जन्माष्टमी 2026: 'राधा कैसे ना जले' से 'वो किसना है' तक — कान्हा की भक्ति में डुबोने वाले 7 बॉलीवुड गाने
सारांश
मुख्य बातें
जन्माष्टमी के पावन अवसर पर जब मंदिरों में दीपों की रोशनी जगमगाती है और घरों में लड्डू गोपाल की झाँकियाँ सजती हैं, तो बॉलीवुड के कुछ खास गाने इस उत्सव की आत्मा को और गहरा कर देते हैं। राधा-कृष्ण के प्रेम, बाल कृष्ण की शरारतों और दही-हांडी के जोश को संगीत में पिरोने का काम हिंदी सिनेमा ने दशकों से किया है। यहाँ प्रस्तुत हैं वे 7 बॉलीवुड गाने जो हर जन्माष्टमी पर प्लेलिस्ट में अपनी जगह पक्की रखते हैं।
राधा कैसे ना जले — लगान (2001)
जन्माष्टमी की किसी भी संगीत सूची में 'राधा कैसे ना जले' का नाम सबसे पहले आता है। 2001 में प्रदर्शित फिल्म 'लगान' के इस गाने में राधा-कृष्ण के नटखट रिश्ते को जीवंत रूप दिया गया है। आमिर खान कृष्ण के अंदाज़ में नज़र आते हैं, जबकि ग्रेसी सिंह राधा का किरदार निभाती हैं। राधा की वह ईर्ष्या और शिकायत — जब वह कृष्ण को दूसरी गोपियों के साथ देखती है — इस गाने की सबसे मार्मिक भावना है। आशा भोसले और उदित नारायण की आवाज़ में गाए इस गीत का संगीत ए.आर. रहमान ने और बोल जावेद अख्तर ने लिखे हैं।
वो किसना है — किसना: द वॉरियर पोएट (2005)
भक्ति और भव्यता का अनूठा संगम चाहिए तो 'वो किसना है' सुनना अनिवार्य है। 2005 में आई फिल्म 'किसना: द वॉरियर पोएट' के इस गाने में विवेक ओबेरॉय मुख्य भूमिका में थे। गाने में श्रीकृष्ण के सौंदर्य, शक्ति और अलौकिक व्यक्तित्व का काव्यात्मक वर्णन है। सुखविंदर सिंह, इस्माइल दरबार और आयशा दरबार की आवाज़ों ने इसे जीवंत किया, जबकि बोल जावेद अख्तर ने लिखे।
मैया यशोदा — हम साथ-साथ हैं (1999)
बाल कृष्ण और यशोदा मैया के ममतामयी रिश्ते को 'मैया यशोदा' गाने से बेहतर शायद ही किसी फिल्मी गाने ने दर्शाया हो। सूरज बड़जात्या की फिल्म 'हम साथ-साथ हैं' (1999) के इस गाने में करिश्मा कपूर, तब्बू और सोनाली बेंद्रे कृष्ण की शरारतों की शिकायत करती नज़र आती हैं। अलका याग्निक, अनुराधा पौडवाल और कविता कृष्णमूर्ति की मधुर आवाज़ों में गाया यह गीत आज भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बच्चों और महिलाओं की पसंदीदा प्रस्तुति है।
बड़ा नटखट है रे — अमर प्रेम (1972)
पाँच दशक से भी अधिक पुराना 'बड़ा नटखट है रे' कृष्ण भक्ति के सदाबहार गीतों में अग्रणी स्थान रखता है। 1972 में प्रदर्शित फिल्म 'अमर प्रेम' के इस गाने में माँ की नज़र से बाल कृष्ण की चंचलता को चित्रित किया गया है। लता मंगेशकर की कालजयी आवाज़, आनंद बख्शी के सरल बोल और आर.डी. बर्मन का संगीत — इन तीनों के संयोग ने इस गीत को अमर बना दिया।
गो गो गोविंदा — ओह माय गॉड! (2012)
दही-हांडी के उत्साह और उमंग को जिस गाने ने सबसे ऊर्जावान ढंग से प्रस्तुत किया, वह है 'गो गो गोविंदा'। अक्षय कुमार और परेश रावल अभिनीत फिल्म 'ओह माय गॉड!' के इस गाने में सोनाक्षी सिन्हा और प्रभुदेवा का जोशीला नृत्य देखते ही बनता है। श्रेया घोषाल और अमन त्रिखा की आवाज़ में यह गाना मटकी फोड़ने की परंपरा को एक उत्सवी रंग देता है।
राधे राधे — ड्रीम गर्ल (2019)
नई पीढ़ी के बीच जन्माष्टमी का माहौल बनाने में 'राधे राधे' की भूमिका उल्लेखनीय है। 2019 में आई आयुष्मान खुराना और नुसरत भरूचा अभिनीत फिल्म 'ड्रीम गर्ल' के इस गाने में राधा-कृष्ण के प्रेम को एक आधुनिक और हल्के-फुल्के अंदाज़ में पेश किया गया है। अमित गुप्ता और मीत ब्रदर्स की आवाज़ में गाए इस गाने के बोल दोनों के बिछोह की पीड़ा को सरल शब्दों में व्यक्त करते हैं।
मोहे रंग दो लाल — बाजीराव मस्तानी (2015)
शास्त्रीय संगीत और नृत्य के अद्भुत संगम का प्रतीक 'मोहे रंग दो लाल' कृष्ण-भक्ति गीतों की सूची में एक विशिष्ट स्थान रखता है। संजय लीला भंसाली की फिल्म 'बाजीराव मस्तानी' के इस गाने में दीपिका पादुकोण का किरदार श्रीकृष्ण की आराधना में लीन दिखता है। श्रेया घोषाल और पंडित बिरजू महाराज की आवाज़ ने इस गीत को एक अलग ऊँचाई दी है। यह गाना जन्माष्टमी के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शास्त्रीय प्रस्तुतियों के लिए विशेष रूप से पसंद किया जाता है।
गौरतलब है कि बॉलीवुड ने कृष्ण-भक्ति को केवल पारंपरिक ढाँचे में नहीं बाँधा — हर दशक में नए रंग और नई शैलियों से इन गीतों को समृद्ध किया गया है, जिससे ये पीढ़ी-दर-पीढ़ी जन्माष्टमी की धड़कन बने हुए हैं।