नीट पेपर लीक: विनीत जोशी का तबादला जवाबदेही नहीं, सीजेपी की विजेता दहिया की सरकार को दो टूक
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 25 जुलाई — नीट पेपर लीक विवाद को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की पूर्व प्रवक्ता विजेता दहिया ने स्पष्ट कहा कि उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी का केवल तबादला कर देना जवाबदेही तय करने के बराबर नहीं है। उनके अनुसार, 'तबादला कोई सजा नहीं होती' — और जब तक वास्तविक जिम्मेदारी तय नहीं होती, परीक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद बेमानी है।
छात्रों पर मानसिक दबाव और व्यवस्था की विफलता
विजेता दहिया ने कहा कि नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र महीनों, कई बार वर्षों तक दिन-रात मेहनत करते हैं। जब परिणाम आता है और उन्हें लगता है कि सफलता मिल गई, तो वह क्षण अत्यंत राहत का होता है। लेकिन उसी समय यदि यह पता चले कि पेपर लीक के कारण परीक्षा प्रक्रिया संदेह के घेरे में है और दोबारा परीक्षा देनी होगी, तो उनकी मानसिक स्थिति पर गहरा आघात पड़ता है।
दहिया ने कहा कि कई लोग उन छात्रों की मौतों को केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं मानते, बल्कि इन्हें परीक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों से जुड़ी मौतें मानते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पेपर लीक की घटनाएँ बार-बार सामने आ रही हैं, लेकिन कथित तौर पर इन्हें रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे।
विनीत जोशी तबादले पर सवाल
दहिया ने उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी के तबादले का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी अधिकारी की जिम्मेदारी के दौरान कोई बड़ी समस्या होती है, तो केवल विभाग बदल देना जवाबदेही तय करने के समान नहीं है। उन्होंने सीबीएसई से जुड़े पुराने मामलों का भी उल्लेख किया, जहाँ अधिकारियों को सिर्फ दूसरे विभागों में स्थानांतरित कर दिया गया। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े शिक्षा विवाद के बाद अधिकारी का तबादला 'कार्रवाई' के रूप में पेश किया गया हो।
सरकार से बातचीत और प्रमुख माँगें
दहिया ने बताया कि सीजेपी और सरकार के बीच हुई बातचीत सकारात्मक रही है। सरकार की ओर से सैद्धांतिक रूप से यह आश्वासन दिया गया है कि नीट पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने पर विचार किया जाएगा। इसके साथ ही, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने का भी आश्वासन दिया गया है।
हालाँकि, आंदोलन की तीसरी प्रमुख माँग — शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा — अभी भी अनसुलझी है। दहिया ने उम्मीद जताई कि इस मुद्दे पर भी आगे प्रगति होगी।
फंडिंग विवाद और आंदोलन की स्वतंत्र पहचान
विपक्षी दलों से फंडिंग मिलने के आरोपों को दहिया ने सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन पूरी तरह जनता के सहयोग से चल रहा है — लोग कालीन, पंखे, कूलर और भोजन जैसी जरूरी चीजें उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक राजनीतिक दल की ओर से मदद की पेशकश की गई थी, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया गया कि किसी भी राजनीतिक संगठन का योगदान खुले तौर पर और पारदर्शी तरीके से होना चाहिए।
दहिया ने कहा कि शुरुआत से ही राजनीतिक दलों से अपील की गई थी कि वे छात्रों के मुद्दे पर समर्थन दें, लेकिन अपने पार्टी झंडों के साथ न आएँ। उन्होंने इसे 'लोगों का आंदोलन' बताया और कहा कि इसकी मूल भावना गैर-दलीय जन आंदोलन की है।
आगे क्या होगा
दहिया ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल विरोध नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और ठोस सुधार सुनिश्चित करना है। उन्होंने मशहूर हस्तियों और आम लोगों से अपील की कि यदि वे छात्रों के साथ खड़े हैं, तो आंदोलन की वास्तविकता को भी स्वीकार करें। उनके अनुसार, छात्रों का भरोसा बहाल करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।