5 नवंबर 2026
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केरल पीएससी घोटाला: चेयरमैन बैजू पर एसआईटी का शिकंजा, भाजपा का राष्ट्रपति मुर्मु से मिलने का फैसला

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केरल पीएससी घोटाला: चेयरमैन बैजू पर एसआईटी का शिकंजा, भाजपा का राष्ट्रपति मुर्मु से मिलने का फैसला

सारांश

केरल पीएससी परीक्षा घोटाले में एसआईटी ने चेयरमैन बैजू और गिरफ्तार एडिशनल सेक्रेटरी हरि का आमना-सामना कराने की तैयारी की है। फर्जी सॉफ्टवेयर लॉगिन से 228 उम्मीदवारों की उत्तर पुस्तिकाओं में धांधली का आरोप है। भाजपा का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिलकर पूरे पीएससी बोर्ड की बर्खास्तगी की माँग करेगा।

मुख्य बातें

एसआईटी केरल पीएससी चेयरमैन एम.आर.
बैजू और गिरफ्तार एडिशनल सेक्रेटरी आर.
हरि के बीच आमना-सामना कराने की तैयारी में है।
परीक्षा में 228 उम्मीदवारों में से किसी के लिए भी प्रश्न संख्या 10 से 18 ( 58 अंक ) की जाँच नहीं की गई।
जाँच में सामने आया कि एक फर्जी सॉफ्टवेयर लॉगिन से मूल्यांकन प्रक्रिया बीच में रोकी गई।
पीएससी सेक्रेटरी साजू जॉर्ज ने बताया कि बैजू बिना सलाह के फैसले लेते थे और विवाद पर अधिकारियों पर दोष मढ़ते थे।
भाजपा का तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल — राजीव चंद्रशेखर, सी.
उषा — राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलकर पीएससी बोर्ड की बर्खास्तगी की माँग करेगा।
निवर्तमान राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर पहले ही राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मौजूदा बोर्ड को हटाने की माँग कर चुके हैं।

केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) के चेयरमैन एम.आर. बैजू पर 5 नवंबर 2026 को दबाव और बढ़ गया, जब स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने स्टेट प्लानिंग बोर्ड की परीक्षा में हुई धांधली की जांच तेज कर दी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पूरे पीएससी बोर्ड को बर्खास्त करने की माँग तेज कर दी। आयोग की विश्वसनीयता पर इस परीक्षा घोटाले ने गहरा आघात किया है, और अब राजनीतिक व जाँच — दोनों मोर्चों पर घेराबंदी और कड़ी होती जा रही है।

एसआईटी की जांच और आमना-सामना

एसआईटी चेयरमैन बैजू से दोबारा पूछताछ करना चाहती है। इस बार गिरफ्तार किए गए एडिशनल सेक्रेटरी आर. हरि को भी साथ बिठाया जाएगा, ताकि दोनों का आमना-सामना कराया जा सके। सूत्रों के अनुसार, बैजू पूछताछ से बचने के लिए बहाने बना रहे हैं, जिसे क्राइम ब्रांच संदेह की नज़र से देख रही है।

क्राइम ब्रांच का मानना है कि चेयरमैन के मनमाने फैसलों के कारण ही यह गड़बड़ियाँ हुईं। हिरासत में लिए गए हरि ने जाँचकर्ताओं को बताया कि 10 सवालों की जाँच न होने की जिम्मेदारी अब सेवानिवृत्त हो चुके डिप्टी सेक्रेटरी सतीश की थी और उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। एसआईटी ने उनके इस स्पष्टीकरण को खारिज कर दिया है।

परीक्षा में धांधली का पूरा विवरण

यह परीक्षा स्टेट प्लानिंग बोर्ड में 'चीफ' के पद के लिए आयोजित की गई थी, जिसमें पहले पेपर में कुल 228 उम्मीदवार शामिल हुए। जाँच में उजागर हुआ कि प्रश्न संख्या 10 से 18, जो 58 अंकों के थे, किसी भी उम्मीदवार के लिए जाँचे ही नहीं गए।

51 उम्मीदवारों के मामले में केवल प्रश्न 1-9 और 18-28 की ही जाँच हुई, जबकि शेष 177 उम्मीदवारों के लिए केवल प्रश्न 1-8 और 18-28 का मूल्यांकन किया गया। जाँच में सामने आया कि एक फर्जी सॉफ्टवेयर लॉगिन के जरिए मूल्यांकन प्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया गया था — जो साइबर हस्तक्षेप की ओर इशारा करता है।

पीएससी के भीतर से ही बैजू पर आरोप

पीएससी के सदस्यों ने जाँचकर्ताओं को बताया कि प्रश्न-पत्र तैयार करने वाले पैनल और उत्तर पुस्तिकाओं की जाँच करने वाले अधिकारियों का चयन अकेले बैजू ने ही किया था।

पीएससी सेक्रेटरी साजू जॉर्ज ने क्राइम ब्रांच को बताया कि बैजू बिना किसी से सलाह लिए फैसले लेते थे और जब भी विवाद होता, वे अधिकारियों पर दोष मढ़ देते थे। उन्होंने यह भी कहा कि बैजू और हरि मिलकर निर्णय लेते थे, परंतु चेयरमैन अकसर अपनी मनमर्जी ही चलाते थे।

