दीपावली 2026 के टॉप गाने: 'आई है दिवाली' से 'जलते दिए' तक, ये क्लासिक धुनें बनाएंगी उत्सव यादगार
सारांश
मुख्य बातें
दीपावली के त्योहार पर मुंबई से लेकर देशभर के घर-आँगन तक संगीत की महफिलें सज जाती हैं, और इस साल भी पुराने क्लासिक गीतों से लेकर नए बॉलीवुड नंबरों तक की एक लंबी फेहरिस्त श्रोताओं की प्लेलिस्ट में अपनी जगह बना चुकी है। रोशनी और दीयों के इस पर्व पर संगीत का अपना एक अलग ही जादू होता है, जो उत्सव के रंग को और गहरा कर देता है।
सदाबहार क्लासिक: 'आई है दिवाली'
फिल्म 'आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया' का गीत 'आई है दिवाली' आज भी हर दिवाली पर हर घर, मोहल्ले और सार्वजनिक पंडालों में गूँजता है। उदित नारायण, अलका याग्निक, कुमार सानु, शान, केतकी दवे और स्नेहा पंत की सुरीली आवाज़ों को हिमेश रेशमिया ने संगीतबद्ध किया, जबकि बोल सुधाकर शर्मा की कलम से उतरे। यह गीत बरसों बाद भी उतना ही ताज़ा और ऊर्जावान लगता है जितना पहले दिन था।
बच्चों की पसंद: 'मेरे तुम्हारे सबके लिए हैप्पी दिवाली'
फिल्म 'होम डिलीवरी' का यह गीत गायकों वैशाली, सूरज और सुनिधि चौहान की आवाज़ में है और बच्चों पर फिल्माया गया था। अपनी सरलता और ऊर्जा के कारण यह गाना छोटे से बड़े सभी की दिवाली प्लेलिस्ट में अनिवार्य रूप से शामिल हो जाता है। आज के दौर में सोशल मीडिया रील्स, व्हाट्सएप स्टेटस और पारिवारिक उत्सवों में यह गीत लगातार सुनाई देता है।
एथनिक लुक का साउंडट्रैक: 'जलते दिए'
फिल्म 'प्रेम रतन धन पायो' का यह मधुर गीत 'जलते दिए' दिवाली के माहौल में एक अलग ही भावनात्मक गहराई लाता है। इसे अन्वेषा, विनीत सिंह, हर्षदीप कौर और शबाब सबरी — चार गायकों ने मिलकर गाया है। लड़कियाँ विशेष रूप से अपने दिवाली एथनिक लुक और सजावट के वीडियो में इस गाने का भरपूर उपयोग करती हैं।
आस्था और उत्सव का संगम: 'राम अयोध्या आए हैं'
गायक कैलाश खेर का यह प्रसिद्ध गीत 'राम अयोध्या आए हैं' पहली बार 24 अक्टूबर 2022 को रिलीज़ हुआ था। जनवरी 2024 में अयोध्या राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के अवसर पर इस गीत को असाधारण लोकप्रियता मिली। तब से यह दिवाली के धार्मिक माहौल में भी एक प्रिय गीत बन चुका है।
इतिहास से आई धुन: 'आई दिवाली आई कैसे उजाले लाई'
हिंदी सिनेमा के सबसे पुराने दिवाली गीतों में से एक, वर्ष 1958 में आई फिल्म 'खजांची' का यह गीत आज भी त्योहारी सीज़न में लोगों के दिलों में एक विशेष स्थान रखता है। सात दशकों से अधिक समय बाद भी इस गीत की ताज़गी और सरलता इसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रासंगिक बनाए रखती है। यह भारतीय संगीत की उस परंपरा का प्रमाण है जो त्योहारों को सुर और लय से और अधिक जीवंत बना देती है।
इस दीपावली अपने परिवार और मित्रों के साथ इन कालजयी धुनों को अपनी महफिल में शामिल करें — पुरानी यादें ताज़ा होंगी और नया उत्साह भी जागेगा।