25 अक्टूबर 2026
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डॉ. जितेंद्र सिंह का कठुआ में जन दरबार: बंकर, मोबाइल टावर और सड़कों से बदली पाक सीमा के गाँवों की तस्वीर

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डॉ. जितेंद्र सिंह का कठुआ में जन दरबार: बंकर, मोबाइल टावर और सड़कों से बदली पाक सीमा के गाँवों की तस्वीर

सारांश

पाकिस्तान की जीरो लाइन पर खड़े कठुआ में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का जन दरबार सिर्फ सरकारी कार्यक्रम नहीं था — यह उन गाँवों की बदलती तस्वीर का प्रमाण था, जहाँ कभी हर तीसरे दिन गोलियाँ चलती थीं और आज 3,000 से अधिक बंकर, मोबाइल नेटवर्क और वंदे भारत ट्रेनें पहुँच चुकी हैं।

मुख्य बातें

जितेंद्र सिंह ने 25 अक्टूबर 2026 को कठुआ के पाकिस्तान सीमावर्ती क्षेत्र में जन दरबार आयोजित किया।
वर्ष 2015 से इस सेक्टर में पहले चरण में 2,000–2,500 बंकर और फिर 1,000 अतिरिक्त बंकर बनाए गए।
पहले हर तीसरे दिन सीमा पार से गोलीबारी होती थी; अब गोलीबारी बंद हो चुकी है।
क्षेत्र में मोबाइल टावर, सड़क नेटवर्क और दो वंदे भारत ट्रेनें शुरू हो चुकी हैं।
एलओसी के निकट के निवासियों को अब आरक्षण का लाभ भी मिलने लगा है।
जन दरबार करीब दो से ढाई घंटे चला, अधिकांश मामलों का मौके पर ही समाधान या रोडमैप तैयार किया गया।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 25 अक्टूबर 2026 को कठुआ ज़िले के पाकिस्तान सीमावर्ती क्षेत्र में आयोजित जन दरबार कार्यक्रम के दौरान कहा कि पिछले 12-13 वर्षों में इन इलाकों में मोबाइल टावर, सड़क नेटवर्क और बंकर जैसी बुनियादी सुविधाओं ने सीमावर्ती निवासियों के जीवन को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संभव हो सका, जबकि पहले यहाँ संचार, शिक्षा और सुरक्षा की गंभीर चुनौतियाँ थीं।

मुख्य घटनाक्रम

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जन दरबार को संबोधित करते हुए कहा, 'हम लगभग जीरो लाइन पर हैं। यह अंतरराष्ट्रीय सीमा है, पाकिस्तान की सीमा है। पहले यहाँ मोबाइल टावर नहीं थे, संचार व्यवस्था प्रभावित रहती थी, बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ता था, सड़कें नहीं थीं और लोगों को पैदल चलना पड़ता था।' उन्होंने बताया कि आज इस क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछ चुका है और मोबाइल टावर भी स्थापित हो गए हैं। एलओसी के पास दिए जाने वाले आरक्षण का लाभ भी अब इस क्षेत्र के निवासियों को मिलने लगा है।

जन दरबार की कार्यप्रणाली और असर

मंत्री ने बताया कि यह जन दरबार केवल जिला स्तर तक सीमित न रहकर ब्लॉक और पंचायत स्तर तक पहुँचने की एक सुनियोजित पहल का हिस्सा है। इसके तहत सभी संबंधित अधिकारियों को भी मौके पर बैठाया जाता है, जिससे अधिकांश समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण हो जाता है। उन्होंने कहा, 'हमारे गाँव के लोग बहुत सरल और संकोची होते हैं, वे सरकारी दफ्तरों में जाने से भी कई बार हिचकिचाते हैं।' आज का जन दरबार लगभग दो से ढाई घंटे तक चला और अधिकांश मामलों का या तो मौके पर समाधान हुआ या रोडमैप तैयार किया गया।

सुरक्षा ढाँचा: बंकर और गोलीबारी बंद

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सुरक्षा परिदृश्य में आए बदलाव पर विशेष जोर देते हुए बताया कि देश में सबसे पहले बंकर इसी सेक्टर में बनाए गए। वर्ष 2015 में इस कार्य की शुरुआत हुई थी। पहले चरण में लगभग 2,000 से 2,500 बंकर बने और फिर 1,000 और बनाए गए। उन्होंने कहा कि ये बंकर आज लगभग एक कमरे के फ्लैट जैसी सुविधाओं से युक्त हैं। गौरतलब है कि उनके अनुसार पहले हर तीसरे दिन सीमा पार से गोलीबारी होती थी, जो अब बंद हो चुकी है। उन्होंने कहा, 'नई पीढ़ी को शायद यह अनुभव भी न हो कि पहले यहाँ क्या परिस्थितियाँ थीं।'