भाजपा का राजनीतिक दबाव और राष्ट्रपति से मुलाकात

BJP का तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करने वाला है। इस प्रतिनिधिमंडल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक, राजीव चंद्रशेखर, और राज्यसभा के मनोनीत सदस्य सी. सदानंदन व पी.टी. उषा शामिल हैं।

यह कदम निवर्तमान राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर द्वारा राष्ट्रपति को लिखे गए उस पत्र के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने गंभीर आरोपों के मद्देनज़र मौजूदा पीएससी बोर्ड को बर्खास्त करने की माँग की है। गौरतलब है कि यह दबाव ऐसे समय में बढ़ रहा है जब केरल में सत्तारूढ़ सीपीआई (एम) पहले से ही कई मोर्चों पर घिरी हुई है।

सीपीआई (एम) समर्थक संघ का विरोध और आगे की राह

सीपीआई (एम) समर्थक पीएससी कर्मचारी संघ ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उनकी माँग है कि पीएससी को उसके हाल पर छोड़ा जाए और बदले की भावना से उठाए गए कदमों से आयोग की विश्वसनीयता को और नुकसान न पहुँचाया जाए। यह विरोध सत्तारूढ़ दल के भीतर भी जाँच की स्वतंत्रता को लेकर असहजता की ओर संकेत करता है।

परीक्षा घोटाले ने केरल पीएससी की संस्थागत साख को गहरी चोट पहुँचाई है। आने वाले दिनों में एसआईटी का आमना-सामना और भाजपा प्रतिनिधिमंडल की राष्ट्रपति से मुलाकात इस मामले को और पेचीदा बना सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक ऐसी संस्थागत विफलता है जिसमें चेयरमैन के एकाधिकारवादी निर्णय-तंत्र ने आंतरिक जाँच की सारी परतें धवस्त कर दीं। फर्जी सॉफ्टवेयर लॉगिन और 58 अंकों के प्रश्नों को बिना जाँचे छोड़ देना यह दर्शाता है कि तकनीकी व्यवस्था भी किसी एक व्यक्ति की मनमर्जी को रोक नहीं सकी। भाजपा का राष्ट्रपति-कार्ड राजनीतिक दबाव का हथियार तो है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सरकार पीएससी की संरचनात्मक खामियों को दुरुस्त करेगी — या फिर सिर्फ शीर्ष अधिकारियों को बदलकर काम चला लेगी। सीपीआई (एम) समर्थक कर्मचारी संघ का विरोध यह भी दर्शाता है कि सत्तारूढ़ दल जाँच की स्वतंत्रता पर असहज है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल पीएससी परीक्षा घोटाला क्या है?
स्टेट प्लानिंग बोर्ड में 'चीफ' पद के लिए आयोजित परीक्षा में 228 उम्मीदवारों की उत्तर पुस्तिकाओं में से 58 अंकों के प्रश्न (प्रश्न संख्या 10 से 18) किसी के लिए भी जाँचे नहीं गए। जाँच में पता चला कि एक फर्जी सॉफ्टवेयर लॉगिन के ज़रिये मूल्यांकन प्रक्रिया को बीच में ही रोका गया था।
चेयरमैन एम.आर. बैजू पर क्या आरोप हैं?
पीएससी सदस्यों और सेक्रेटरी साजू जॉर्ज ने जाँचकर्ताओं को बताया कि बैजू ने प्रश्न-पत्र पैनल और मूल्यांकनकर्ताओं का चयन अकेले किया था। क्राइम ब्रांच का मानना है कि उनके मनमाने फैसलों की वजह से ही यह गड़बड़ियाँ हुईं, और वे पूछताछ से बचने के लिए बहाने बना रहे हैं।
भाजपा राष्ट्रपति से क्यों मिलने जा रही है?
भाजपा का तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल — राजीव चंद्रशेखर, सी. सदानंदन और पी.टी. उषा — राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलकर पूरे पीएससी बोर्ड की बर्खास्तगी की माँग करेगा। यह कदम निवर्तमान राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर के उस पत्र के बाद उठाया गया है जिसमें उन्होंने भी यही माँग की है।
एडिशनल सेक्रेटरी आर. हरि की क्या भूमिका है?
हरि को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने जाँचकर्ताओं को बताया कि 10 सवालों की जाँच न होने की जिम्मेदारी सेवानिवृत्त डिप्टी सेक्रेटरी सतीश की थी और उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। एसआईटी ने यह स्पष्टीकरण स्वीकार नहीं किया है और उन्हें बैजू के साथ आमने-सामने बिठाने की तैयारी है।
इस मामले में सीपीआई (एम) का रुख क्या है?
सीपीआई (एम) समर्थक पीएससी कर्मचारी संघ विरोध-प्रदर्शन कर रहा है और माँग कर रहा है कि आयोग को उसके हाल पर छोड़ा जाए। उनका कहना है कि बदले की भावना से की गई किसी भी कार्रवाई से पीएससी की साख और कमज़ोर होगी।
राष्ट्र प्रेस
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