार्रवाई का विरोध करने वाले कश्मीरी नेताओं पर भी तंज कसा।
सीजेपी का 'चलो संसद' मार्च क्या था और यह क्यों हुआ?
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'चलो संसद' मार्च आयोजित किया था। यह प्रदर्शन नीट परीक्षा पेपर लीक और अन्य कथित धांधलियों के विरोध में था, जिसमें हज़ारों छात्र और युवा शामिल हुए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की।
जंतर-मंतर पर हिंसा में क्या हुआ था?
20 जुलाई को 'चलो संसद' मार्च के दौरान कई स्थानों पर पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और पुलिस के साथ झड़प की घटनाएँ सामने आईं। इसके बाद पुलिस ने कई मामलों में कार्रवाई शुरू की और संदिग्धों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
विनोद बंसल ने कश्मीरी नेताओं पर क्या आरोप लगाए?
बंसल ने कहा कि जब प्रदर्शन के दौरान उपद्रवी कानून हाथ में ले रहे थे, तब कश्मीर के कुछ नेता मौन रहे। लेकिन जैसे ही पुलिस ने प्रशासनिक कार्रवाई शुरू की, इन नेताओं को प्रदर्शनकारियों में अपने हितैषी दिखने लगे।
नीट पेपर लीक विवाद का यह प्रदर्शन से क्या संबंध है?
नीट परीक्षा पेपर लीक इस वर्ष का सबसे बड़ा शैक्षणिक विवाद बना है, जिसके विरोध में छात्रों ने 'चलो संसद' मार्च में भाग लिया और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग रखी। हिंसा के आरोपों ने इस वैध छात्र आंदोलन की दिशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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