केरल पीएससी घोटाला: चेयरमैन बैजू पर एसआईटी का शिकंजा, भाजपा का राष्ट्रपति मुर्मु से मिलने का फैसला
सारांश
मुख्य बातें
केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) के चेयरमैन एम.आर. बैजू पर 5 नवंबर 2026 को दबाव और बढ़ गया, जब स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने स्टेट प्लानिंग बोर्ड की परीक्षा में हुई धांधली की जांच तेज कर दी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पूरे पीएससी बोर्ड को बर्खास्त करने की माँग तेज कर दी। आयोग की विश्वसनीयता पर इस परीक्षा घोटाले ने गहरा आघात किया है, और अब राजनीतिक व जाँच — दोनों मोर्चों पर घेराबंदी और कड़ी होती जा रही है।
एसआईटी की जांच और आमना-सामना
एसआईटी चेयरमैन बैजू से दोबारा पूछताछ करना चाहती है। इस बार गिरफ्तार किए गए एडिशनल सेक्रेटरी आर. हरि को भी साथ बिठाया जाएगा, ताकि दोनों का आमना-सामना कराया जा सके। सूत्रों के अनुसार, बैजू पूछताछ से बचने के लिए बहाने बना रहे हैं, जिसे क्राइम ब्रांच संदेह की नज़र से देख रही है।
क्राइम ब्रांच का मानना है कि चेयरमैन के मनमाने फैसलों के कारण ही यह गड़बड़ियाँ हुईं। हिरासत में लिए गए हरि ने जाँचकर्ताओं को बताया कि 10 सवालों की जाँच न होने की जिम्मेदारी अब सेवानिवृत्त हो चुके डिप्टी सेक्रेटरी सतीश की थी और उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। एसआईटी ने उनके इस स्पष्टीकरण को खारिज कर दिया है।
परीक्षा में धांधली का पूरा विवरण
यह परीक्षा स्टेट प्लानिंग बोर्ड में 'चीफ' के पद के लिए आयोजित की गई थी, जिसमें पहले पेपर में कुल 228 उम्मीदवार शामिल हुए। जाँच में उजागर हुआ कि प्रश्न संख्या 10 से 18, जो 58 अंकों के थे, किसी भी उम्मीदवार के लिए जाँचे ही नहीं गए।
51 उम्मीदवारों के मामले में केवल प्रश्न 1-9 और 18-28 की ही जाँच हुई, जबकि शेष 177 उम्मीदवारों के लिए केवल प्रश्न 1-8 और 18-28 का मूल्यांकन किया गया। जाँच में सामने आया कि एक फर्जी सॉफ्टवेयर लॉगिन के जरिए मूल्यांकन प्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया गया था — जो साइबर हस्तक्षेप की ओर इशारा करता है।
पीएससी के भीतर से ही बैजू पर आरोप
पीएससी के सदस्यों ने जाँचकर्ताओं को बताया कि प्रश्न-पत्र तैयार करने वाले पैनल और उत्तर पुस्तिकाओं की जाँच करने वाले अधिकारियों का चयन अकेले बैजू ने ही किया था।
पीएससी सेक्रेटरी साजू जॉर्ज ने क्राइम ब्रांच को बताया कि बैजू बिना किसी से सलाह लिए फैसले लेते थे और जब भी विवाद होता, वे अधिकारियों पर दोष मढ़ देते थे। उन्होंने यह भी कहा कि बैजू और हरि मिलकर निर्णय लेते थे, परंतु चेयरमैन अकसर अपनी मनमर्जी ही चलाते थे।
भाजपा का राजनीतिक दबाव और राष्ट्रपति से मुलाकात
BJP का तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करने वाला है। इस प्रतिनिधिमंडल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक, राजीव चंद्रशेखर, और राज्यसभा के मनोनीत सदस्य सी. सदानंदन व पी.टी. उषा शामिल हैं।
यह कदम निवर्तमान राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर द्वारा राष्ट्रपति को लिखे गए उस पत्र के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने गंभीर आरोपों के मद्देनज़र मौजूदा पीएससी बोर्ड को बर्खास्त करने की माँग की है। गौरतलब है कि यह दबाव ऐसे समय में बढ़ रहा है जब केरल में सत्तारूढ़ सीपीआई (एम) पहले से ही कई मोर्चों पर घिरी हुई है।
सीपीआई (एम) समर्थक संघ का विरोध और आगे की राह
सीपीआई (एम) समर्थक पीएससी कर्मचारी संघ ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उनकी माँग है कि पीएससी को उसके हाल पर छोड़ा जाए और बदले की भावना से उठाए गए कदमों से आयोग की विश्वसनीयता को और नुकसान न पहुँचाया जाए। यह विरोध सत्तारूढ़ दल के भीतर भी जाँच की स्वतंत्रता को लेकर असहजता की ओर संकेत करता है।
परीक्षा घोटाले ने केरल पीएससी की संस्थागत साख को गहरी चोट पहुँचाई है। आने वाले दिनों में एसआईटी का आमना-सामना और भाजपा प्रतिनिधिमंडल की राष्ट्रपति से मुलाकात इस मामले को और पेचीदा बना सकती है।