डॉ. जितेंद्र सिंह का कठुआ में जन दरबार: बंकर, मोबाइल टावर और सड़कों से बदली पाक सीमा के गाँवों की तस्वीर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 25 अक्टूबर 2026 को कठुआ ज़िले के पाकिस्तान सीमावर्ती क्षेत्र में आयोजित जन दरबार कार्यक्रम के दौरान कहा कि पिछले 12-13 वर्षों में इन इलाकों में मोबाइल टावर, सड़क नेटवर्क और बंकर जैसी बुनियादी सुविधाओं ने सीमावर्ती निवासियों के जीवन को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संभव हो सका, जबकि पहले यहाँ संचार, शिक्षा और सुरक्षा की गंभीर चुनौतियाँ थीं।
मुख्य घटनाक्रम
डॉ. जितेंद्र सिंह ने जन दरबार को संबोधित करते हुए कहा, 'हम लगभग जीरो लाइन पर हैं। यह अंतरराष्ट्रीय सीमा है, पाकिस्तान की सीमा है। पहले यहाँ मोबाइल टावर नहीं थे, संचार व्यवस्था प्रभावित रहती थी, बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ता था, सड़कें नहीं थीं और लोगों को पैदल चलना पड़ता था।' उन्होंने बताया कि आज इस क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछ चुका है और मोबाइल टावर भी स्थापित हो गए हैं। एलओसी के पास दिए जाने वाले आरक्षण का लाभ भी अब इस क्षेत्र के निवासियों को मिलने लगा है।
जन दरबार की कार्यप्रणाली और असर
मंत्री ने बताया कि यह जन दरबार केवल जिला स्तर तक सीमित न रहकर ब्लॉक और पंचायत स्तर तक पहुँचने की एक सुनियोजित पहल का हिस्सा है। इसके तहत सभी संबंधित अधिकारियों को भी मौके पर बैठाया जाता है, जिससे अधिकांश समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण हो जाता है। उन्होंने कहा, 'हमारे गाँव के लोग बहुत सरल और संकोची होते हैं, वे सरकारी दफ्तरों में जाने से भी कई बार हिचकिचाते हैं।' आज का जन दरबार लगभग दो से ढाई घंटे तक चला और अधिकांश मामलों का या तो मौके पर समाधान हुआ या रोडमैप तैयार किया गया।
सुरक्षा ढाँचा: बंकर और गोलीबारी बंद
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सुरक्षा परिदृश्य में आए बदलाव पर विशेष जोर देते हुए बताया कि देश में सबसे पहले बंकर इसी सेक्टर में बनाए गए। वर्ष 2015 में इस कार्य की शुरुआत हुई थी। पहले चरण में लगभग 2,000 से 2,500 बंकर बने और फिर 1,000 और बनाए गए। उन्होंने कहा कि ये बंकर आज लगभग एक कमरे के फ्लैट जैसी सुविधाओं से युक्त हैं। गौरतलब है कि उनके अनुसार पहले हर तीसरे दिन सीमा पार से गोलीबारी होती थी, जो अब बंद हो चुकी है। उन्होंने कहा, 'नई पीढ़ी को शायद यह अनुभव भी न हो कि पहले यहाँ क्या परिस्थितियाँ थीं।'
रेल सेवाओं पर रुख
रेल संपर्क के मुद्दे पर डॉ. सिंह ने कहा कि कोरोना काल के बाद धीरे-धीरे अधिकांश ट्रेनें पुनः शुरू की गई हैं और क्षेत्र में दो वंदे भारत ट्रेनें भी प्रारंभ हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि पहले जम्मू मेल का ठहराव इस क्षेत्र में दिलाया गया, और अन्य ट्रेनों के स्टॉपेज के लिए भी प्रयास जारी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाके केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद विकास की नई परिभाषा तलाश रहे हैं।
आम जनता पर असर
सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए मोबाइल कनेक्टिविटी, सड़क संपर्क और सुरक्षित बंकर — तीनों मिलकर एक बड़ा जीवन-परिवर्तन बनाते हैं। इन इलाकों में स्कूली बच्चों की पढ़ाई, व्यापार और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ सभी संचार और सड़क पर निर्भर हैं। अब एलओसी-समकक्ष आरक्षण लाभ मिलने से इन क्षेत्रों के युवाओं को सरकारी नौकरियों में भी प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है।