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अनुच्छेद 370 हटने के बाद J&K के युवा राष्ट्रीय मंच पर छा रहे हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह

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अनुच्छेद 370 हटने के बाद J&K के युवा राष्ट्रीय मंच पर छा रहे हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह

सारांश

अनुच्छेद 370 की समाप्ति महज कानूनी बदलाव नहीं थी — डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार यह जम्मू-कश्मीर के युवाओं के आत्मविश्वास की पुनर्स्थापना थी। लखनपुर शिविर में उन्होंने कठुआ बायोटेक पार्क, 14 मेडिकल कॉलेज और हीरानगर स्टेडियम जैसी पहलों को इस बदलाव का प्रमाण बताया।

मुख्य बातें

जितेंद्र सिंह ने 24 मई 2026 को लखनपुर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान-2026 शिविर को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद J&K के युवाओं में नया आत्मविश्वास और राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन देखने को मिल रहा है।
2016 से लागू सरकारी साक्षात्कार-समाप्ति सुधार अनुच्छेद 370 के कारण J&K में पहले लागू नहीं हो सका था।
कठुआ में निर्माणाधीन बायोटेक पार्क से लगभग 25 उद्यमियों को रोजगार मिलेगा; जिले में 3 मेडिकल कॉलेज स्थापित।
J&K में दो एम्स और 14 मेडिकल कॉलेज स्थापित; हीरानगर में 300 कनाल भूमि पर अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम प्रस्तावित।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 24 मई 2026 को लखनपुर में आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान-2026 के शिविर को संबोधित करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 की समाप्ति ने जम्मू-कश्मीर में विकास की नई लहर के साथ-साथ लोगों की सोच में भी गहरा बदलाव लाया है। उनके अनुसार, इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद क्षेत्र के युवा अब बाधाओं को पार कर पूरे देश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं।

मानसिकता में बदलाव और नया आत्मविश्वास

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अनुच्छेद 370 की समाप्ति से जम्मू-कश्मीर के लोगों को भारत के समान नागरिक होने का वास्तविक अहसास हुआ। उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप क्षेत्र में नए सिरे से आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और आकांक्षाओं का उभार देखने को मिला है। मंत्री ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि हाल के वर्षों में जम्मू-कश्मीर के युवा लड़के-लड़कियों ने अपने भय पर काबू पाकर देश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

उन्होंने अनुच्छेद 370 को लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत और निहित स्वार्थों द्वारा शोषण को सक्षम बनाने वाला एक उपकरण बताया। साथ ही कहा कि वे स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्होंने उस ऐतिहासिक क्षण को देखा जिसने इस क्षेत्र में पूर्ण परिवर्तन की नींव रखी।

प्रशासनिक सुधार और क्षेत्रीय भेदभाव का अंत

डॉ. सिंह ने बताया कि 2016 से राष्ट्रीय स्तर पर अनेक सरकारी पदों के लिए साक्षात्कार समाप्त कर दिए गए थे, किंतु अनुच्छेद 370 के अस्तित्व के कारण यह सुधार जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं हो सका था। उन्होंने कहा कि पूर्व के वर्षों में जो क्षेत्रीय भेदभाव था, उससे अब क्षेत्र के लोग मुक्त हो रहे हैं और सकारात्मक बदलाव महसूस कर रहे हैं।

मंत्री ने 2014 से शासन के सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि देश निराशावाद, नकारात्मकता और भ्रष्टाचार के माहौल से निकलकर आशावाद, विकास और राष्ट्र निर्माण की ओर बढ़ा है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

कठुआ और जम्मू-कश्मीर में विकास पहल

डॉ. सिंह ने कठुआ में निर्माणाधीन बायोटेक पार्क का विशेष उल्लेख किया और बताया कि इससे लगभग 25 उद्यमियों को रोजगार के अवसर सुलभ होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि जम्मू-कश्मीर में स्थापित 14 मेडिकल कॉलेजों में से तीन अकेले कठुआ जिले में स्थित हैं — जो इस क्षेत्र में स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार का प्रमाण है।

केंद्र शासित प्रदेश में दो एम्स संस्थानों की स्थापना पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान इस क्षेत्र की उपेक्षा को ध्यान में रखते हुए इसे विशेष प्राथमिकता दी है। इसके अतिरिक्त, चेनानी-नाशरी सुरंग का नाम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर रखे जाने का भी उन्होंने उल्लेख किया, जिसे उन्होंने उनके योगदान को उचित सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

खेल अवसंरचना और भविष्य की योजनाएँ

खेल सुविधाओं के विकास पर चर्चा करते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि हीरानगर में लगभग 300 कनाल भूमि पर एक अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम के निर्माण के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि भूमि हस्तांतरण के संबंध में जम्मू-कश्मीर प्रशासन के साथ बातचीत अभी चल रही है। यह परियोजना क्षेत्र में युवाओं के लिए खेल के अवसरों को नई ऊँचाई देने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद J&K के युवाओं की UPSC, IIT, NIT जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं में भागीदारी और सफलता के आँकड़े क्या कहते हैं — जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। कठुआ बायोटेक पार्क और मेडिकल कॉलेजों जैसी परियोजनाएँ स्वागत योग्य हैं, परंतु 25 उद्यमियों तक सीमित रोजगार और अभी-भी-प्रस्तावित स्टेडियम यह दर्शाते हैं कि घोषणाएँ और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाई अभी पूरी तरह नहीं पटी है। मानसिकता में बदलाव का दावा सत्यापन योग्य संकेतकों — रोजगार दर, पलायन के आँकड़े, उद्यमिता सूचकांक — से जोड़े बिना अधूरा रहता है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. जितेंद्र सिंह ने लखनपुर शिविर में क्या कहा?
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर के युवाओं में नया आत्मविश्वास आया है और वे राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कठुआ बायोटेक पार्क, 14 मेडिकल कॉलेज और हीरानगर स्टेडियम जैसी विकास पहलों का भी उल्लेख किया।
अनुच्छेद 370 हटने से J&K के युवाओं पर क्या असर पड़ा?
मंत्री के अनुसार, अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद J&K के युवाओं को भारत के समान नागरिक होने का अहसास हुआ और उनमें आत्मसम्मान व आकांक्षाओं का नया उभार आया। साथ ही 2016 से लागू सरकारी साक्षात्कार-समाप्ति सुधार भी अब इस क्षेत्र में लागू हो सका।
कठुआ में कौन-सी नई विकास परियोजनाएँ शुरू हुई हैं?
कठुआ में एक बायोटेक पार्क निर्माणाधीन है जिससे लगभग 25 उद्यमियों को रोजगार मिलने की संभावना है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के 14 मेडिकल कॉलेजों में से 3 कठुआ जिले में स्थित हैं।
हीरानगर अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम की क्या स्थिति है?
हीरानगर में लगभग 300 कनाल भूमि पर अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बनाने के प्रयास चल रहे हैं। भूमि हस्तांतरण के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन के साथ बातचीत अभी जारी है।
चेनानी-नाशरी सुरंग का नाम किसके नाम पर रखा गया है?
चेनानी-नाशरी सुरंग का नाम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर रखा गया है। डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, यह जम्मू-कश्मीर में उनके नाम पर रखी गई पहली बड़ी परियोजना है।
राष्ट्र प्रेस
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