रेल सेवाओं पर रुख

रेल संपर्क के मुद्दे पर डॉ. सिंह ने कहा कि कोरोना काल के बाद धीरे-धीरे अधिकांश ट्रेनें पुनः शुरू की गई हैं और क्षेत्र में दो वंदे भारत ट्रेनें भी प्रारंभ हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि पहले जम्मू मेल का ठहराव इस क्षेत्र में दिलाया गया, और अन्य ट्रेनों के स्टॉपेज के लिए भी प्रयास जारी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाके केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद विकास की नई परिभाषा तलाश रहे हैं।

आम जनता पर असर

सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए मोबाइल कनेक्टिविटी, सड़क संपर्क और सुरक्षित बंकर — तीनों मिलकर एक बड़ा जीवन-परिवर्तन बनाते हैं। इन इलाकों में स्कूली बच्चों की पढ़ाई, व्यापार और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ सभी संचार और सड़क पर निर्भर हैं। अब एलओसी-समकक्ष आरक्षण लाभ मिलने से इन क्षेत्रों के युवाओं को सरकारी नौकरियों में भी प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके साथ कुछ ज़रूरी सवाल भी उठते हैं। बंकरों और सड़कों का निर्माण निस्संदेह ज़मीनी बदलाव है, मगर इन गाँवों में रोज़गार, स्वास्थ्य सेवा और उच्च शिक्षा की उपलब्धता के आँकड़े सार्वजनिक रूप से अनुपलब्ध हैं। जन दरबार की 'मौके पर समाधान' की संस्कृति स्वागत योग्य है, परंतु यह स्थायी संस्थागत तंत्र का विकल्प नहीं हो सकती। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि सीमावर्ती शांति की जो बात कही गई है, उसकी पड़ताल स्वतंत्र सुरक्षा स्रोतों से होनी चाहिए — केवल राजनीतिक मंच से की गई घोषणाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कठुआ में डॉ. जितेंद्र सिंह का जन दरबार क्या है?
जन दरबार एक सरकारी जनसंपर्क कार्यक्रम है जिसमें केंद्रीय मंत्री और अधिकारी सीधे ब्लॉक व पंचायत स्तर पर जाकर नागरिकों की समस्याएँ सुनते और मौके पर हल करते हैं। 25 अक्टूबर 2026 को कठुआ के पाकिस्तान सीमावर्ती क्षेत्र में यह कार्यक्रम लगभग दो से ढाई घंटे तक चला।
पाकिस्तान सीमा के पास कितने बंकर बने हैं?
डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार वर्ष 2015 में बंकर निर्माण शुरू हुआ और पहले चरण में लगभग 2,000 से 2,500 बंकर बनाए गए, जिसके बाद 1,000 और बंकर निर्मित किए गए। ये बंकर अब एक कमरे के फ्लैट जैसी सुविधाओं से युक्त बताए गए हैं।
क्या पाकिस्तान सीमा पर गोलीबारी अब बंद हो गई है?
डॉ. जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि पहले हर तीसरे दिन सीमा पार से गोलीबारी होती थी, जो अब बंद हो चुकी है। हालाँकि इस दावे की पुष्टि स्वतंत्र सुरक्षा स्रोतों से होना आवश्यक है।
कठुआ सीमावर्ती क्षेत्र में रेल सेवाओं की क्या स्थिति है?
डॉ. सिंह ने बताया कि क्षेत्र में दो वंदे भारत ट्रेनें शुरू हो चुकी हैं और जम्मू मेल का ठहराव भी दिलाया गया है। अन्य ट्रेनों के स्टॉपेज के लिए रेलवे से प्रयास जारी हैं।
एलओसी आरक्षण का लाभ कठुआ सीमावर्ती क्षेत्र को कब से मिला?
डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार एलओसी के पास दिए जाने वाले आरक्षण का लाभ पहले इस क्षेत्र को नहीं मिलता था, लेकिन अब वह भी उपलब्ध करा दिया गया है। इससे इन गाँवों के युवाओं को सरकारी सेवाओं में प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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